
Bihar Vehicle Sales: सड़कों पर दौड़ते नए सपने, शोरूम्स में बजती कामयाबी की धुन। बिहार ने वाहनों की बिक्री में सिर्फ रिकॉर्ड नहीं तोड़ा, बल्कि विकास की नई इबारत लिखी है, जहां हर पहिया समृद्धि की रफ्तार से घूम रहा है।
Bihar Vehicle Sales: क्यों बढ़ रहा है बिहार में गाड़ियों का क्रेज?
Bihar Vehicle Sales: वित्तीय वर्ष 2025-26 बिहार के परिवहन इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए इस वित्तीय वर्ष में राज्य ने गाड़ियों की बिक्री में एक अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किया है। पहली बार 15 लाख से अधिक वाहनों की बिक्री हुई है, जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इनमें अकेले पौने तेरह लाख दोपहिया वाहन शामिल हैं, जो दर्शाता है कि व्यक्तिगत आवागमन के साधनों की मांग में जबरदस्त उछाल आया है। इस रिकॉर्ड तोड़ बिक्री से परिवहन विभाग को 34 अरब रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। यह आंकड़ा न केवल राज्य के आर्थिक स्वास्थ्य का सूचक है, बल्कि यह भी बताता है कि बिहार में लोगों का वाहनों के प्रति रुझान तेजी से बढ़ रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
माहवार बिक्री के आंकड़ों पर गौर करें तो, अक्टूबर 2025 में सबसे अधिक बिक्री दर्ज की गई, जब दो लाख 37 हजार से अधिक गाड़ियां बिकीं। इसके बाद नवंबर में दो लाख 27 हजार से अधिक वाहनों की खरीद हुई। वित्तीय वर्ष के विभिन्न महीनों में बिक्री का विवरण इस प्रकार है: अप्रैल 2025 में एक लाख 34 हजार, मई में एक लाख 51 हजार, जून में एक लाख 18 हजार, जुलाई में 95 हजार, अगस्त में 80 हजार, सितंबर में 57 हजार। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/national/। वर्ष के अंतिम महीनों में फिर से तेजी देखी गई, जिसमें दिसंबर में 93 हजार, जनवरी 2026 में एक लाख 19 हजार, फरवरी में एक लाख 29 हजार और मार्च में एक लाख 32 हजार से अधिक गाड़ियों की बिक्री हुई।
किस शहर में सबसे ज्यादा बिकी गाड़ियां और कौन से ईंधन हैं पसंद?
गाड़ियों के बढ़ते क्रेज का ही परिणाम है कि पटना सहित राज्य के अन्य जिलों की सड़कों पर अब मर्सिडीज, जगुआर, पोर्शे, ऑडी, रेंज रोवर, डिफेंडर, फॉर्च्यूनर और इनोवा क्रिस्टा जैसी महंगी लग्जरी गाड़ियां आम होती जा रही हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। पहले जहां महंगी गाड़ियों की खरीदारी के लिए बिहार के निवासियों को रांची, कोलकाता या वाराणसी का रुख करना पड़ता था, वहीं अब पटना में ही मर्सिडीज जैसे ब्रांड्स के शोरूम खुल गए हैं। केवल पटना में ही चार पहिया वाहनों के 59 शोरूम मौजूद हैं। राजधानी पटना में 25 लाख से एक करोड़ रुपये के बीच की लगभग सवा आठ सौ से अधिक लग्जरी कारों की बिक्री हुई है।
कुल मिलाकर, सबसे अधिक गाड़ियों की बिक्री पटना में हुई है, जिसके बाद मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, गया और मोतिहारी जैसे शहरों के लोगों ने वाहनों की खरीदारी में उत्साह दिखाया है। ईंधन के प्रकार की बात करें तो, पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियां खरीदारों की पहली पसंद बनी हुई हैं। कुल बिके वाहनों में साढ़े सात लाख से अधिक गाड़ियां पेट्रोल से संचालित होती हैं। वहीं, पांच लाख 37 हजार से अधिक वाहन पेट्रोल और इथेनॉल के संयुक्त मिश्रण पर चलते हैं। इलेक्ट्रिक गाड़ियों की संख्या सवा लाख रही, जबकि सीएनजी से चलने वाले लगभग 24 हजार वाहनों की बिक्री हुई। विस्तृत वर्गीकरण के अनुसार, 12 लाख 75 हजार दोपहिया, एक लाख 17 हजार हल्के मोटर वाहन (LMV), एक लाख 22 हजार तिपहिया और 12 हजार से अधिक भारी वाहनों की बिक्री दर्ज की गई। यह आंकड़े बिहार के बदलते आर्थिक परिदृश्य और लोगों की बढ़ती क्रय शक्ति को बखूबी दर्शाते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

