
बुलडोजर पॉलिटिक्स: दरभंगा में भाकपा(माले) का 12वां राज्य सम्मेलन शुरू हो चुका है। इस सम्मेलन में इंडिया गठबंधन के कई दिग्गज नेता एक साथ मंच पर आए और भाजपा की ‘बुलडोजर राज’ के खिलाफ आवाज बुलंद की। माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने देश की जनता से ‘दूसरी आजादी की जंग’ लड़ने का आह्वान किया।
‘बुलडोजर पॉलिटिक्स’ के खिलाफ संघर्ष: दीपंकर भट्टाचार्य का ‘दूसरी आजादी’ का नारा
दरभंगा के लहेरियासराय स्थित पोलो मैदान में आयोजित भाकपा(माले) के 12वें राज्य सम्मेलन (16-18 मई 2026) की शुरुआत ‘बुलडोजर राज के खिलाफ लोकतंत्र का सवाल’ पर एक संगोष्ठी से हुई। इसे संबोधित करते हुए भाकपा(माले) महासचिव कॉमरेड दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि देश की जनता को आजादी की एक नई लड़ाई लड़नी होगी और उसे फिर से हासिल करना होगा। उन्होंने वर्तमान भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज हम एक नए दौर में हैं, जहां सुशासन के बजाय खुलेआम बुलडोजर चलाने की बात हो रही है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के हालिया बयान से साफ है कि तमाम संस्थाओं पर सत्ता का कब्जा हो चुका है। भट्टाचार्य ने ईरान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के लोगों ने अमेरिका-इजरायल को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया, लेकिन हमारे देश की विदेश नीति ने भारत की छवि को धूमिल किया है। प्रधानमंत्री मोदी की ‘देशभक्ति’ के नाम पर की जा रही अपील गरीबों पर संकट थोपने की चाल है।आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।उन्होंने देश में मजदूर आंदोलन, छात्र आंदोलन, सीएए विरोधी आंदोलन और किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि इंडिया गठबंधन इन्हीं आंदोलनों के बीच से बना है। हमें आंदोलन की तमाम ताकतों के साथ जुड़कर उन्हें मजबूत करना होगा। भट्टाचार्य ने बिहार में भाजपा पर 10-10 हजार रुपये बांटकर चुनाव जीतने और बंगाल में एसआईआर (SIR) के जरिए लोगों को वोट देने से रोकने का आरोप लगाते हुए कहा कि हमें भाजपा के बुलडोजर को हर हाल में रोकना होगा। उन्होंने भगत सिंह के हवाले से कहा कि देश में इंकलाब लाने और दुनिया की साम्राज्यवादी ताकतों व उसके देशी दलालों को परास्त करने का दोहरा कार्यभार पूरा करना होगा। बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा बनाए गए न्याय, बराबरी और भाईचारे पर आधारित संविधान की हर हाल में हिफाजत करनी है।
इंडिया गठबंधन ने दिया एकजुटता का संदेश
सम्मेलन में इंडिया गठबंधन के कई प्रमुख नेताओं ने शिरकत की और एकजुटता का संदेश दिया।
- राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने नीतीश-मोदी के ‘डबल इंजन’ राज में बढ़ती गरीबी, महिलाओं पर हिंसा और केंद्र के भेदभावपूर्ण रवैये पर चर्चा की। उन्होंने चुनावों में पैसे बांटने, प्रशासन की निष्क्रियता और ईवीएम व चुनाव आयोग पर अविश्वास व्यक्त किया, जिसके खिलाफ सड़कों पर संघर्ष को जरूरी बताया।

- कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा ने कहा कि इंडिया गठबंधन चुनावी धांधली, दबाव और लोकतांत्रिक संस्थाओं के दुरुपयोग के बावजूद संघर्ष कर रहा है। उन्होंने भाकपा(माले) की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि लोकतंत्र, पत्रकारों और असहमति रखने वालों पर खतरा बढ़ा है। देश को फिर से गुलामी की ज़ंजीरों से मुक्त कराने के लिए संगठित संघर्ष जरूरी है, और ‘लोकतंत्र बचाओ’ हमारा प्रमुख नारा होना चाहिए।

- सांसद राजाराम सिंह ने बंगाल और तमिलनाडु के चुनावों से संविधान व लोकतंत्र पर खतरे के संकेत मिलने की बात कही और परिसीमन का विरोध कर लोकतंत्र बचाने का आह्वान किया।
- आईआईपी के संरक्षक आई.पी. गुप्ता ने भाजपा की बुलडोजर राजनीति, बेरोजगारी, महंगाई और गरीब बस्तियों पर कार्रवाई को लेकर सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बुलडोजर सिर्फ दलित-गरीबों पर चलता है।

