
LNMU NSS: सरकारी खजाने से आया पैसा अगर सही तरीके से खर्च न हो, तो विकास की गाड़ी पटरी से उतर जाती है। इसी गाड़ी को सही रास्ते पर रखने के लिए ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के एनएसएस पदाधिकारियों की एक अहम बैठक हुई, जिसमें फंड मैनेजमेंट के गुर सिखाए गए।ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के एनएसएस कोषांग ने एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में विश्वविद्यालय से जुड़े चार जिलों- दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर और बेगूसराय के कार्यक्रम पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य सरकार से मिलने वाली राशि के सही स्थानांतरण, खर्च के तरीके और उसकी उपयोगिता पर चर्चा करना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता एनएसएस समन्वयक डॉ. आर. एन. चौरसिया ने की।
बैठक का उद्घाटन बिहार-झारखंड एनएसएस के क्षेत्रीय निदेशक विनय कुमार ने किया, जबकि मुख्य वक्ता के तौर पर मुंगेर विश्वविद्यालय के एनएसएस समन्वयक डॉ. मुनीन्द्र कुमार सिंह ने अपनी बात रखी। इस ऑनलाइन बैठक में 40 से अधिक पदाधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए, जिन्होंने फंड प्रबंधन की नई प्रणाली को समझा।
LNMU NSS की हर इकाई को मिलेंगे 71,000 रुपये
बैठक को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय निदेशक विनय कुमार ने सरकारी पैसे के खर्च को लेकर कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा, “एनएसएस के लिए सरकार से प्राप्त राशि को केवल उच्चाधिकारियों के आदेश पर ही व्यय करें। खर्च के बाद बिलों को सुरक्षित रखना अनिवार्य है, क्योंकि समय-समय पर इसका ऑडिट होता है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार, सीएनए (CNA) खाता खोलने वाली प्रत्येक इकाई को विशेष शिविर के लिए 35,000 रुपये और नियमित गतिविधियों के लिए 36,000 रुपये दिए जाएंगे। इस तरह हर इकाई को प्रति वर्ष कुल 71,000 रुपये का सरकारी अनुदान मिलेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालयों में एनएसएस की नई इकाइयां खोलने के लिए भारत सरकार से और अधिक इकाइयों की मांग की गई है।
क्या है पीएफएमएस और कैसे काम करता है?
मुख्य वक्ता डॉ. मुनीन्द्र कुमार सिंह ने सीएनए खाते के महत्व पर प्रकाश डाला और पीएफएमएस (PFMS) प्रणाली के संचालन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने प्रायोगिक तौर पर पूरी प्रक्रिया को समझाया ताकि किसी तरह का भ्रम न रहे।उन्होंने बताया कि कैसे:
- पीएफएमएस का एडमिन आईडी प्राप्त कर डाटा ऑपरेटर और डाटा अप्रूवल आईडी बनानी है।
- डाटा ऑपरेटर आईडी से वेंडर को जोड़कर उसकी मैपिंग करनी है।
- खर्च की जानकारी दर्ज कर डाटा अप्रूवल आईडी से उसे स्वीकृत करना है।
- अंत में पेमेंट एडवाइस (PPA) जनरेट कर बैंक में जमा करना है।
यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि सरकारी पैसे का हर रुपया सही जगह और सही काम के लिए खर्च हो रहा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
30 कॉलेजों का सीएनए खाता तैयार, बाकियों को जल्द निर्देश
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एनएसएस समन्वयक डॉ. आर. एन. चौरसिया ने बताया कि अब तक लगभग 30 इकाइयों का सीएनए खाता खोला जा चुका है और उनकी मैपिंग भी विश्वविद्यालय से हो गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जिन कॉलेजों ने अभी तक यह खाता नहीं खोला है, उन्हें जल्द से जल्द स्टेट बैंक में खाता खोलने के लिए रिमाइंडर भेजा गया है। इसका उद्देश्य यह है कि किसी भी कॉलेज को समय पर अनुदान प्राप्त करने में कोई परेशानी न हो। बैठक के अंत में एक प्रश्नोत्तर सत्र भी रखा गया, जिसमें पदाधिकारियों ने अपने सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने समाधान दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. सोनू राम शंकर ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. लक्ष्मण यादव ने प्रस्तुत किया।






