
Cyber Fraud: बिहार के मधुबन से भाजपा विधायक राणा रणधीर सिंह के साथ बड़ा ऑनलाइन फ्रॉड हुआ है। उनके मोबाइल फोन को हैक कर लिया गया और वॉट्सऐप से उनके जानने वालों को 28,000 रुपये मांगने के फर्जी मैसेज भेजे गए। इस घटना से पूर्वी चंपारण जिले में हड़कंप मच गया है।
यह घटना तब सामने आई जब विधायक के कई परिचितों और समर्थकों को उनके नंबर से पैसे मांगने के संदेश मिले। संदेश में तत्काल ऑनलाइन भुगतान की मांग की गई थी। विधायक राणा रणधीर सिंह ने बताया कि साइबर अपराधियों ने उनके वॉट्सऐप अकाउंट तक पहुंच बना ली और उनके समर्थकों, पार्टी कार्यकर्ताओं और निजी संपर्कों को संदेश भेजे। इन संदेशों में कहा गया था कि उन्हें तत्काल वित्तीय सहायता की आवश्यकता है और प्राप्तकर्ताओं से 28,000 रुपये ट्रांसफर करने को कहा गया। ये अनुरोध बैंक खाते के विवरण, एक मोबाइल नंबर और लाभार्थी के नाम के साथ भेजे गए थे, जिससे संदेश वैध प्रतीत होते थे। पुलिस को संदेह है कि स्कैमर्स ने विशेष रूप से उन लोगों को निशाना बनाया जो विधायक के व्यक्तिगत नंबर से आने वाले अनुरोधों पर आसानी से भरोसा कर सकते थे।
पुलिस और साइबर सेल जांच में जुटी
इस उल्लंघन की जानकारी मिलते ही विधायक सिंह ने जिले के पुलिस अधिकारियों को सूचित किया, जिसमें मोतिहारी के पुलिस अधीक्षक, पाकरिदयाल के उपाधीक्षक और मधुबन पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष शामिल थे। पुलिस ने बताया कि साइबर सेल ने इस बात की जांच शुरू कर दी है कि अकाउंट तक कैसे पहुंच बनाई गई। अधिकारी यह जांच कर रहे हैं कि डिवाइस को हैक करने के लिए सिम स्वैपिंग, क्लोनिंग या सोशल इंजीनियरिंग जैसी विधियों का उपयोग किया गया था या नहीं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
साइबर फ्रॉड से बचाव के लिए चेतावनी
सिंह ने बाद में सोशल मीडिया पर एक चेतावनी जारी की, जिसमें लोगों से आग्रह किया गया कि यदि उन्हें उनके नंबर से वित्तीय सहायता मांगने वाले संदेश मिलते हैं तो वे पैसे ट्रांसफर न करें। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी अब आम नागरिकों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों को भी निशाना बना रहे हैं और मजबूत साइबर सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर बल दिया। पुलिस ने निवासियों से भी कहा है कि भुगतान करने से पहले किसी भी पैसे के अनुरोध को सीधे भेजने वाले को फोन करके सत्यापित करें।
साइबर अपराध की नई चालें
जांचकर्ता संदेशों से जुड़े आईपी रिकॉर्ड और बैंक खाते के विवरण का विश्लेषण कर रहे हैं ताकि इसमें शामिल लोगों का पता लगाया जा सके। अधिकारियों ने कहा कि यह धोखाधड़ी एक बढ़ते पैटर्न को दर्शाती है जिसमें स्कैमर्स तेजी से विश्वास हासिल करने के लिए सार्वजनिक हस्तियों का प्रतिरूपण करते हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे ऑनलाइन स्कैम तेजी से मैसेजिंग ऐप तक पहुंच, क्लोन किए गए डिवाइस या चोरी किए गए सत्यापन कोड पर निर्भर करते हैं, जिससे अपराधी भरोसेमंद लोगों से संपर्क कर सकते हैं और झूठे बहाने से तत्काल भुगतान का अनुरोध कर सकते हैं। आजकल साइबर फ्रॉड करने वाले अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को ठगने की कोशिश कर रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/







