Madhubani Cyber Crime: मधुबनी में साइबर अपराधियों का एक बड़ा गिरोह पकड़ा गया है जिसने फर्जी सरकारी पोर्टल के जरिए हजारों लोगों को ठगा। कल्पना कीजिए, सरकारी योजनाओं के नाम पर आपका बायोमेट्रिक डेटा और निजी जानकारी चुरा ली जाए, और आपको भनक तक न लगे! पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में उपकरण बरामद किए हैं।
साइबर क्राइम सिक्योरिटी यूनिट (CCSU) ने पंडौल और भैरवस्थान थाना पुलिस के साथ मिलकर यह बड़ी कार्रवाई की है। इस दौरान भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बायोमेट्रिक डिवाइस और निजी दस्तावेज बरामद हुए हैं। पुलिस ने पंडौल बाजार के चंद्रप्रकाश कुमार और भैरवस्थान थाना क्षेत्र के झौआ निवासी मो. सदरे को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि ये आरोपी गांव-गांव में फर्जी कैंप लगाकर लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर ठगी कर रहे थे।
कैसे चल रहा था फर्जीवाड़ा?
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ‘बाबरटीपीएस’ नामक वेबसाइट और कई फर्जी यूआरएल का इस्तेमाल कर लोगों को आधार अपडेट, आयुष्मान कार्ड, पीएम किसान सत्यापन और अन्य सरकारी सेवाओं का झांसा देते थे। ग्रामीणों से बायोमेट्रिक सत्यापन के नाम पर अंगूठे के निशान और निजी जानकारी ली जाती थी, जिसके बदले 50 से 500 रुपये तक वसूले जाते थे। पुलिस के अनुसार, इन अपराधियों ने ‘एवर गार्डन टेलेसिस लीडरशिप शॉप’ और ‘एवर गार्डन टेलेसिस लीडरशिप इन्फो’ जैसे नकली यूआरएल बनाकर लोगों को भ्रमित किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
जब्त उपकरणों से खुला बड़ा राज
CCSU को सूचना मिली थी कि पंडौल बाजार स्थित चंदू डिजिटल स्टूडियो में सरकारी सेवाओं के नाम पर अवैध गतिविधियां चल रही हैं। छापेमारी के दौरान पुलिस ने एक लैपटॉप, एंड्रॉयड मोबाइल, फिंगरप्रिंट स्कैनर और कई बायोमेट्रिक उपकरण जब्त किए। जांच अधिकारियों का मानना है कि जब्त लैपटॉप का इस्तेमाल फर्जी पोर्टल संचालन और डेटा संग्रह के लिए किया जा रहा था।
दूसरी कार्रवाई भैरवस्थान थाना क्षेत्र के निरभपुर चौक स्थित एसके साइबर कैफे में की गई। यहां से पुलिस ने मॉनिटर, सीपीयू, मोबाइल फोन, स्कैनर, 29 अंगूठा स्कैनर, पांच पेन ड्राइव, वोटर कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक और चेकबुक बरामद किए। पुलिस का मानना है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल बैंकिंग फ्रॉड और पहचान चोरी में किया जा रहा था। यह संगठित गिरोह जिस तरह से नकली और फर्जी पोर्टल चला रहा था, वह बेहद चौंकाने वाला है।
हजारों लोगों के डेटा लीक का खतरा
CCSU की प्रारंभिक रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि जब्त डिवाइसों में हजारों लोगों का बायोमेट्रिक और निजी डेटा मौजूद हो सकता है। फॉरेंसिक जांच के जरिए पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है। पुलिस आईएमईआई नंबर, बैंकिंग गतिविधियों और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। तकनीकी जानकारी जुटाने के लिए सीईआरटी-इन से भी सहयोग मांगा गया है।
पुलिस उपाधीक्षक सह साइबर थानाध्यक्ष अंकुर कुमार ने बताया कि यह एक संगठित गिरोह था, जो ग्रामीण और कम पढ़े-लिखे लोगों को निशाना बना रहा था। समय रहते कार्रवाई होने से बड़े स्तर पर डेटा लीक और संभावित बैंक फ्रॉड को रोका जा सका। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस Madhubani Cyber Crime मामले में जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







