
राज लाइब्रेरी: हाल ही में दो पूर्व कुलपतियों ने विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठित एमकेएस पुस्तकालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने यहाँ उपलब्ध ज्ञान-निधि को भारतीय शोध के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया और इसकी डिजिटल सुरक्षा की वकालत भी की। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला।
पादप विज्ञान विशेषज्ञ एवं महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय, चित्रकूट, सतना, मध्य प्रदेश के पूर्व कुलपति प्रो नरेश चन्द्र गौतम और डॉ हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर, एमपी की पूर्व कुलपति प्रो नीलिमा गुप्ता ने विश्वविद्यालय के एमकेएस पुस्तकालय (राज पुस्तकालय) का गहन अवलोकन किया। उन्होंने पुस्तकालय में उपलब्ध सामग्रियों में निहित ज्ञान को भारतीय शोध अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली सामग्री बताया। उन्होंने इन अमूल्य दुर्लभ पुस्तकें के संग्रह को विश्वविद्यालय को प्रदान करने के लिए राज परिवार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और कहा कि राज दरभंगा की महान शैक्षिक अभिरुचि के कारण ही इतनी समृद्ध पुस्तकालय का संग्रहण संभव हो पाया होगा।
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राज लाइब्रेरी का महत्व और ज्ञान-निधि
विश्वविद्यालय द्वारा इस अमूल्य धरोहर को संरक्षित किए जाने हेतु डिजिटलकरण के साथ भौतिक संरक्षण के प्रति भी गंभीरता की बात कही गई। इस अवलोकन के दौरान विश्वविद्यालय के पदाधिकारी प्रो एच के सिंह, डॉ उमाकांत पासवान एवं डॉ संतोष कुमार झा आदि उपस्थित थे और उन्होंने अतिथियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
संरक्षण और डिजिटलीकरण की आवश्यकता
यह स्पष्ट है कि विश्वविद्यालय की यह राज लाइब्रेरी केवल पुस्तकों का संग्रह नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा का एक जीवंत प्रतीक है। इसका उचित संरक्षण और डिजिटलीकरण भावी शोधार्थियों के लिए ज्ञान के नए द्वार खोलेगा।
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