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Bihar के सुपौल में बदहाल स्कूल इन्फ्रास्ट्रक्चर, 428 बच्चे पढ़ रहे मौत के साये में! कहीं कोई अनहोनी…

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सुपौल। बिहार के सुपौल में शिक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है। राघोपुर प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय हुसैनाबाद में 428 बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। जर्जर छत, टूटी टोटियां और गंदगी भरे माहौल में उनका भविष्य संवरने की बजाय अंधकार की ओर धकेला जा रहा है।

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मिली जानकारी के अनुसार, सुपौल के राघोपुर प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय हुसैनाबाद में लगभग 428 छात्र-छात्राएं मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। कई कक्षाओं की छतें इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि कभी भी गिर सकती हैं। इसी खतरे के मद्देनजर, बच्चों को कक्षाओं के बजाय बरामदे और खुले मैदान में बिठाकर पढ़ाया जा रहा है, जो उनकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

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मौत के साये में शिक्षा: जर्जर स्कूल भवन का सच

विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को धूल और गंदगी के बीच मिड-डे मील खाना पड़ रहा है। स्कूल परिसर में चारदीवारी न होने से बच्चों की सुरक्षा पर भी प्रश्नचिह्न लगा है। प्रधानाध्यापिका कुमारी सुलेखा रानी ने खुद स्वीकार किया कि जर्जर भवन के कारण उन्हें मजबूरन बच्चों को बरामदे में पढ़ाना पड़ता है। यह स्थिति बच्चों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।

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स्कूल इन्फ्रास्ट्रक्चर की बदहाली: अन्य गंभीर समस्याएं

इस विद्यालय में स्कूल इन्फ्रास्ट्रक्चर की बदहाली केवल जर्जर छतों तक ही सीमित नहीं है। यहां मात्र एक शौचालय है, जिससे सैकड़ों छात्र-छात्राओं को असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। पेयजल व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा चुकी है, पानी की टोटियां टूटी पड़ी हैं और पीने योग्य पानी उपलब्ध नहीं है।

अधिकारियों की चुप्पी और अभिभावकों की मांग

प्रधानाध्यापिका कुमारी सुलेखा रानी ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने बीते 27 जनवरी को जिला शिक्षा पदाधिकारी, सुपौल को लिखित आवेदन देकर सूचित किया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। स्थानीय अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से तत्काल विद्यालय भवन की मरम्मत और सभी बुनियादी सुविधाओं को बहाल करने की मांग की है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इस गंभीर मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सुनील कुमार देव ने कहा कि यदि स्थिति वाकई इतनी खराब है तो वे स्वयं विद्यालय का दौरा कर जांच करेंगे और उचित कदम उठाएंगे। सरकार को इस ओर तत्काल ध्यान देकर बिहार की शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में कार्य करना चाहिए। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस बदहाल स्कूल इन्फ्रास्ट्रक्चर को सुधारने और इन बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए कब तक कोई ठोस कदम उठाता है।

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