जन सुराज पार्टी: बिहार की सियासत में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने अपनी पकड़ मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। पार्टी ने युवा, महिला, आंबेडकर, ओबीसी और अल्पसंख्यक प्रकोष्ठों के लिए प्रदेश स्तरीय समितियों की घोषणा कर दी है, जिसमें कई नए चेहरों को अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। यह कदम पार्टी की संगठन क्षमता को बढ़ाने और जमीनी स्तर पर अपनी पहुंच मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
पटना। जन सुराज पार्टी ने शनिवार को अपनी पांच महत्वपूर्ण इकाइयों – युवा, महिला, आंबेडकर, ओबीसी मंच और अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ – की प्रदेश स्तरीय समिति की घोषणा कर दी है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि प्रत्येक समिति में 11-11 नेताओं को समायोजित किया गया है। यह घोषणा पार्टी के सांगठनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
मनोज भारती ने दी जानकारी, विभिन्न प्रकोष्ठों को मिली कमान
प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने बताया कि इन नई समितियों के गठन से पार्टी बिहार में अपनी राजनीतिक गतिविधियों को और धार देगी। विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करते हुए इन समितियों में अनुभवी और जुझारू कार्यकर्ताओं को जगह दी गई है।
जन सुराज पार्टी के विभिन्न प्रकोष्ठों के प्रमुख
- युवा प्रकोष्ठ: सुभाष चंद्र बोस उर्फ सुभाष पासवान को प्रदेश अध्यक्ष और सुगंध ठाकुर को महासचिव बनाया गया है।
- महिला प्रकोष्ठ: प्रतिभा सिन्हा को प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व मिला है, जबकि गीता सहनी महासचिव बनी हैं।
- आंबेडकर मंच: प्रो. शशिकांत प्रसाद पासवान को प्रदेश अध्यक्ष और डॉ. प्रशांत कुमार भास्कर को महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
- ओबीसी प्रकोष्ठ: ललन जी प्रदेश अध्यक्ष और नाग नारायण प्रसाद प्रदेश महासचिव नियुक्त किए गए हैं।
- अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ: अब्बू अफ्फान फारुकी को प्रदेश अध्यक्ष और शोएब अहमद खान को महासचिव का पदभार दिया गया है।
इन घोषणाओं के साथ ही, जन सुराज पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह बिहार की राजनीति में अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हुए सभी वर्गों को साथ लेकर चलने को प्रतिबद्ध है। इन प्रदेश स्तरीय समिति के माध्यम से पार्टी जमीनी स्तर पर अपनी पैठ बनाएगी।
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जन सुराज पार्टी की नई कमेटियां और सामाजिक समीकरण
जन सुराज पार्टी ने अपनी नई समितियों के माध्यम से बिहार की सोशल इंजीनियरिंग को साधने की कोशिश की है। पार्टी ने आंबेडकर मंच और ओबीसी प्रकोष्ठ के जरिए पिछड़ों और दलितों के बीच अपनी पैठ बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। हर कमेटी में सीमित सदस्यों को रखकर यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि पार्टी केवल पद बांटने में नहीं बल्कि काम करने वाले नेताओं को तवज्जो देने में विश्वास रखती है। प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती के मुताबिक ये कमेटियां सीधे तौर पर जनता के बीच जाकर जन सुराज की विचारधारा का प्रचार करेंगी।
युवा, महिला, अल्पसंख्यक और ओबीसी प्रकोष्ठों की कमान
