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Bhagalpur News: चंपा का कातिल कौन! पढ़िए@ Special Report -कर्ण को भूल गया अंग, कचरे में दब गईं पाजेब !

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“चंपा नगरी: जहां कर्ण ने स्नान किया, अब वही नाला बना”। रामायण-महाभारत की गवाह चंपावती नदी आज कूड़े से सनी | भूतनाथ मंदिर की घुंघरू की आवाज भी कचरे में दब गई। पढ़िए@Special Report -राजेश यादव, भागलपुर।

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भागलपुर। अंग प्रदेश की राजधानी चंपा नगरी। रामायण में नाम, महाभारत में गाथा, जैन-बौद्ध ग्रंथों में जयकार। चारों ओर चंपा के वृक्षों से घिरी, इसलिए नाम पड़ा “मालिनी”।

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पर आज? जिस चंपा नदी पर कर्ण रोज स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देते थे, वो आज “चंपा नाला” बनकर काला कीचड़ उगल रही है।

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इतिहास धूल खा रहा है, और हम पुल पर लिखे “चंपा नाला ब्रिज” को सच मान बैठे।

चंपा नगरी का गौरव : तब और अब
बाल्मीकि रामायण, महाभारत, हरिवंश पुराण में जिक्र गूगल मैप पर “चंपा नाला”। चानन नदी का जल मिलता था, सालों भर बहती थी गोड्डा-दुमका रेलमार्ग ने चानन रोका, नदी सूखी मौर्य से ब्रिटिश तक व्यापारिक जलमार्ग 1980 के बाद नाथनगर-चंपानगर का कूड़ा गिरने लगा
सिल्क की चमक, कतरनी चावल की खुशबू इसी पानी से पानी काला, कीचड़ भरा, बदबूदार नाविक टावर देखकर रास्ता तय करते थे टावर गायब, पुल पर “नाला ब्रिज” लिखा है।

Bhagalpur News: चंपा का कातिल कौन! पढ़िए@ Special Report -कर्ण को भूल गया अंग, कचरे में दब गईं पाजेब !बाबा भूतनाथ -700 साल पुराना रहस्य
– माना जाता है 700 साल पुराना। पहले पद्मावती शमशान घाट था।
– लोककथा: शिव-पार्वती की बारात जब निकली, राजा दक्ष ने सभी भूत-प्रेत, देवगणों को यहीं एक रात ठहराया।
– 200 मीटर दूर भैरवा तालाब से शिवलिंग और भैरवनाथ की मूर्ति निकली, यहीं स्थापित हुई।
– पहले रात में पायल-घुंघरू की आवाज आती थी। भूत-प्रेत खेलते थे। तभी नाम पड़ा “भूतनाथ”।
– आज भी मन्नत पूरी होती है। पर मंदिर के बाहर चंपा नदी का काला पानी गवाही दे रहा है कि श्रद्धा बची है, सफाई नहीं।

बाला बिसहरी की लोकगाथा
चंपा नदी से होकर सती बिहुला अपने पति का प्राण वापस लाने स्वर्ग गई थी। जिस नदी से स्वर्ग का रास्ता निकलता था, आज उसी में नाथनगर का कचरा बहता है।

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देशज Times की ललकार:
कर्ण ने जिस नदी में स्नान किया, बिहुला जिस नदी से स्वर्ग गई, मौर्य से ब्रिटिश तक जिसने व्यापार चलाया,
उसे हमने 1966 में पुल पर “नाला ब्रिज” लिखकर नाला बना दिया।

गोड्डा-दुमका रेल ने चानन रोकी, 1980 के बाद कूड़े ने चंपा को मारा, और हम तमाशा देखते रहे।

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सवाल सीधा है:
1. चंपा नदी को फिर से नदी घोषित कब होगा?
2. कूड़ा गिराना कब रुकेगा?
3. कर्णगढ़, भूतनाथ, तिल्हा कोठी, बूढ़ानाथ — ये धरोहरें पर्यटन स्थल बनेंगी या फोटो में ही रहेंगी?

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