
पटना जलजमाव: राजधानी पटना का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के दिमाग में पानी में डूबी सड़कें तैरने लगती हैं। हर साल बारिश के मौसम में यह शहर तालाब में तब्दील हो जाता है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। लेकिन अब इस पुरानी समस्या से निपटने के लिए एक नई उम्मीद जगी है। बुडको ने पटना जलजमाव से राहत दिलाने के लिए एक महत्वपूर्ण सीवरेज परियोजना शुरू की है, जिसके तहत शहर में सीवरेज पंपिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं।
पटना जलजमाव से निपटने की नई योजना
राजधानी पटना को हर साल होने वाले भीषण जलजमाव से मुक्ति दिलाने के लिए बुडको (BUIDCO) ने एक बड़ा कदम उठाया है। नमामि गंगे योजना के तहत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शहर के राजीव नगर और बोरिंग रोड स्थित पानी टंकी के पास दो नए सीवरेज पंपिंग स्टेशन (SPS) बनाए गए हैं। इन इलाकों में हर बरसात में पानी भरने की समस्या गंभीर रहती थी, जिसे देखते हुए यह व्यवस्था की गई है। इन पंपिंग स्टेशनों की कुल क्षमता 103 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) रखी गई है। यहां से गंदे पानी को पंप कर सीधे दीघा स्थित एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) तक भेजा जाएगा, जहां उसका उपचार किया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इस नई सीवरेज परियोजना से राजीव नगर, बोरिंग रोड, एसके पुरी, पानी टंकी, आनंदपुरी समेत आसपास के कई इलाकों को जलजमाव से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। पाटलिपुत्र और अटल पथ में बन रहे सीवरेज नेटवर्क का काम भी तेजी से जारी है, जिसे मानसून से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
हाल की बारिश ने खोली तैयारियों की पोल
हालांकि, बुडको की इन तैयारियों के बीच हाल ही में हुई बारिश ने शहर की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। सोमवार की शाम मात्र एक घंटे की बारिश में ही पटना के कई प्रमुख इलाके जलमग्न हो गए थे। इनमें पटना जंक्शन, जीपीओ गोलंबर, आर ब्लॉक, वीरचंद पटेल पथ, आयकर गोलंबर, कदमकुआं, राजेंद्रनगर, कंकड़बाग, गर्दनीबाग, अटल पथ, इंद्रपुरी, पाटलिपुत्र कॉलोनी, राजीव नगर और कुर्जी मोड़ से पीएनएम मॉल तक पानी भर गया था। इससे लोगों को आवागमन में भारी परेशानी झेलनी पड़ी और नगर निगम की तैयारियों पर सवाल उठने लगे।
नगर निगम की रणनीति और चिन्हित स्पॉट
इस स्थिति को देखते हुए पटना नगर निगम ने मानसून से पहले ही शहर के संवेदनशील स्थानों की पहचान कर ली है। पूरे पटना निगम इलाके में करीब 140 ऐसे स्थान चिह्नित किए गए हैं, जहां जलजमाव की संभावना अधिक रहती है। इनसे निपटने के लिए पहले से ही विस्तृत योजनाएं तैयार की गई हैं, ताकि बारिश के दौरान पानी ज्यादा देर तक जमा न रहे। अंचलवार देखें तो पाटलिपुत्र अंचल में 37, नूतन राजधानी में 39, कंकड़बाग में 19, बांकीपुर में 15, पटना सिटी में 12 और अजीमाबाद अंचल में 19 ऐसे संवेदनशील स्थान चिन्हित किए गए हैं। विशेषकर नूतन राजधानी और पाटलिपुत्र अंचल में सबसे ज्यादा जलभराव का खतरा रहता है। नगर निगम का कहना है कि इस बार मानसून में हालात को बेहतर रखने की पूरी कोशिश की जा रही है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/national/। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।