पार्टी के सबसे सक्रिय विंग यानी युवा प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी सुभाष चंद्र बोस उर्फ सुभाष पासवान को प्रदेश अध्यक्ष के रूप में दी गई है। उनके साथ सुगंध ठाकुर को महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। महिलाओं को राजनीति के मुख्य मंच पर लाने के लिए प्रतिभा सिन्हा को प्रदेश महिला प्रकोष्ठ का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि गीता सहनी महासचिव के रूप में काम करेंगी। अल्पसंख्यक समुदाय को जोड़ने के लिए अब्बू अफ्फान फारुकी को अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। शोएब अहमद खान को इस कमेटी का महासचिव नियुक्त किया गया है। वहीं ओबीसी प्रकोष्ठ की कमान ललन जी को सौंपी गई है और नाग नारायण प्रसाद प्रदेश महासचिव बने हैं। आंबेडकर मंच के जरिए दलित समाज को जोड़ने के लिए प्रो. शशिकांत प्रसाद पासवान को अध्यक्ष और डॉ. प्रशांत कुमार भास्कर को महासचिव बनाया गया है। ये नियुक्तियां दर्शाती हैं कि प्रशांत किशोर की पार्टी किसी एक खास वर्ग की बजाय सर्वसमाज को साथ लेकर चलने की तैयारी में है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
11 का फॉर्मूला: संगठन को मजबूती देने की रणनीति
जन सुराज की इन सभी कमेटियों में 11-11 सदस्यों का फॉर्मूला अपनाया गया है। यह छोटा और प्रभावी ढांचा निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए बनाया गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अन्य दलों की जंबो कमेटियों के मुकाबले जन सुराज का यह छोटा स्वरूप ज्यादा परिणाम दे सकता है। आने वाले दिनों में ये कमेटियां जिला स्तर पर भी अपने विस्तार की योजना बना रही हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
जन सुराज पार्टी की नई कमेटियां और सामाजिक समीकरण
जन सुराज पार्टी ने अपनी नई समितियों के माध्यम से बिहार की सोशल इंजीनियरिंग को साधने की कोशिश की है। पार्टी ने आंबेडकर मंच और ओबीसी प्रकोष्ठ के जरिए पिछड़ों और दलितों के बीच अपनी पैठ बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। हर कमेटी में सीमित सदस्यों को रखकर यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि पार्टी केवल पद बांटने में नहीं बल्कि काम करने वाले नेताओं को तवज्जो देने में विश्वास रखती है। प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती के मुताबिक ये कमेटियां सीधे तौर पर जनता के बीच जाकर जन सुराज की विचारधारा का प्रचार करेंगी।
युवा, महिला, अल्पसंख्यक और ओबीसी प्रकोष्ठों की कमान
पार्टी के सबसे सक्रिय विंग यानी युवा प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी सुभाष चंद्र बोस उर्फ सुभाष पासवान को प्रदेश अध्यक्ष के रूप में दी गई है। उनके साथ सुगंध ठाकुर को महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। महिलाओं को राजनीति के मुख्य मंच पर लाने के लिए प्रतिभा सिन्हा को प्रदेश महिला प्रकोष्ठ का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि गीता सहनी महासचिव के रूप में काम करेंगी। अल्पसंख्यक समुदाय को जोड़ने के लिए अब्बू अफ्फान फारुकी को अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। शोएब अहमद खान को इस कमेटी का महासचिव नियुक्त किया गया है। वहीं ओबीसी प्रकोष्ठ की कमान ललन जी को सौंपी गई है और नाग नारायण प्रसाद प्रदेश महासचिव बने हैं। आंबेडकर मंच के जरिए दलित समाज को जोड़ने के लिए प्रो. शशिकांत प्रसाद पासवान को अध्यक्ष और डॉ. प्रशांत कुमार भास्कर को महासचिव बनाया गया है। ये नियुक्तियां दर्शाती हैं कि प्रशांत किशोर की पार्टी किसी एक खास वर्ग की बजाय सर्वसमाज को साथ लेकर चलने की तैयारी में है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
11 का फॉर्मूला: संगठन को मजबूती देने की रणनीति
जन सुराज की इन सभी कमेटियों में 11-11 सदस्यों का फॉर्मूला अपनाया गया है। यह छोटा और प्रभावी ढांचा निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए बनाया गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अन्य दलों की जंबो कमेटियों के मुकाबले जन सुराज का यह छोटा स्वरूप ज्यादा परिणाम दे सकता है। आने वाले दिनों में ये कमेटियां जिला स्तर पर भी अपने विस्तार की योजना बना रही हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







