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Jamui News: जमुई में ‘विचाराधीन बंदी’ समीक्षा समिति की बैठक, जेलों से भीड़ कम करने का बड़ा फैसला!

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विचाराधीन बंदी: जमुई में जेलों की भीड़ कम करने और उन कैदियों को राहत देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है, जो जमानत के हकदार होते हुए भी सलाखों के पीछे हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने एक समिति का गठन किया है, जिसका उद्देश्य ऐसे बंदियों को चिन्हित कर उन्हें कानूनी सहायता दिलाना है ताकि वे जल्द से जल्द रिहा हो सकें।

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जमुई में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष सह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश संदीप सिंह की अध्यक्षता में न्याय सदन के प्रशाल में विचाराधीन बंदी समीक्षा समिति की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश विकास कुमार, पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल, डीडीसी सुभाष चंद्र मंडल और जेल अधीक्षक संजीव कुमार सहित कई प्रमुख अधिकारी शामिल हुए। बैठक का संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव मंजू श्री कुमारी ने किया, जिन्होंने विषय प्रवेश कराया। प्रधान जिला जज ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय और नालसा के निर्देश पर जिले में इस समिति का गठन किया गया है, जिसके अध्यक्ष वे स्वयं हैं।

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जेलों में ‘विचाराधीन बंदी’ की भीड़ कम करने का लक्ष्य

समिति का मुख्य कार्य ऐसे विचाराधीन बंदियों को चिन्हित करना है, जो जमानत के हकदार हैं, लेकिन किसी कारणवश लंबे समय से जेल में बंद हैं या जमानत मिलने के बावजूद रिहा नहीं हो पाए हैं। इन बंदियों को दिशानिर्देशों के अनुसार कानून सम्मत सहायता देना समिति का प्रमुख उद्देश्य है। इस समिति की बैठक प्रत्येक तीन माह में एक बार आयोजित की जानी है, ताकि जेलों में अनावश्यक भीड़ को कम किया जा सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। छोटे-मोटे अपराधों में बंद वे कैदी जो जमानती धाराओं में हैं और किसी वजह से छूट नहीं पाए हैं, उनके लिए प्रतिरक्षा अधिवक्ता की व्यवस्था और उनके मामलों की जल्द सुनवाई सुनिश्चित करना भी समिति के कार्यों में शामिल है।

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7 बंदियों को मिलेगी विधिक सहायता

प्रधान जिला जज ने जानकारी दी कि इस बैठक में सात ऐसे बंदियों को चिन्हित किया गया है, जो जमानती धाराओं में कारा में बंद हैं और उन्हें कानूनी मदद की आवश्यकता है। उन्होंने जिला विधिक सेवा प्राधिकार को निर्देश दिया कि इन बंदियों के मामलों की सुनवाई सुनिश्चित की जाए और संबंधित न्यायालयों में बेल पिटीशन दाखिल करने के लिए अधिवक्ता की व्यवस्था की जाए। यह पहल जेलों में बंद उन कैदियों के लिए एक उम्मीद की किरण है, जिनकी सुनवाई में देरी हो रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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