
DMCH Darbhanga में हड़कंप! आयुक्त-डीएम एक साथ…DMCH की न्यू चैप्टर का फस्ट फेज…परखीं स्वास्थ्य सुविधाएं, क्या निशांत इफेक्ट्स की हो चुकी Darbhanga Health में शुरुआत! दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच) में अचानक हड़कंप मच गया। प्रमंडल आयुक्त हिमांशु कुमार राय और जिलाधिकारी कौशल कुमार ने औचक निरीक्षण कर अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और मरीजों को बेहतर सेवाएँ देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। इसे जानकार हेल्थ मिनिस्टर निशांत कुमार से जोड़ कर देखना शुरू किया है।
आज को आयुक्त हिमांशु कुमार राय और जिलाधिकारी कौशल कुमार ने दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच) का औचक दौरा किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं, चिकित्सीय व्यवस्थाओं और संसाधनों की गहन समीक्षा की। निरीक्षण के बाद अस्पताल प्रशासन, चिकित्सकों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक हुई, जहाँ मरीजों को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएँ मुहैया कराने पर जोर दिया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। आयुक्त ने डीएमसीएच की भूमि संबंधी दस्तावेज तलब किए और परिसर की सुरक्षा के लिए चारदीवारी निर्माण का निर्देश दिया। ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए भी कई हिदायतें दी गईं।

स्वास्थ्य सुविधाओं की विस्तृत समीक्षा
आयुक्त ने अस्पताल में संचालित बेडों की संख्या, इनडोर, आउटडोर और इमरजेंसी सेवाओं, साफ-सफाई, पेयजल और भोजन व्यवस्था पर फीडबैक लिया। उन्होंने कहा कि अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए। अधीक्षक ने बताया कि राशन कार्ड धारकों को सीटी स्कैन निःशुल्क किया जाता है, जबकि अन्य से 2200 रुपये लिए जाते हैं। आयुक्त ने चिकित्सकों को समय पर उपस्थित रहने और स्वास्थ्य विभाग के दिशानिर्देशों का पालन करने का निर्देश दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि मरीजों का इलाज इस तरह से किया जाए कि उन्हें रेफर करने की नौबत न आए। पिछले एक साल में रेफर किए गए मरीजों की संख्या पर रिपोर्ट भी मांगी गई।
नए अस्पताल और वेंटिलेटर की स्थिति
DMCH Darbhanga परिसर में 1700 बेड का एक नया अस्पताल 1742 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन है। अधीक्षक ने बताया कि प्रतिदिन लगभग 5000 मरीजों का इलाज किया जा रहा है और 900 बेड उपलब्ध हैं। बेडशीट धुलाई के लिए पटना भेजा जाता है, लेकिन अब प्रतिदिन साफ-सुथरी बेडशीट लगाने का निर्देश दिया गया है। वार्डों और अस्पताल परिसर की साफ-सफाई सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश देते हुए आयुक्त ने कहा कि हर 15 दिन में रोगी कल्याण समिति की बैठक अनिवार्य रूप से हो। जिलाधिकारी ने भी बेडशीट के नियमित बदलाव और स्वच्छता पर जोर दिया, क्योंकि शिकायतें मिल रही थीं कि बेडशीट प्रतिदिन नहीं बदली जाती और साफ-सफाई पर्याप्त नहीं रहती।
- ऑक्सीजन पाइपलाइन: सर्जिकल भवन में दो पाइपलाइन संचालित हैं।
- वेंटिलेटर: वर्तमान में आठ वेंटिलेटर चालू स्थिति में हैं।
- लिफ्ट: कुल सात लिफ्ट में से छह काम कर रहे हैं।
मरीजों को बाहर से दवा खरीदने की नौबत न आए
दवाओं की उपलब्धता की समीक्षा करते हुए बताया गया कि कुल 612 प्रकार की दवाओं में से 308 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं। इस पर आयुक्त ने सभी आवश्यक और जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि मरीज को बाहर से दवा खरीदनी पड़ी, तो संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। चिकित्सकों ने बताया कि जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध हैं। आयुक्त ने दवा वितरण व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाने पर जोर देते हुए कहा कि मरीजों को किसी भी सूरत में बाहर से दवा खरीदने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए। मेडिकल स्टोर की जांच के लिए एक कमेटी गठित करने और अधीक्षक को नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
चिकित्सकों ने एनेस्थीसिया और रेडियोलॉजी विभाग में डॉक्टरों की कमी तथा नए उपकरणों की आवश्यकता बताई। आयुक्त ने अस्पताल परिसर और वार्डों में पर्याप्त संख्या में साइनेज लगाने का निर्देश दिया ताकि मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि मरीजों को कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए और शिकायतों का त्वरित समाधान किया जाए। इमरजेंसी विभाग में सीटी स्कैन मशीन की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। ट्रॉमा सेंटर में वर्तमान में 8 बेड उपलब्ध हैं। आयुक्त ने दवाओं के सुरक्षित रखरखाव और समुचित वितरण पर विशेष ध्यान देने को कहा, ताकि अस्पताल प्रशासन मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने में पूरी तत्परता दिखाए। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें








You must be logged in to post a comment.