- भाकपा-माले नेत्री मीना तिवारी ने कहा कि बुलडोजर राज के खिलाफ देशभर में प्रतिरोध बढ़ रहा है। उन्होंने शिक्षकों पर लाठीचार्ज, महिलाओं के अपमान और महिला विरोधी राजनीति की आलोचना की।
- शशि यादव ने मजदूर, आशा, आंगनवाड़ी और छात्रों पर बढ़ते दमन, बकाया भुगतान व अधिकारों के सवालों पर भाकपा-माले द्वारा संघर्ष को मजबूत करने का संकल्प दोहराया।
- सीपीआई राज्य सचिव रामनरेश पांडे ने एकजुटता को समय की मांग बताते हुए महागठबंधन को मिलकर चलने की अपील की। उन्होंने चुनाव आयोग पर भाजपा के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया।
- ललन चौधरी ने केंद्र सरकार पर वादाखिलाफी, बेरोजगारी, किसान संकट, मजदूर अधिकारों पर हमले और नफरत की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र और संविधान खतरे में हैं।

इस सत्र को सीपीआई के राज्य सचिव रामनरेश पांडेय, वीआईपी पार्टी के बालगोविंद बिंद, आरा के सांसद सुदामा प्रसाद आदि ने भी संबोधित किया। संचालन मिथिला जोन के प्रभारी धीरेंद्र झा ने किया और अतिथियों का स्वागत साहित्यकार सुरेंद्र सुमन ने किया। मंच पर स्वदेश भट्टाचार्य, मंजू प्रकाश, प्रभात कुमार, अली अशरफ फातमी, ललित यादव और उमेश सहनी जैसे कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। धन्यवाद ज्ञापन जिला सचिव वैद्यनाथ यादव ने किया।आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
सम्मेलन की मुख्य झलकियां और भावी रणनीति
सम्मेलन की शुरुआत बाबा नागार्जुन, डॉ. भीम राव अंबेडकर, चंद्रशेखर आजाद, महात्मा गांधी और डॉ. लोहिया जैसी महान विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित करके हुई। माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य, राज्य सचिव कुणाल, काराकाट सांसद राजाराम सिंह, मीना तिवारी, धीरेंद्र झा, अमर और शशि यादव सहित कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
लहेरियासराय स्टेशन से प्रेक्षागृह तक एक मार्च का आयोजन किया गया, जिसके बाद सम्मेलन स्थल पर शहीद वेदी पर सभी शहीदों को नमन किया गया। इस अवसर पर नगर का नामकरण फणीश्वरनाथ रेणु और बाबा नागार्जुन के नाम पर किया गया, जबकि मंच को मधु मिश्रा, दयमंती सिन्हा और शहीदा खातून को समर्पित किया गया। पार्टी के वरिष्ठ और दिवंगत नेताओं विशेश्वर यादव, मनोज यादव, इमानुएल हक और विष्णुदेव यादव के नाम पर प्रवेश द्वार बनाए गए। सम्मेलन स्थल को लाल झंडों और बुलडोजर पॉलिटिक्स के हमले के खिलाफ संघर्ष की आवाज बुलंद करने के आह्वान के पोस्टरों से सजाया गया था। पाखंड और अंधविश्वास के खिलाफ तार्किकता व वैज्ञानिक समझदारी को बढ़ावा देने वाले प्रख्यात इतिहासकारों रामशरण शर्मा, डी.एन. झा और राधाकृष्ण चौधरी को भी याद किया गया।कॉमरेड दीपांकर भट्टाचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि जब नीतीश कुमार बिहार में आए थे तो सुशासन की बात करते थे, लेकिन आज खुलेआम बुलडोजर चलाने की बात हो रही है। पिछले 10 सालों में 90 से अधिक पेपर लीक हुए हैं, जिनमें हाल ही में नीट पेपर लीक भी शामिल है। उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘वर्क फ्रॉम होम’ की अपील को गरीबों के लिए बेतुका बताते हुए कहा कि यह केवल देश के 10% लोगों पर लागू होती है। भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि भाजपा ने सत्ता का ‘परमानेंट सेटलमेंट’ कर लिया है और संस्थानों पर कब्जा जमा लिया है। उन्होंने भारत के लोगों से इस फासीवाद को हराने का आह्वान करते हुए कहा कि इंडिया गठबंधन को केवल चुनाव ही नहीं, बल्कि आंदोलन के मोर्चे पर भी एकजुट रहना होगा। उन्होंने बंगाल में SIR के नाम पर 35 लाख लोगों को वोट देने से रोकने और बिहार में अडानी को सस्ती जमीन देने की बात भी उठाई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बुलडोजर चलता रहा तो वामपंथी, समाजवादी और भाजपा विरोधी ताकतों के लिए जगह नहीं बचेगी, इसलिए मजबूत एकता की आवश्यकता है। मोदी सरकार की विदेश नीतियों से देश को नुकसान हुआ है, जिसका बोझ जनता पर पड़ा है।












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