
Vibrant Village Program II: भारत-नेपाल सीमा पर बसे गांवों की किस्मत बदलने की तैयारी में बिहार सरकार! हाल ही में पटना में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यशाला में ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II’ के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे समन्वित प्रयास और डेटा-आधारित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें ताकि निर्धारित लक्ष्य समय पर पूरे हो सकें।
पटना में योजना एवं विकास विभाग, बिहार सरकार ने ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम–II (VVP-II) के कार्यान्वयन’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इसका मुख्य उद्देश्य कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और मजबूत मॉनिटरिंग तंत्र बनाना था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव, योजना एवं विकास विभाग, डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने की। उन्होंने साफ किया कि Vibrant Village Program II सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र एवं सतत विकास के लिए बेहद अहम है।
Vibrant Village Program II: क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजना को लागू करते समय सभी विभाग मिलकर काम करें, डेटा के आधार पर निगरानी हो और फील्ड पर भी कड़ी नजर रखी जाए ताकि लक्ष्य समय पर पूरे हो सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि सीमावर्ती विकास को गति देने में यह प्रोग्राम मील का पत्थर साबित होगा। गृह विभाग की विशेष सचिव श्रीमती के. एस. अनुपम ने विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर बल दिया, खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए। उन्होंने सुरक्षा और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की बात कही। डीआईजी, सशस्त्र सीमा बल (SSB) श्री मुकेश कुमार ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास गतिविधियाँ स्थानीय समुदायों का विश्वास और भागीदारी बढ़ाने में महत्वपूर्ण हैं। भारत सरकार, गृह मंत्रालय के निदेशक (VVP) श्री मनीष श्रीवास्तव ने इस बात पर प्रकाश डाला कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम–II के तहत सीमावर्ती गांवों को बुनियादी सुविधाओं, आजीविका और कनेक्टिविटी के मामले में सशक्त बनाया जा रहा है, जिसमें राज्यों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के वरिष्ठ तकनीकी निदेशक श्री दीपक कुमार ने कार्यक्रम के तकनीकी पहलुओं पर बात की, जिसमें डेटा प्रबंधन, डिजिटल मॉनिटरिंग और आईटी आधारित समाधानों की भूमिका को अहम बताया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
समन्वय और तकनीकी समाधान पर जोर
कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय के बिना कोई भी बड़ी योजना सफल नहीं हो सकती। सुरक्षा और विकास का संतुलन साधने के साथ-साथ डेटा आधारित निगरानी और आईटी समाधानों का उपयोग कर योजना के क्रियान्वयन को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
इन जिलों के अधिकारी हुए शामिल
कार्यशाला में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बिहार के कई सीमावर्ती जिलों जैसे पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया और सहरसा के जिला पदाधिकारी और संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए। इन सीमावर्ती जिलों के जिला योजना पदाधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी भी उपस्थित थे। इसके अलावा, योजना एवं विकास विभाग के प्रधान सचिव श्री मयंक वरवड़े, मूल्यांकन निदेशालय के निदेशक श्री रविश किशोर और विभाग में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम–II की सहायक नोडल पदाधिकारी श्री सुजाता कुमारी सहित अन्य हितधारकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यशाला के दौरान कई तकनीकी सत्र हुए, जहाँ क्रियान्वयन, मॉनिटरिंग और मूल्यांकन पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव और सुझाव भी साझा किए।






