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Sehyog Portal: बिहार में अब आवेदन दीजिए तुरंत होगा निदान, 30 दिन में काम नहीं करने वाले अधिकारी खुद हो जाएंगे निलंबित, CM Samrat का बड़ा कदम

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Sehyog Portal: बिहार में अब सरकारी दफ्तरों में लोगों की शिकायतें लटकाना अधिकारियों को महंगा पड़ सकता है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक बड़ा फैसला लेते हुए ‘सहयोग पोर्टल’ और ‘सहयोग हेल्पलाइन’ की शुरुआत की है। बिहार सरकार ने डिजिटल वेतन और पेंशन ऋण योजना शुरू की, कर्मचारी अब एजेंटों के बिना तत्काल ऋण प्राप्त कर सकते हैं। बिहार ने पूरी तरह से डिजिटल वेतन और पेंशन ऋण योजना शुरू की है, जिससे सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी एजेंटों या निजी ऋणदाताओं पर निर्भर हुए बिना त्वरित, कागजी कार्रवाई रहित ऋण और दीर्घकालिक ऋण प्राप्त कर सकते हैं। इसके तहत अगर 30 दिनों के भीतर जन शिकायत का निपटारा नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारी स्वतः निलंबित हो जाएंगे। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) को निर्देश दिए हैं कि वे स्वयं कम से कम पांच सहयोग शिविरों में अनिवार्य रूप से जाएं। उनकी यात्रा की सूचना पहले से नहीं होनी चाहिए और इसके लिए एक रोस्टर तैयार किया जाएगा।

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Sehyog Portal: क्या है नई व्यवस्था?

मुख्यमंत्री के अनुसार, लोगों की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी समाधान के लिए प्रत्येक माह के प्रथम तथा तृतीय मंगलवार को पंचायत स्तर पर ‘सहयोग शिविर’ आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों से संबंधित जानकारी के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1100 भी लॉन्च किया गया है। इसके अतिरिक्त, ‘Sehyog Portal’ पर भी ऑनलाइन शिकायतें दर्ज कराई जा सकती हैं। शिकायत दर्ज करने की तिथि से 30 दिनों के भीतर जन शिकायतों का निष्पादन सुनिश्चित कर आवेदक को लिखित सूचना दी जाएगी। यदि ऐसा नहीं होता है, तो संबंधित अधिकारी पर स्वतः कार्रवाई होगी।

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Sehyog Portal: बिहार में अब आवेदन दीजिए तुरंत होगा निदान, 30 दिन में काम नहीं करने वाले अधिकारी खुद हो जाएंगे निलंबित, CM Samrat का बड़ा कदम

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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को ‘सहयोग पोर्टल’ और ‘सहयोग हेल्पलाइन नंबर’ का लोकार्पण किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संकेत दिया कि सहयोग शिविर के लिए आए आवेदनों को अटकाने वाले पदाधिकारियों की अब खैर नहीं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार में सरकारी कामकाज में सुधार और जनता की शिकायतों के निवारण में तेजी लाने के लिए एक सख्त नया नियम लागू किया है। सोमवार को उन्होंने नागरिकों के लिए ‘सहयोग’ पोर्टल और एक हेल्पलाइन नंबर लॉन्च किया। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जब लोग अपनी समस्याओं के साथ सरकार के पास जाएं तो उन्हें लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े। सबसे बड़ी घोषणा ‘सहयोग शिविरों’ में प्राप्त शिकायतों पर कार्रवाई के लिए 30 दिन की समय सीमा थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई अधिकारी 30 दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं करता है, तो 31वें दिन संबंधित अधिकारी स्वतः निलंबित हो जाएगा। इस कार्रवाई का नियंत्रण सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से होगा, जो एक विशेष डैशबोर्ड के माध्यम से सभी आवेदनों की निगरानी करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जिला मजिस्ट्रेटों और पुलिस अधीक्षकों को कम से कम पांच ‘सहयोग शिविरों’ का व्यक्तिगत रूप से दौरा करना होगा। इन दौरों की पूर्व सूचना नहीं दी जाएगी ताकि अधिकारी जमीनी स्थिति का जायजा ले सकें। सरकार ने कहा कि ये शिविर तब तक जारी रहेंगे जब तक जनता की शिकायतों का पूरी तरह से समाधान नहीं हो जाता और व्यवस्था अधिक कुशल नहीं हो जाती। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जल्द ही जिलों के लिए नए प्रभारी मंत्रियों की नियुक्ति की जाएगी। उन्हें भी इन शिविरों का दौरा करना होगा और कार्यों की समीक्षा करनी होगी। उन्होंने पंचायत स्तर की व्यवस्था और जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से शासन को जनता के करीब लाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रयासों की प्रशंसा की।

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उन्होंने घोषणा की कि यदि लोगों की समस्याओं से जुड़े आवेदन पर 30 दिनों के भीतर काम नहीं होता है, तो संबंधित पदाधिकारी 31वें दिन स्वतः निलंबित हो जाएंगे। यह प्रक्रिया मुख्यमंत्री कार्यालय के स्तर से ही पूरी की जाएगी। इस नए फॉर्मेट को जेनरेट कर दिया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय में एक डैशबोर्ड भी तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से सहयोग शिविर में आए आवेदनों की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

डीएम-एसपी और प्रभारी मंत्रियों को निर्देश

उन्होंने साफ कहा कि जब तक आवेदन आना बंद नहीं होंगे, तब तक यह शिविर बंद नहीं होंगे। आम जनता का जीवन सहज हो, इसके लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। पहले यह होता था कि डीएम के स्तर पर आए आवेदनों को नीचे भेज दिया जाता था, लेकिन उनके क्रियान्वयन के लिए कोई समय-सीमा नहीं होती थी। अब सरकार समय-सीमा पर काम करेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि जल्द ही जिलों के प्रभारी मंत्रियों की नियुक्ति की जाएगी और उनका आग्रह होगा कि वे भी सहयोग शिविरों में जाकर पूरी व्यवस्था को अपने स्तर से देखें।

जनता को मिलेगी राहत, भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने अपनी यात्राओं के माध्यम से लोगों की समस्याओं का समाधान किया और पंचायत सरकार भवन का निर्माण कराया, ताकि पंचायत से जुड़ी समस्याओं का समाधान पंचायत स्तर पर ही हो सके। वर्तमान सरकार का जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि हर नागरिक का सम्मान हो और उनका जीवन आसान बने। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अंचल कार्यालयों और थानों में कौन आ-जा रहा है, इसकी भी अब गहन मॉनिटरिंग की जाएगी। आईटी विभाग द्वारा इन स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, ताकि यह देखा जा सके कि अंचल और थाने को वास्तव में कौन चला रहा है। यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

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इस मौके पर उप मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, ग्रामीण विकास तथा सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल, नगर विकास मंत्री नीतीश मिश्रा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत तथा सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव बी राजेंदर उपस्थित थे।

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