
Bihar Electricity System: बिहार का बिजली विभाग उपभोक्ताओं को हाईटेक और पारदर्शी सेवा देने का दावा करता रहा है, लेकिन पिछले 24 दिनों से यह दावा खुद “शॉर्ट सर्किट” का शिकार बना हुआ है। नया सॉफ्टवेयर लागू होने के बाद से विभाग की पूरी व्यवस्था चरमरा गई है, जिससे न तो बिलों में सुधार हो रहा है, न नए कनेक्शन मिल रहे हैं और न ही अन्य जरूरी कार्य हो पा रहे हैं। विभागीय कार्यालयों में परेशान उपभोक्ताओं की भीड़ लगी है और कर्मचारी भी लाचार दिख रहे हैं।
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क्यों बदली गई थी पुरानी व्यवस्था?
विभाग के सूत्रों के अनुसार, पुराना बिलिंग और उपभोक्ता डेटाबेस सॉफ्टवेयर काफी पुराना हो चुका था। राज्य में तेजी से लगाए जा रहे प्रीपेड और स्मार्ट मीटरों के रियल टाइम डेटा को पुराने सिस्टम से जोड़ने में लगातार दिक्कतें आ रही थीं, खासकर बिजली बिल से संबंधित अपडेट्स में। इसके अलावा, बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं द्वारा एक साथ ऑनलाइन भुगतान या मोबाइल ऐप के उपयोग से सर्वर क्रैश होने की समस्या भी आम हो गई थी। साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और मैन्युअल बिलिंग गड़बड़ियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से विभाग ने नए सॉफ्टवेयर को लागू करने का फैसला लिया था।
तकनीकी खामियां और उपभोक्ताओं पर असर
तकनीकी विशेषज्ञों और विभागीय इंजीनियरों के अनुसार, इस संकट के पीछे तीन बड़ी तकनीकी और प्रशासनिक चूक सामने आई हैं:
- डेटा माइग्रेशन: विभाग के पास उपभोक्ताओं का वर्षों पुराना रिकॉर्ड था। जब इस पुराने डेटा को नए सर्वर पर माइग्रेट किया गया, तब लाखों उपभोक्ताओं के रिकॉर्ड का फॉर्मेट नए सिस्टम से मेल नहीं खा पाया। इसके कारण कई उपभोक्ताओं के अकाउंट ब्लॉक हो गए या सिस्टम में एरर दिखने लगा।
- बिना ट्रायल रन: आईटी नियमों के अनुसार, इतने बड़े स्तर पर सॉफ्टवेयर बदलने से पहले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर टेस्टिंग की जाती है। लेकिन विभाग ने बिना पर्याप्त टेस्टिंग के पूरे सिस्टम को एक साथ लाइव कर दिया। जैसे ही सर्वर पर लोड बढ़ा, पूरा नेटवर्क ठप पड़ गया।
- कोडिंग और कस्टमाइजेशन में गड़बड़ी: जिस निजी आईटी कंपनी को सॉफ्टवेयर कस्टमाइजेशन की जिम्मेदारी दी गई थी, वह स्थानीय जरूरतों को सही तरीके से समझ नहीं सकी। ग्रामीण और शहरी टैरिफ, सरकारी सब्सिडी और कृषि कनेक्शनों से जुड़े पुराने कोडिंग स्ट्रक्चर को नए सॉफ्टवेयर के साथ सिंक करने में तकनीकी टीम को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस संकट ने पूरे Bihar Electricity System को हिला कर रख दिया है।
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इस तकनीकी विफलता का सबसे ज्यादा असर बिजली दफ्तरों और सहायता केंद्रों पर देखने को मिल रहा है। उपभोक्ता घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं, क्योंकि ऑनलाइन ऐप और पोर्टल भी सही तरीके से काम नहीं कर रहे हैं। फील्ड स्टाफ और कंप्यूटर ऑपरेटरों को नए सॉफ्टवेयर की पर्याप्त ट्रेनिंग भी नहीं दी गई है। कई कर्मचारियों के पास लॉगिन एक्सेस तक उपलब्ध नहीं है। जब उपभोक्ता बिजली बिल सुधार के लिए पहुंच रहे हैं, तो स्क्रीन पर “डेटा नॉट फाउंड” या “सिस्टम एरर” दिखने के कारण कर्मचारी भी हाथ खड़े कर दे रहे हैं।
इन सेवाओं पर पूरी तरह लगा ब्रेक:
- बिजली बिल में गड़बड़ी सुधार का काम ठप
- नए घरेलू और व्यावसायिक कनेक्शन लंबित
- नाम सुधार और लोड बढ़ाने-घटाने की प्रक्रिया बंद
- ऑनलाइन भुगतान और बिल अपडेट प्रभावित
विभाग का दावा: जल्द सुधरेगा Bihar Electricity System
24 दिनों से बिलिंग प्रक्रिया प्रभावित होने के कारण बिजली विभाग को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है। समय पर बिलिंग और राजस्व संग्रह नहीं होने से विभाग का रेवेन्यू ग्राफ लगातार गिर रहा है। बकायेदारों के खिलाफ कार्रवाई भी प्रभावित हुई है। इस पूरे मामले पर विभाग के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों और मुख्य अभियंता का कहना है कि पुराने सर्वर से नए सर्वर पर डेटा मैपिंग का करीब 80 से 85 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, कुछ कोडिंग एरर्स को दूर करने के लिए आईटी टीम और सॉफ्टवेयर इंजीनियर लगातार काम कर रहे हैं। अगले तीन से चार दिनों के भीतर सभी तकनीकी खामियों को ठीक कर सिस्टम को पूरी तरह सामान्य करने का दावा किया गया है।
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