बिहार पुलिस: राजगीर स्थित बिहार पुलिस एकेडमी में मंगलवार को 19 युवा डीएसपी अधिकारियों ने अपना प्रशिक्षण पूरा कर लिया है। 69वें दीक्षांत समारोह में पासिंग आउट परेड के बाद ये अधिकारी अब राज्य की सेवा के लिए तैयार हैं। हालांकि, इस दौरान बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने अपने संबोधन में उन्हें ऐसा कड़ा संदेश दिया, जो खूब चर्चा में है।
राजगीर स्थित बिहार पुलिस एकेडमी में मंगलवार को आयोजित 69वें दीक्षांत समारोह में एक साल का कठिन प्रशिक्षण पूरा करने के बाद 19 प्रशिक्षु डीएसपी अब बिहार पुलिस का हिस्सा बन गए हैं। इनमें 14 पुरुष और 5 महिला अधिकारी शामिल हैं। इस भव्य समारोह में बिहार के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने पासिंग आउट परेड की सलामी ली और युवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए पुलिस सेवा के महत्व पर जोर दिया। डीजीपी ने अपने संबोधन में कहा कि पुलिस सेवा केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज और संविधान की रक्षा की जिम्मेदारी है। उनका यह बयान, “अगर केवल वेतन के लिए आए हैं तो पान की दुकान खोल लें”, समारोह का सबसे चर्चित और प्रेरणादायक हिस्सा बन गया।

बिहार के ऐतिहासिक शहर राजगीर में स्थित बिहार पुलिस एकेडमी का पूरा परिसर मंगलवार की सुबह से ही एक अलग उत्साह और कड़े अनुशासन के माहौल में डूबा हुआ था। पुलिस बैंड की देशभक्ति धुनों के बीच, एक साल की कठोर ट्रेनिंग के बाद प्रशिक्षु अधिकारियों ने पूरे गर्व के साथ कदमताल की। परेड ग्राउंड पर अपने बच्चों को वर्दी में देख अभिभावकों के चेहरे गर्व से चमक रहे थे, वहीं कई परिवारों की आंखों में खुशी के आंसू भी छलक पड़े। ये युवा अधिकारी अब राज्य के विभिन्न जिलों में अपनी जिम्मेदारियां संभालने के लिए तैयार हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
बिहार पुलिस: DGP ने दिया सख्त संदेश, ‘वेतन चाहिए तो पान की दुकान खोलो’
डीजीपी विनय कुमार ने अपने संबोधन में पुलिस सेवा का असली मकसद स्पष्ट करते हुए कहा कि यह जनता का भरोसा जीतने का नाम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि पुलिस पर से लोगों का विश्वास खत्म हो जाता है, तो इसका सीधा असर कानून व्यवस्था पर पड़ेगा। डीजीपी ने युवा अधिकारियों को कानून के प्रति पूरी निष्ठा रखने और हर परिस्थिति में संवेदनशील बने रहने की महत्वपूर्ण सलाह दी।
डीजीपी ने आगे कहा कि अकादमी में मिला प्रशिक्षण सिर्फ एक शुरुआती चरण है, असली परीक्षा अब उन्हें फील्ड में देनी होगी। उन्होंने युवा अधिकारियों को आगाह किया कि जमीनी स्तर पर काम करते समय उन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में धैर्य, सही व्यवहार और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता सबसे अहम साबित होगी। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस अधिकारी खुद कानून तोड़ने वाले नहीं हो सकते, क्योंकि जनता पुलिस को व्यवस्था का सबसे मजबूत स्तंभ मानती है।
आधुनिक पुलिसिंग की चुनौतियां और संवेदनशीलता का पाठ
डीजीपी ने अपने संबोधन में आधुनिक पुलिसिंग के सामने आ रही चुनौतियों का भी विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने साइबर क्राइम, नारकोटिक्स, सड़क हादसे, अवैध खनन और ट्रैफिक प्रबंधन जैसे मामलों को नई पीढ़ी के पुलिस अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौतियां बताया। डीजीपी ने रेखांकित किया कि आज की पुलिसिंग पहले की तुलना में कहीं अधिक तकनीकी और जटिल हो चुकी है, इसलिए अधिकारियों को केवल टेक्नोलॉजी के साथ ही नहीं, बल्कि मानवीय व्यवहार और संवेदनाओं को भी समझना होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
इस महत्वपूर्ण समारोह में एडिशनल डीजी सह निदेशक माला विलियम, डीआईजी अभय कुमार, डीआईजी दीपक रंजन और नालंदा एसपी भरत सोनी समेत बिहार पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। पूरे अकादमी परिसर को बेहद आकर्षक तरीके से सजाया गया था और सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
डीजीपी विनय कुमार ने अपने भाषण में पंजाब के पूर्व डीजीपी केपीएस गिल का उदाहरण देते हुए कहा कि पुलिस सेवा त्याग, अनुशासन और समर्पण की मांग करती है। यह एक ऐसा पेशा है जिसमें व्यक्तिगत सुख-सुविधा से कहीं ज्यादा जनता की सुरक्षा और उनके भरोसे को महत्व देना पड़ता है।








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