
Exam Cancel: बार-बार रद्द हो रही प्रतियोगी और विश्वविद्यालयी परीक्षाओं ने छात्रों को गहरी चिंता में डाल दिया है। यह सिर्फ एक परीक्षा की तारीख बदलना नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों और महीनों की कड़ी मेहनत पर पानी फेरना है। हाल ही में नीट यूजी परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों का गुस्सा और निराशा चरम पर है।
पटना: देश में लगातार प्रतियोगी और विश्वविद्यालयी परीक्षाओं के बार-बार रद्द होने से छात्रों की मानसिक और आर्थिक परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। हाल ही में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा नीट यूजी 2026 परीक्षा रद्द करने की घोषणा के बाद लाखों छात्र तनाव में हैं। वहीं, बिहार में एडीओ और सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी भर्ती परीक्षा के रद्द होने के साथ ही, एमबीबीएस फाइनल ईयर की परीक्षाएं साइंस कॉलेज और आईसीएसएमएस केंद्रों पर स्थगित होने से अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी है। छात्रों का कहना है कि यह सिर्फ एक Exam Cancel होना नहीं, बल्कि महीनों की मेहनत, मानसिक संतुलन और परिवार की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करता है। दूर-दराज के जिलों से आने वाले छात्रों को यात्रा, होटल, खाना और कोचिंग का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है, कई छात्र तो उधार लेकर परीक्षा देने पहुंचते हैं।
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क्यों टूट रहा छात्रों का भरोसा?
परीक्षार्थियों का कहना है कि उनके लिए परीक्षा सिर्फ एक टेस्ट नहीं, बल्कि परिवार के सपनों और बेहतर भविष्य की उम्मीद होती है। ऐसे में बार-बार परीक्षा रद्द होने से सबसे ज्यादा चोट उनके आत्मविश्वास और भरोसे को पहुंचती है।
- “मेहनत बेकार हो गई”: नीट की तैयारी कर रही पटना की छात्रा रिया कुमारी ने कहा, “दो साल से दिन-रात पढ़ाई कर रहे थे। परीक्षा के बाद थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन रद्द होने की खबर ने फिर से तनाव में डाल दिया। इस बार 660 से अधिक स्कोर प्राप्त हो रहा था। अब दोबारा वही दबाव झेलना पड़ेगा।”
- “हजारों का नुकसान”: दिल्ली से पटना नीट देने आए एक अभ्यर्थी ने बताया कि “ट्रेन का टिकट, होटल और खाने में हजारों रुपये खर्च हो गए। परीक्षा रद्द होने का मतलब है फिर से वही खर्च और तनाव।”
परिवार पर भी बढ़ता है दबाव
गोल इंस्टीट्यूट के आनंद वत्स का कहना है कि परीक्षा रद्द होने का असर सिर्फ छात्रों पर नहीं, उनके परिवारों पर भी पड़ता है। अभिभावक बच्चों की तैयारी, कोचिंग फीस और रहने-खाने पर लाखों रुपये खर्च करते हैं। परीक्षा टलने या रद्द होने से पूरा परिवार मानसिक दबाव में आ जाता है। अभिभावक आनंद मोहन ने कहा कि बच्चे रात-रात भर पढ़ते हैं। जब परीक्षा रद्द होती है तो उनका आत्मविश्वास टूट जाता है, कई बच्चे डिप्रेशन में चले जाते हैं।
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छात्र संगठनों ने उठाए सवाल
छात्र संगठनों ने लगातार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठायी है। एआईएसएफ ने कहा है कि बार-बार परीक्षा रद्द होना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। सरकार और परीक्षा एजेंसियों को मजबूत व्यवस्था बनानी होगी ताकि छात्रों का भरोसा कायम रहे। एनएसयूआइ के छात्र नेता ने कहा कि परीक्षा केंद्रों की अव्यवस्था, पेपर लीक और तकनीकी गड़बड़ियों का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है, जिससे छात्र तनाव में आ रहे हैं। युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है।
ग्रामीण छात्रों के लिए दोहरा संघर्ष
ग्रामीण इलाकों से आने वाले छात्रों के लिए परीक्षा देना किसी संघर्ष से कम नहीं होता। कई छात्र रातभर ट्रेन और बसों में सफर कर परीक्षा केंद्र पहुंचते हैं। परीक्षा रद्द होने के बाद उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है। पूर्णिया के एक छात्र ने कहा कि घर से 14 घंटे सफर करके पटना पहुंचे थे। केंद्र पर आकर पता चला परीक्षा रद्द हो गई। ऐसा लगा जैसे सारी मेहनत और उम्मीद खत्म हो गई।
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि लगातार अनिश्चितता और Exam Cancel की घटनाएं युवाओं में चिंता, अवसाद और असुरक्षा की भावना बढ़ा रही हैं। प्रतियोगी परीक्षाएं पहले से ही मानसिक दबाव का कारण होती हैं। जब परीक्षाएं रद्द होती हैं तो छात्र तनाव और निराशा कई गुना बढ़ जाती है।
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