
Cyber Fraud News: डिजिटल दुनिया में ठगी के नए-नए जाल बुने जा रहे हैं, जहां तकनीक ही शिकार और शिकारी दोनों बन रही है। साइबर अपराधी अब ऐसे तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए भी चुनौती बनते जा रहे हैं।
साइबर फ्रॉड: सीबीआई ने संभाली बड़े ‘साइबर फ्रॉड’ की कमान, फर्जी सिम बॉक्स से ठगी का बड़ा खुलासा
बड़े Cyber Fraud मामले की CBI जांच का आरंभ
देश की केंद्रीय जांच एजेंसी, सीबीआई ने एक विशाल धोखाधड़ी के मामले में अपनी पड़ताल शुरू कर दी है। यह मामला फर्जी सिम बॉक्स का इस्तेमाल कर इंटरनेट कॉलिंग और मैसेजिंग के जरिए की जा रही बड़े पैमाने की धोखाधड़ी से जुड़ा है। सीबीआई ने इस गंभीर अपराध को लेकर अपनी प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। यह केस पहले बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) के पास था, जिसने 20 जुलाई, 2025 को इस संबंध में शिकायत दर्ज की थी। यह धोखाधड़ी न केवल वित्तीय अपराध का एक बड़ा रूप है, बल्कि इसने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी चिंताएं बढ़ा दी हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। फर्जी सिम बॉक्स के इस्तेमाल से सामान्य टेलीकॉम नेटवर्क को दरकिनार किया जाता है, जिससे कॉल और मैसेज को ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता है। अपराधी इसी कमजोरी का फायदा उठाकर बेनामी संचार और अवैध गतिविधियों को अंजाम देते हैं।
ईओयू से सीबीआई को क्यों सौंपा गया मामला?
ईओयू ने अपनी प्रारंभिक जांच में इस रैकेट के व्यापक दायरे और इसमें शामिल तकनीकी जटिलताओं को समझा। बिहार में संगठित अपराध और साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के बीच, इस तरह की हाई-प्रोफाइल जांच को सीबीआई को सौंपना, मामले की गंभीरता को दर्शाता है। केंद्रीय एजेंसी अब इस घोटाले की जड़ों तक पहुंचने, इसमें शामिल सभी अपराधियों की पहचान करने और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस जांच से न केवल बिहार में बल्कि पूरे देश में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ने और ऐसे अपराधों पर लगाम लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सीबीआई की टीम अब तकनीकी साक्ष्यों को खंगालने, विभिन्न राज्यों में फैले नेटवर्क का पर्दाफाश करने और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की भी जांच कर सकती है, यदि ऐसे कोई लिंक सामने आते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह देखना दिलचस्प होगा कि देश की शीर्ष जांच एजेंसी इस जटिल मामले को कैसे सुलझाती है।







