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Darbhanga News: अलीनगर में गहराया मंदिर भूमि विवाद, राधाकृष्ण ठाकुरबारी की चारदीवारी बनी फसाद की जड़

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मंदिर भूमि विवाद: दरभंगा के अलीनगर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां आस्था के केंद्र राधाकृष्ण ठाकुरबारी की चारदीवारी का निर्माण गांववालों के लिए गले की फांस बन गया है। सैकड़ों साल पुराने इस मंदिर की जमीन पर काम शुरू होते ही बवाल मच गया, जिसकी गूँज अब थाने से लेकर अनुमंडल कार्यालय तक पहुंच गई है।

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बिहार के अलीनगर प्रखंड के दसौत गाँव में स्थित सैकड़ों साल पुराने राधाकृष्ण ठाकुरबारी (मंदिर) के परिसर में चारदीवारी निर्माण का काम शुरू होते ही एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यह मंदिर भूमि विवाद एक ही समुदाय के दो पक्षों के बीच गहरा गया है, जिसका मुख्य कारण रास्ते को लेकर असहमति है। निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद मामला थाने तक पहुंच गया और अब यह मुकदमेबाजी में बदल गया है।

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विवाद को बढ़ता देख, बेनीपुर एसडीएम मनीष कुमार झा ने हस्तक्षेप किया है। उन्होंने मंगलवार को दोनों पक्षों को अनुमंडल कार्यालय में बुलाया है, जहाँ समस्या का समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी। दोनों पक्षों और निर्माण कार्य के संवेदक ने थाने में अलग-अलग मामले भी दर्ज कराए हैं, जिनमें एक-दूसरे पर विभिन्न आरोप लगाए गए हैं।

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मंदिर भूमि विवाद: क्या है पूरा मामला?

राधाकृष्ण ठाकुरबारी के लिए भूमि दानदार स्वर्गीय सर्वनारायण चौधरी ने जमीन दान की थी। रिविजनल सर्वे में बने खतियान में यह जमीन श्री श्री 108 श्री राधाकृष्ण ठाकुर और सेवैत उपेंद्र नारायण चौधरी के नाम दर्ज है। सेवैत के वंशज आज भी मंदिर की देखरेख और रखरखाव का जिम्मा संभाल रहे हैं। मंदिर परिसर में पिछली पंचवर्षीय योजना में मुखिया द्वारा एक उप स्वास्थ्य केंद्र का भवन भी बनवाया गया था।

इसी बीच, योजना एवं विकास विभाग से मंदिर परिसर की चारदीवारी के निर्माण के लिए 49 लाख रुपये की परियोजना स्वीकृत हुई है। अलीनगर के सीओ ने 131 डिसमिल जमीन के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) भी जारी कर दिया है। सरकारी और निजी अमीन की मदद से भूमि की नापी कर उसका सीमांकन भी कर दिया गया था। यहीं से दूसरे पक्ष के लोगों ने विवाद शुरू किया। उनका कहना था कि पहले रास्ते का समाधान किया जाए, तभी निर्माण कार्य आगे बढ़ने दिया जाएगा।

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इसके परिणामस्वरूप, तनाव उत्पन्न हुआ और बात हाथापाई तक पहुँच गई। थाने में, सेवैत पक्ष के मुरारी चौधरी ने 13 मई 2026 को कांड संख्या 60/26 और निर्माण एजेंसी के राज कुमार राय ने कांड संख्या 61/26 दूसरे पक्ष के खिलाफ दर्ज कराया। वहीं, 17 मई को भूमि दाता पक्ष के लोगों पर आपत्ति करने वाले पक्ष के दिलीप ठाकुर ने प्राथमिकी संख्या 65/26 दर्ज कराई है।

दोनों पक्षों की अपनी-अपनी दलीलें

आपत्ति जताने वालों में दिलीप ठाकुर, रंजीत ठाकुर और प्रभाष ठाकुर ने बताया कि पहले से ही पंचायत की योजना के तहत करीब चार सौ फीट में पीसीसी सड़क बनी हुई है, जो आज भी मौजूद है। बाकी का हिस्सा कच्ची सड़क है, जिसका उपयोग दर्जनों परिवार के लोग आने-जाने के लिए करते हैं। मंदिर में जाने का भी यही मुख्य रास्ता है, खासकर छठ पर्व के दौरान तो पूरा टोला इसी रास्ते से तालाब तक पर्व मनाने जाता है। विरोधी पक्ष का कहना है कि उन्हें बाउंड्रीवाल से कोई दिक्कत नहीं है, केवल रास्ता विवाद का समाधान होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर को दान में मिली 396 बीघा जमीन का मामला भी इसी विवाद में सामने आएगा।

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दाता परिवार के सदस्य और सेवैत उपेंद्र नारायण चौधरी के पौत्र मुकुंद कुमार चौधरी तथा आनंद कुमार चौधरी ने इन आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि जो लोग विवाद कर रहे हैं, उन्होंने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर घर बना लिया है। उनके घर से पश्चिम दिशा में भी एक सड़क है, जो उनके घर से मात्र पचास फीट की दूरी पर है। टोला के अन्य लोगों को इस रास्ते से कोई लेना-देना नहीं है। जो लोग विवाद कर रहे हैं, वे केवल बाउंड्रीवाल के कार्य को प्रभावित करना चाहते हैं।

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दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए हैं। साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सांसद गोपाल जी ठाकुर को भी इस मामले की जानकारी है और उन्होंने सामाजिक पहल से निराकरण करने का सुझाव दिया है। अनापत्ति प्रमाण पत्र में जो 5 खेसरा से कुल 131 डिसमिल जमीन दर्शाई गई है, उसमें से केवल खेसरा संख्या 28 (जो 36 डिसमिल का है) पर ही मुख्य विवाद हो रहा है। दूसरे हिस्से में बाउंड्री निर्माण का कार्य सोमवार को जारी था।

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एसडीएम की पहल और आगे क्या?

सीओ कुमार शिवम ने बताया कि मंगलवार को एसडीएम बेनीपुर में अपने कार्यालय में दोनों पक्षों के साथ बैठक के लिए बुलाए हैं। उम्मीद है कि इस बैठक से इस मंदिर भूमि विवाद का कोई उचित समाधान निकल पाएगा और राधाकृष्ण ठाकुरबारी का निर्माण कार्य बिना किसी बाधा के पूरा हो सकेगा।

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