
जमुई के पुल: जमुई में NHAI की ‘कुंभकर्णी नींद’ आखिर टूट ही गई! लंबे समय से जर्जर मांगोबंदर और नरियाना पुल पर आखिरकार प्रशासन ने वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी है। यह फैसला यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिससे बड़े हादसे का खतरा टल गया है, लेकिन यात्रियों की परेशानी अब बढ़ गई है।
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के अधिकारियों की अनदेखी पर बुधवार को आखिरकार विराम लग गया। अधिकारियों का दल दोपहर में मांगोबंदर पुल पर पहुंचा और तत्काल प्रभाव से बेरिकेटिंग की कार्रवाई शुरू की गई। NHAI अधिकारियों की निगरानी में मांगोबंदर पुल को पूरी तरह से बेरिकेट कर दिया गया है। इसके बाद अब इस पुल पर किसी भी प्रकार के वाहन के परिचालन पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि यह कदम यात्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, क्योंकि पुल की स्थिति लगातार खराब होती जा रही थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
नरियाना पुल पर भी लगा प्रतिबंध: जमुई के पुलों की बदहाली
NHAI की ओर से यह भी बताया गया है कि जल्द ही क्षतिग्रस्त नरियाना पुल पर भी बेरिकेटिंग कर आवागमन को पूरी तरह बंद किया जाएगा। इससे पहले नरियाना पुल पर दरारें आने के बाद भारी वाहनों का परिचालन रोक दिया गया था, लेकिन अब स्थिति और गंभीर होने के कारण छोटे वाहनों की आवाजाही भी बंद की जा रही है।
यात्रियों की बढ़ी अतिरिक्त दूरी की परेशानी
मांगोबंदर पुल पर आवागमन बंद होने से खैरा और सोनो के रास्ते झारखंड जाने वाले यात्रियों को अब लगभग 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। अब लोगों को गिद्धौर–झाझा होते हुए चकाई मार्ग से झारखंड जाना पड़ेगा, जिससे यात्रा का समय और खर्च दोनों बढ़ जाएगा।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2017 में ही मांगोबंदर पुल के 11वें पिलर में दरार देखी गई थी। इसके बाद पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई थी। समय के साथ दरारें बढ़ती गईं और हालात ऐसे हो गए कि छोटे वाहनों के लिए भी खतरा उत्पन्न हो गया। इसके बाद अब पूरी तरह से पुल को बंद करने का निर्णय लिया गया है। इसी तरह नरियाना पुल में भी पहले दरारें पाई गई थीं, जिसके बाद वहां भारी वाहनों पर रोक लगा दी गई थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
हालात में सुधार न होने के कारण अब इसे पूरी तरह बंद करने की तैयारी है। अधिकारियों का कहना है कि दोनों पुलों की स्थिति अब अत्यंत जर्जर हो चुकी है और किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता था। हाल ही में इन क्षतिग्रस्त पुलों की बिगड़ती स्थिति को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित की गई थीं, जिसने जमुई के पुलों की जर्जर हालत को उजागर किया। इन रिपोर्टों के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ और NHAI अधिकारियों के साथ बैठक कर सुरक्षा की दृष्टि से तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिया गया कि आमजन की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए पुलों पर किसी भी तरह के वाहन संचालन को तुरंत रोका जाए। इसके बाद NHAI ने मौके पर पहुंचकर बेरिकेटिंग कर दी और दोनों पुलों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
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स्थानीय लोगों की चिंता और आगे की राह
पुल बंद होने के बाद स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण था, और अब लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ेगा। लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द स्थायी समाधान और नए पुल या मरम्मत कार्य की मांग की है।
मांगोबंदर और नरियाना पुल के बंद होने से जमुई और आसपास के क्षेत्रों की आवाजाही पर बड़ा असर पड़ा है। हालांकि प्रशासन का यह निर्णय यात्री सुरक्षा के दृष्टिकोण से जरूरी माना जा रहा है, लेकिन इससे यात्रियों की परेशानियां काफी बढ़ गई हैं।







