
कुंदन राय, नई दिल्ली देशज टाइम्स ब्यूरो। मैथिली शब्दों के जादूगर व मिथिलांनचल का गौरव महेंद्र मलंगिया के रचनाओं पर आधारित मलंगिया महोत्सव का दो दिवसीय आयोजन रंगोत्सव से भर गया। आगाज ऐसी हुई कि मेघदूत परिसर मिथिला की विविध रूपों का साक्षात गवाह बन गया। मंडी हाउस में दो दिवसीय महोत्सव के पहले दिन मिथिलांनचल व तराई क्षेत्र नेपाल के मैथिली भाषा साहित्य के नामचीन लेखक व कलाकरों का जमघट लगा रहा। पहले दिन अलग-अलग नाट्य समूह से आए रंगमंच के कलाकारों ने अपने संवाद व अभिनय प्रस्तुति से मैथिली भाषा की बौद्धिक, सांस्कृतिक व गौरवशाली परंपराओं को जीवंत कर दिखाया। वहीं, संगोष्ठी में उपस्थित विद्वानों के व्याख्यान से मैथिली भाषा की समृद्धि की झलक मिली। दिल्ली का मंडी हाउस मिनी मिथिलांचल में तब्दील हो गया था। हर तरफ मैथिली की मिठास घोलती स्वर कानों में गूंज रही थी। दर्शक हर व्याख्यान व रंगकर्मियों के अभिनय पर दिल खोल कर तालियां लूटा रहे थे।
डॉ. भीमनाथ झा ने कहा, महेंद्र मलंगिया हैं मैथिली साहित्य के जादूगर
कार्यक्रम का आगाज महेंद्र मलंगिया :व्यक्ति आ कृति पर संगोष्ठी के आयोजन के साथ हुआ। वर्तमान समय में मैथिली साहित्य के अग्रिम पंक्ति के विद्वान व प्रखर वक्ता डॉ. भीमनाथ झा ने महेंद्र मलंगिया को मैथिली साहित्य का जादूगर करार दिया। कहा कि मैथिली साहित्य के समृद्ध व गौरवशाली इतिहास को कलम से वर्तमान व भाविष्य के बीच तारतम्यता स्थापित करने की क्षमता रखने वाले व्यक्तित्व का नाम है महेंद्र मलंगिया। इन्होंने अपने शब्दों से जो लकीर खींच दी है वह अपने आप में एक इतिहास बन गया है।
दूसरे वक्ता के रूप में नेपाल के रहने वाले व रंगमंच के वरिष्ठ रंगकर्मी रमेश रंजन ने भी जमकर महेश मलंगिया पर शब्दों के पुष्पाहार बरसाया। दूसरी संगोष्ठी मिथिलाक लोकपरंपरा विषय पर आयोजित किया गया। इसमें डॉ. गंगेश गुंजन, पदमश्री उपकिरण खान, डॉ. महेंद्र नारायण, डॉ. चंद्रमणि, डॉ. कुणाल व डॉ सुनील मल्लिक ने अपने विचार रखे। तीसरे संगोष्ठी दुनू मिथिला(भारत-नेपाल) में सांस्कृतिक संबंध विषय पर आयोजित किया गया। कवि गोष्ठि में मणिकांत झा, कुमकुम झा , संजीत झा सरस, शंकर मधुपांश व रामबाबू सिंह समेत दर्जनों कवियों ने अपनी काव्य प्रस्तुति से दर्शकों से खूब वाह वाही लूटी। पुस्तक विमोचन व अरिपन प्रतियोगिता भी इस दौरान कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा।
महेंद्र के नाटकों में उतरी मिथिला की नायिका, दिखा स्त्रीत्व का मुखर रूप
मलंगिया फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस महोत्सव में कला-साहित्य व संस्कृति क्षेत्र के विशिष्ट व्यक्तियों की ओर से वक्तव्य व कविगोष्ठी के बाद महेंद्र मलंगिया लिखित नाटक मिथिलाक नारी के उदगार व ओकरा आंगनक बारहमासा का मंचन किया गया। स्त्री मनोदशा व समाज में व्याप्त मानसिक सोचों पर विमर्श करती ये दोनों नाटकें दर्शकों के दिलो दिमाग में छा गई। इसके पीछे नाटक का सशक्त पाठ्यकथा के साथ कलाकारों के जीवंत अभिनय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाया।
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