
बाल श्रम: मधुबनी के झंझारपुर में एक बार फिर मानवता को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है। एक ढाबे पर मासूम बच्चे का बचपन मज़दूरी की बेड़ियों में जकड़ा मिला, लेकिन इस बार धावा दल की चुस्ती ने उस नन्ही जान को नई उम्मीद दी है।
मधुबनी जिले में बाल श्रम उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत, आज प्रखंड झंझारपुर में एक बड़ी छापेमारी की गई। इस कार्रवाई के दौरान NH-57 स्थित यादव जी ढाबा, चुनौरागंज में एक बाल श्रमिक को काम करते हुए पाया गया। धावा दल ने तत्काल प्रभाव से बच्चे को विमुक्त कराया।
बाल श्रमिक की मुक्ति और कानूनी कार्रवाई
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इस धावा दल में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी चंदन कुमार गुप्ता (झंझारपुर), राजेश कुमार सिंह (बाबूबरही), अमित कुमार (अंधराठाढ़ी), बसंत कुमार (खुटौना), संतोष कुमार पोद्दार (घोघरडीहा) सहित जिला पुलिस बल के सदस्य, सर्वोपर्यास संस्था और ग्राम विकास युवा ट्रस्ट के प्रतिनिधि शामिल थे। विमुक्त बाल श्रमिक को आवश्यक विधिक प्रक्रियाओं के बाद बाल कल्याण समिति (CWC), मधुबनी के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहाँ से उसके पुनर्वास के लिए आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। दोषी ढाबा मालिक के खिलाफ बाल श्रम एवं किशोर (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
बाल श्रम के खिलाफ सख्त कानूनी प्रावधान
बाल श्रम एक गंभीर सामाजिक बुराई है। अधिकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि बच्चों का स्थान कार्यस्थलों पर नहीं, बल्कि विद्यालयों में है, और बाल मजदूरी कराने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
कानूनी प्रावधानों के अनुसार:
- 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों का किसी भी व्यवसाय या प्रतिष्ठान में नियोजन पूर्णतः प्रतिबंधित है।
- उल्लंघन की स्थिति में 20,000 रुपये से 50,000 रुपये तक का जुर्माना अथवा 6 माह तक का कारावास या दोनों का प्रावधान है।
- माननीय सर्वोच्च न्यायालय के एम.सी. मेहता बनाम तमिलनाडु वाद के निर्णयानुसार, नियोजक द्वारा 20,000 रुपये की क्षतिपूर्ति राशि बाल श्रमिक के पुनर्वास हेतु जमा कराई जाएगी।







