सत्र नियमितीकरण: संस्कृत विश्वविद्यालय ने छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। अब गर्मी की छुट्टियों में भी ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित की जाएंगी, ताकि लंबित परीक्षाओं को समय पर पूरा किया जा सके और शैक्षिक सत्र को पटरी पर लाया जा सके।
दरभंगा से मिली जानकारी के अनुसार, संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो लक्ष्मीनिवास पांडेय की अध्यक्षता में सोमवार को विभागाध्यक्षों और शास्त्री स्तर के सभी कॉलेजों के प्रधानाचार्यों के साथ एक ऑनलाइन बैठक हुई। इस बैठक का मुख्य एजेंडा सत्रों को नियमित करना और छात्रों के व्यावसायिक प्रशिक्षण की रूपरेखा पर विचार करना था। कुलपति प्रो. पांडेय ने सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सत्रों को नियमित करना अब पहली प्राथमिकता है, और लोकभवन, पटना का भी यही निर्देश है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
ऑनलाइन कक्षाएं और सत्र नियमितीकरण
गर्मी की छुट्टियों में भी विशेष ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जाएंगी। इसके लिए व्हाट्सऐप या अन्य डिजिटल माध्यमों से पठन-पाठन का कार्य जारी रहेगा, ताकि लंबित परीक्षाएं जल्द से जल्द ली जा सकें। कुलपति ने प्रधानाचार्यों को दो महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए: नवीनीकरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अतिथि शिक्षकों से कार्य लिया जाएगा। प्रस्तावित विशेष ऑनलाइन कक्षाओं में उनका सहयोग फिलहाल नहीं लिया जा सकेगा। उन्होंने यह भी सुझाया कि अतिथि शिक्षकों से संबंधित कार्य प्रदर्शन प्रतिवेदन गोपनीय होता है और इसे गोपनीय तरीके से ही मेल द्वारा विश्वविद्यालय को भेजा जाए। साथ ही, उस प्रतिवेदन की हार्डकॉपी भी समय पर मुख्यालय भेजनी होगी। कुलपति ने स्पष्ट किया कि सत्र नियमितीकरण विश्वविद्यालय की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
व्यावसायिक प्रशिक्षण और इंटर्नशिप के नए आयाम
पीआरओ डॉ. निशिकांत ने बताया कि प्रधानाचार्यों की सुविधा के लिए बैठक में चार वर्षीय शास्त्री पाठ्यक्रम के पांचवें सेमेस्टर के अनिवार्य पांचवें पत्र ‘इंटर्नशिप’ (प्रशिक्षण कार्य) पर विस्तार से चर्चा हुई। ओएसडी (शैक्षणिक) डॉ. रामसेवक झा ने इस पत्र के चार क्रेडिट पर सौ अंक दिए जाने की व्यवस्था को परिभाषित किया। बताया गया कि इस सेमेस्टर के छात्र उपशास्त्री स्तर के बच्चों को पढ़ाएंगे। वे कॉलेजों के विभिन्न अभिलेखों के बारे में भी जानेंगे और उनके लेखन व रख-रखाव को समझेंगे। इसी प्रशिक्षण के क्रम में वरिष्ठ शिक्षकों द्वारा पठन-पाठन की शैली को भी वे सीखेंगे, जिससे छात्रों का चार क्रेडिट का इंटर्नशिप पूरा माना जाएगा। इसकी विवरणी प्रधानाचार्यों को परीक्षा विभाग भेजनी होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
इसी पांचवें पत्र का दूसरा विकल्प भी बताया गया, जिसमें सामुदायिक कार्यों समेत छात्रों के कौशल वृद्धि पर मुख्य फोकस रहा। क्रेडिट पूरा करने के लिए इसके तहत मंदिर, संग्रहालय व पुस्तकालय प्रबंधन, फैशन डिजाइन, बिजली समेत अन्य कौशल विकास के कार्यों के बारे में बताया गया। इसके अलावा, शास्त्री द्वितीय सेमेस्टर के व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के अंतर्गत कर्मकांड, कुंडली निर्माण, कथा प्रवचन, न्यास योग, पंचांग बोध, संस्कृत संभाषण, वास्तु बोध, पंजी निर्माण समेत 11 तरह के प्रशिक्षण को भी समाहित किया गया है।
उक्त समस्त गतिविधियों को 25 जुलाई से पहले पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। कुलसचिव डॉ. दिनेश झा ने प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया कि वे अपना अवकाश संबंधी आवेदन अब अन्य व्हाट्सऐप ग्रुप में न भेजकर केवल कुलपति के ईमेल या उनके व्यक्तिगत व्हाट्सऐप पर ही भेजें। उन्होंने स्पष्ट किया कि अन्य सूचनाओं का प्रेषण व्हाट्सऐप ग्रुप पर पहले की तरह ही होता रहेगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
ऑनलाइन बैठक में सभी प्रधानाचार्यों का स्वागत डीन प्रो. पुरेन्द्र वारिक ने किया। इस मौके पर कुलपति के साथ परीक्षा नियंत्रक डॉ. निहार रंजन सिन्हा और विधि पदाधिकारी डॉ. नवीन कुमार झा भी उपस्थित थे। बैठक में शामिल लगभग सभी विभागाध्यक्षों और प्रधानाचार्यों ने सत्र नियमितीकरण की दिशा में कार्य करने का भरोसा दिलाया।







