
Railway Crane: अरे भाई साहब! रेल पटरियों पर काम करने वाली ये विशाल मशीनें कितनी कमाल की होती हैं, है न? समस्तीपुर मंडल में ऐसी ही एक ‘बाहुबली’ क्रेन ने अपना काम संभाल लिया है, जो अब दुर्घटना राहत और रखरखाव के कामों में स्पीड बढ़ाएगी और मंडल की परिचालन क्षमता को मजबूत करेगी।
समस्तीपुर रेल मंडल के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। मंडल में 140 टन क्षमता वाली अत्याधुनिक गॉटवाल्ड डीएचबीडी क्रेन (संख्या 144055) को सफलतापूर्वक कमीशन किया गया है। यह क्रेन अब रेल दुर्घटना राहत और भारी रखरखाव कार्यों के लिए पूरी तरह तैयार है, जिससे मंडल की परिचालन क्षमता और रेलवे सुरक्षा को जबरदस्त बल मिलेगा। इस प्रक्रिया को जमालपुर की विशेषज्ञ टीम और समस्तीपुर के तकनीकी कर्मचारियों के संयुक्त प्रयासों से संपन्न किया गया।
क्रेन की सफल कमीशनिंग: हर परीक्षण में पास
कमीशनिंग के दौरान क्रेन के मुख्य और सहायक इंजन सहित सभी प्रमुख सिस्टम की गहन जांच की गई, जिसमें वे पूरी तरह से कार्यशील पाए गए। प्रारंभिक निरीक्षण में सामने आई मामूली हाइड्रोलिक और न्यूमैटिक लीकेज को तत्काल ठीक कर लिया गया। इसके साथ ही, क्रेन की सही पोजिशनिंग सुनिश्चित की गई। ट्रायल ऑपरेशन के तहत मैच ट्रक को उठाना और 180 डिग्री तक घुमाने (स्ल्यूइंग) का सफल परीक्षण किया गया। क्यूमिन्स के तकनीकी सहयोग से इंजन की जांच, वायर रोप की सफाई और ग्रीसिंग जैसे आवश्यक रखरखाव कार्य भी पूरे किए गए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
Railway Crane: रेलवे ऑपरेशंस में गति और सुरक्षा
गॉटवाल्ड डीएचबीडी क्रेन भारतीय रेलवे में भारी दुर्घटना राहत कार्यों के लिए एक विश्वसनीय और अत्याधुनिक मशीन मानी जाती है। इसकी उन्नत तकनीक, उच्च उठान क्षमता और सटीक नियंत्रण प्रणाली इसे रेलवे के लिए एक अमूल्य संपत्ति बनाती है। यह क्रेन भारी कोचों और वैगनों के रखरखाव तथा पटरी से उतरने की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेगी, जिससे मंडल की समग्र रेलवे सुरक्षा और कार्यकुशलता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। भविष्य में इसके वार्षिक रखरखाव की व्यवस्था भी मंडल में ही की जा रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
एसएलआई (Safe Load Indicator) प्रणाली, जिसे एचएमएम हाईटेक द्वारा विकसित किया गया है, का भी सफल परीक्षण और आवश्यक सुधार किया गया। मंडल में हुए अंतिम लोड ट्रायल में इस Railway Crane ने 38.03 टन वजन वाले आईसी कोच को आसानी से उठाकर अपनी क्षमता का लोहा मनवाया, जिसके बाद इसे संचालन के लिए पूरी तरह उपयुक्त घोषित किया गया।
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