आर्द्रभूमि संरक्षण: बिहार की समृद्ध वेटलैंड्स पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं, लेकिन अब इनके बचाव के लिए सरकार ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में, मधुबनी में वनकर्मियों को ‘सेव बिहार वेटलैंड्स’ के उपयोग का विशेष प्रशिक्षण दिया गया, ताकि इन महत्वपूर्ण जल निकायों का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
बिहार राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण द्वारा आर्द्रभूमियों के संरक्षण और उनके वैज्ञानिक प्रलेखन के लिए एक व्यापक क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह पहल सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत चलाए जा रहे राज्यव्यापी अभियान का हिस्सा है। प्राधिकरण ने अपने सर्वेक्षण में बिहार के विभिन्न जिलों में 2.25 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाले कुल 3,911 जल निकायों की पहचान की है, जिनमें कटिहार और पूर्णिया जिलों में सबसे अधिक आर्द्रभूमियां चिन्हित की गई हैं। इन आर्द्रभूमियों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण और प्रभावी संरक्षण योजना बनाना अत्यंत आवश्यक है।
आर्द्रभूमि संरक्षण में ‘सेव बिहार वेटलैंड्स’ ऐप की भूमिका
बिहार सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने इन आर्द्रभूमियों के दस्तावेजीकरण और संरक्षण को आसान बनाने के उद्देश्य से “सेव बिहार वेटलैंड्स” नामक एक विशेष मोबाइल ऐप विकसित किया है। यह मोबाइल ऐप आर्द्रभूमि से संबंधित महत्वपूर्ण डेटा जैसे जल गुणवत्ता, जैव विविधता, पारिस्थितिक महत्व, अतिक्रमण और संभावित खतरों की जानकारी एकत्र करने में सहायक होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (जलवायु परिवर्तन एवं आर्द्रभूमि) के मार्गदर्शन में, वन रक्षकों और क्षेत्र स्तरीय कर्मियों द्वारा इस ऐप का उपयोग करके आर्द्रभूमियों का संक्षिप्त दस्तावेज तैयार किया जा रहा है।
मधुबनी में वनकर्मियों का विशेष प्रशिक्षण
इसी क्रम में, आर्द्रभूमि विशेषज्ञ डॉ. सरोज कुमार वारीक ने मधुबनी वन प्रमंडल के वनकर्मियों को इस ऐप के उपयोग का गहन प्रशिक्षण दिया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को निम्नलिखित विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई:
- “सेव बिहार वेटलैंड्स” मोबाइल ऐप का प्रभावी उपयोग
- आर्द्रभूमि से संबंधित डेटा का संग्रह
- जियो-टैगिंग के माध्यम से सटीक स्थान निर्धारण
- जैव विविधता का प्रलेखन
- आर्द्रभूमियों पर मंडरा रहे खतरों की रिपोर्टिंग
यह प्रशिक्षण आर्द्रभूमि संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे बिहार की प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
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