
अज्ञात शव: बिहार में अमानवीयता का एक चेहरा जहां सड़क पर लावारिस लाशें पड़ी मिलती हैं, तो दूसरा चेहरा कबीर सेवा संस्थान का है जो इन शवों को गरिमा के साथ अंतिम विदाई देता है। हाल ही में संस्थान ने दो ऐसे ही मृत शरीरों का विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया।
मंगलवार को कबीर सेवा संस्थान ने दो ऐसे शवों का अंतिम संस्कार किया जिनकी पहचान तीन दिनों तक नहीं हो पाई थी। पहला शव 7 मई को कमला बलान पुल पर एक अज्ञात वाहन की टक्कर से मृत व्यक्ति का था। बड़गांव थाना ने पोस्टमार्टम के बाद यह शव संस्थान को सौंपा था। दूसरा शव सदर थाना अंतर्गत काकड़घाटी रेल लाइन के पास मिला एक युवक का था, जिसकी भी पहचान नहीं हो पाई थी। पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाने के 72 घंटे बाद यह शव भी कबीर सेवा संस्थान को अंतिम संस्कार के लिए दिया। इन दोनों शवों का विधिपूर्वक अंतिम संस्कार भिगो स्थित मुक्तिधाम में किया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
पहचान के इंतजार में रहे दो अज्ञात शव
कबीर सेवा संस्थान के इस मानवीय सेवा कार्य में अध्यक्ष भोला गुप्ता, संरक्षक नवीन सिन्हा सहित राजीव, महेंद्र और थाना के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। यह पहली बार नहीं है जब संस्थान ने ऐसे अज्ञात शवों को अंतिम विदाई दी हो। मई माह के शुरुआती ग्यारह दिनों में ही संस्थान ने आधे दर्जन से अधिक अज्ञात शवों को अंतिम विदाई दी है।
मानवीय सेवा में कबीर सेवा संस्थान की भूमिका
दिलचस्प बात यह है कि बहादुरपुर थाना क्षेत्र से मिले एक शव की पहचान तो अंतिम संस्कार के बाद मीडिया के माध्यम से हुई थी। परिजनों ने मृतक के पास से बरामद सामान के आधार पर उसकी पहचान की और मुक्तिधाम आकर शव के अवशेष प्राप्त किए। यह घटना संस्थान के निस्वार्थ मानवीय सेवा को दर्शाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







