
Madhubani Rape Case: बिहार के मधुबनी से एक झकझोर देने वाली खबर आई है, जहां सात साल पुराने एक घिनौने अपराध पर किशोर न्याय परिषद (JJB) ने बड़ा फैसला सुनाया है। एक नाबालिग को 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला से बलात्कार के आरोप में दोषी ठहराया गया है। इस जघन्य अपराध पर अदालत ने जो सजा सुनाई है, वो समाज को एक कड़ा संदेश देती है।
Madhubani Rape Case: क्या था पूरा मामला?
यह घटना 10 जुलाई 2019 की रात की है। मधुबनी जिले के अंधराठाढ़ी थाना क्षेत्र में एक 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला अपने घर के बरामदे में मच्छरदानी लगाकर सो रही थी। रात करीब 11 बजे उसी गांव का एक नाबालिग, जिसकी उम्र तब 14 साल थी, जबरदस्ती महिला के घर में घुस गया। आरोप है कि उसने महिला के चीखने की आवाज दबाने के लिए उसके मुंह में कपड़े का टुकड़ा ठूंस दिया और फिर उसके साथ बलात्कार किया। जब महिला किसी तरह शोर मचाने में कामयाब हुई, तो उसकी बहू और पोता तुरंत मौके पर पहुंचे। आरोपी किशोर पकड़े जाने के डर से भागने की कोशिश कर रहा था लेकिन मच्छरदानी में फंस गया। परिजनों और गांव वालों ने उसे मौके पर ही पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इस Madhubani Rape Case में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की।
मेडिकल रिपोर्ट और गवाही ने साबित किया आरोप
अनुमंडल अभियोजन अधिकारी रिपुंजय कुमार रंजन और सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) गगन कुमार ने अदालत में इस मामले को समाज पर एक शर्मनाक कलंक बताया। उन्होंने डॉ. आकांक्षा, डॉ. रमा झा और डॉ. मिश्रा की एक विशेष मेडिकल टीम द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट अदालत के सामने पेश की। मेडिकल जांच में पीड़िता के शरीर पर चोट के निशान और बलात्कार की घटना की पुष्टि हुई थी। डॉक्टरों द्वारा दी गई वैज्ञानिक गवाही ने आरोपी के खिलाफ मामले को निर्णायक रूप से साबित किया। सुनवाई के दौरान मदरसा शिक्षा बोर्ड की ओर से किशोर की उम्र से जुड़ा एक प्रमाण पत्र भी पेश किया गया, जिससे यह साबित हुआ कि घटना के समय उसकी उम्र 14 साल 4 महीने और 23 दिन थी।
जघन्य अपराध: 18 महीने के लिए भेजा गया सुधार गृह
इस जघन्य अपराध के आरोपी किशोर को दोषी ठहराते हुए किशोर न्याय परिषद (JJB) की पीठासीन मजिस्ट्रेट अंकित आनंद की बेंच ने उसे 18 महीने के लिए सुधार गृह भेजने का आदेश दिया है। अदालत ने इस अपराध को समाज पर एक कलंक मानते हुए निर्देश दिया कि नाबालिग को पटना के एक स्पेशल होम में भेजा जाए। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता संजय कुमार मिश्र ने सजा कम करने की अपील की थी, लेकिन अपराध की गंभीरता को देखते हुए जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 323 और 376 के तहत दोषी पाया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। यह फैसला ऐसे मामलों में न्याय की प्रक्रिया और समाज की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
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