
Teacher Attendance: बिहार के जाले प्रखंड से शिक्षा व्यवस्था पर एक गंभीर सवाल उठा है. यहां के एक स्कूल में ई-शिक्षा कोष ऐप पर शिक्षकों की हाजिरी में बड़ी अनियमितताएं सामने आई हैं, जिसके बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है. प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने लापरवाही बरतने वाले प्रभारी प्रधानाध्यापक से 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है.
ई-शिक्षा कोष ऐप में Teacher Attendance पर उठे सवाल
जाले प्रखंड के ब्रह्मपुर स्थित प्लस टू ठाकुर बिंदेश्वर शर्मा उच्च विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक से प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) राम प्रमोद ठाकुर ने 24 घंटे के अंदर साक्ष्य आधारित स्पष्टीकरण तलब किया है. बीईओ द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि ई-शिक्षा कोष ऐप पर दर्ज उपस्थिति की समीक्षा के दौरान कई अनियमितताएं प्रकाश में आई हैं. जांच में पाया गया कि शिक्षक गिरीजा चरण मिश्र, नवनीत कुमार झा और सुजाता भवानी ने 4 से 8 मई तक तथा विगत एक माह के दौरान कई अन्य दिनों में अपनी Teacher Attendance दर्ज नहीं की, लेकिन इसके बावजूद वे विद्यालय से अनुपस्थित रहे, ऐसा स्पष्ट हुआ है. आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इसके अतिरिक्त, कुछ अन्य शिक्षकों और स्वयं प्रभारी प्रधानाध्यापक ने भी कई दिनों में देर से उपस्थिति दर्ज की और विद्यालय छोड़ने का समय अंकित नहीं किया. यह स्पष्ट रूप से विद्यालय संचालन में बड़ी लापरवाही की ओर इशारा करता है.
मनमानी या सरकारी राशि का दुरुपयोग?
प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने इन अनियमितताओं को विद्यालय संचालन में मनमानी, छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ और बिना उपस्थिति के वेतन निकासी कर सरकारी राशि के दुरुपयोग का संकेत माना है. यह शिक्षा विभाग के नियमों का सीधा उल्लंघन है, जो शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को दर्शाता है. ऐसी घटनाओं से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है और शिक्षा व्यवस्था पर आमजन का भरोसा कम होता है. आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने संबंधित शिक्षकों और प्रभारी प्रधानाध्यापक के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई शुरू करने के लिए उच्चाधिकारियों को प्रतिवेदन भेजने की बात भी कही है.
24 घंटे की मोहलत, आगे क्या होगा?
बीईओ राम प्रमोद ठाकुर ने सभी संबंधित पक्षों को निर्देश दिया है कि वे 24 घंटे के भीतर साक्ष्य आधारित स्पष्टीकरण उपलब्ध कराएं. यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है. इस मामले से यह स्पष्ट होता है कि सरकारी स्कूलों में डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम को प्रभावी ढंग से लागू करने और उसकी नियमित निगरानी की आवश्यकता है ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सके. देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







