
Death Certificate: अब जिंदगी की दौड़ खत्म होने के बाद अपनों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। बिहार सरकार ने ऐसी व्यवस्था की है कि मृत्यु का प्रमाण पत्र अब मात्र 24 घंटे में आपके हाथ में होगा, जिससे न केवल समय बचेगा बल्कि दलालों के मकड़जाल से भी मुक्ति मिलेगी।
Death Certificate के लिए अब नहीं लगेगा 21 दिनों का लंबा इंतजार
बिहार की पंचायत व्यवस्था एक बड़े और सकारात्मक बदलाव की ओर अग्रसर है। अब तक जिस मृत्यु प्रमाण पत्र को बनवाने में लगभग 21 दिन का समय लगता था और लोगों को दफ्तरों के कई चक्कर काटने पड़ते थे, वह अब मात्र 24 घंटे के अंदर उपलब्ध होगा। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के अनुसार, विभाग इस प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी बनाने जा रहा है। इसके लिए एक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन विकसित किया जा रहा है, जो इस काम को बेहद आसान बना देगा। इस नई प्रणाली से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
वर्तमान व्यवस्था की जटिलताओं के कारण अक्सर शोकाकुल परिवार को प्रमाणपत्र के लिए बिचौलियों का सहारा लेना पड़ता था, जिसमें पैसों की बर्बादी भी होती थी। लेकिन अब पंचायत सचिव और अन्य संबंधित कर्मी मोबाइल ऐप के जरिए मृतक की जानकारी तुरंत अपलोड करेंगे, जिससे प्रमाणपत्र तत्काल जारी किया जा सकेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह कदम नीतीश सरकार के उस विजन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं को आम लोगों के लिए सुलभ बनाना है।
कैसे काम करेगी यह नई डिजिटल प्रणाली और वार्ड सदस्यों की क्या होगी भूमिका?
इस नई व्यवस्था की रीढ़ वार्ड सदस्य होंगे, जिनकी भूमिका को पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बनाया गया है। सरकार ने उनकी जिम्मेदारियों को बढ़ाते हुए उन्हें आर्थिक रूप से प्रोत्साहित करने की भी योजना बनाई है।
- श्मशान घाट या कब्रिस्तान के पास रहने वाले वार्ड सदस्य को मृतक की पहचान और पुष्टि की प्राथमिक जिम्मेदारी दी जाएगी।
- इस काम के लिए उन्हें प्रतिमाह 2000 रुपये का मानदेय देने का प्रस्ताव है।
- इसके अतिरिक्त, प्रत्येक मृत्यु की पुष्टि और जानकारी ऐप पर अपलोड करने पर उन्हें 100 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।
- यदि किसी कारणवश वार्ड सदस्य उपलब्ध नहीं है, तो यह जिम्मेदारी किसी अन्य स्थानीय कर्मी को सौंपी जाएगी ताकि प्रक्रिया में कोई रुकावट न आए।
पहचान की प्रक्रिया को foolproof बनाने के लिए मृतक के परिजनों, पड़ोसियों और गांव के अन्य लोगों से भी जानकारी जुटाई जाएगी। यह पूरी कवायद पंचायती राज विभाग की देखरेख में होगी ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोई गुंजाइश न रहे।
श्मशान घाट बनेंगे “मोक्षधाम”, पंचायत भवन होंगे हाईटेक
सरकार की योजना सिर्फ प्रमाणपत्र जारी करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अंतिम संस्कार के लिए बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने पर भी जोर है। राज्य भर के श्मशान घाटों को “मोक्षधाम” के रूप में विकसित करने की एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। प्रत्येक मोक्षधाम के विकास पर लगभग 19 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसके तहत वहां शेड, स्वच्छ पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाओं का निर्माण होगा।
इसके साथ ही, पंचायत सरकार भवनों को भी तकनीकी रूप से उन्नत किया जाएगा। इन भवनों में कंप्यूटराइज्ड प्रणाली स्थापित की जाएगी, जहां से मृत्यु प्रमाण पत्र बनाकर सीधे मोबाइल ऐप पर अपलोड कर दिया जाएगा। एक बार डेटा डिजिटल रूप से संग्रहीत हो जाने के बाद यह हमेशा के लिए सुरक्षित रहेगा और भविष्य में इसे कभी भी आसानी से प्राप्त किया जा सकेगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह पहल ग्रामीण प्रशासन में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार को खत्म करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से न केवल लोगों का समय और पैसा बचेगा, बल्कि सरकारी तंत्र में उनका भरोसा भी मजबूत होगा।



