
आईटीआई विरोध प्रदर्शन: बेनीपुर स्थित राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) आशापुर में इन दिनों कर्मचारियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। अपनी आठ सूत्री मांगों को लेकर उन्होंने दो दिवसीय विरोध प्रदर्शन का बिगुल फूंक दिया है, जिससे सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। काला फीता लगाकर शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हुआ यह आंदोलन अब और तेज होने की चेतावनी दे रहा है।
बेनीपुर के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान आशापुर के कर्मचारियों ने बिहार राज्य आईटीआई कर्मचारी संघ के बैनर तले सोमवार और मंगलवार को आईटीआई विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने काला फीता लगाकर अपनी नाराजगी जताई और सरकार से अपनी मांगों पर तत्काल कार्रवाई करने की अपील की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं, जिसके कारण कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
आईटीआई विरोध प्रदर्शन: क्या हैं कर्मचारियों की मुख्य मांगें?
इन विरोध प्रदर्शनों के माध्यम से कर्मचारियों ने वेतन भुगतान सुनिश्चित करने, अनुदेशकों का ग्रेड पे लेवल-7 निर्धारित करने, पदनाम बदलने और एक पारदर्शी ट्रांसफर पॉलिसी लागू करने की मांग की है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। ये मांगें कर्मचारियों के भविष्य और उनके कार्यस्थल की स्थितियों को सीधे प्रभावित करती हैं।
लंबित मांगों पर सरकार से सख्त कार्रवाई की उम्मीद
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने अपनी आठ सूत्री मांगों को विस्तृत रूप से सामने रखा है, जिनमें प्रमुख हैं:
- अविलंब वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
- अनुदेशकों का ग्रेड पे लेवल-7 निर्धारित किया जाए।
- पदनाम में परिवर्तन किया जाए और ट्रांसफर पॉलिसी लागू की जाए।
- सेवा संपुष्टि की प्रक्रिया पूरी की जाए।
- सीआईटीएस प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए।
- अनुबंध पर काम कर रहे अनुदेशकों की सेवा नियमित की जाए।
- एलडीसी का ग्रेड पे लेवल-4 किया जाए।
- लिपिकीय संवर्ग की नियमावली में संशोधन कर सहायक प्रशासनिक पदाधिकारी का पद सृजित किया जाए।
कर्मचारियों की मांगें केवल वेतन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पदोन्नति, प्रशिक्षण और सेवा शर्तों से जुड़ी व्यापक कर्मचारियों की मांगें हैं। यदि इन पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इस विरोध प्रदर्शन में मनोज कुमार महतो, कुमार गौरव, संजीव कुमार, अमित कुमार, रोहित कुमार, अब्दुल समद, राजीव कुमार, गौतम कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रुप अनुदेशक, अनुदेशक और लिपिकीय कर्मी शामिल रहे।
इस तरह के आंदोलनों से राज्य के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। सरकार को चाहिए कि वह इन आईटीआई विरोध प्रदर्शन में उठाई गई मांगों पर गंभीरता से विचार करे और जल्द समाधान निकाले। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







