Sahyog Shivir: बिहार के शहरी इलाकों में अब जनता की समस्याओं का तुरंत समाधान होगा। नीतीश सरकार ने पंचायतों के बाद अब शहरी निकायों में भी ‘सहयोग शिविर’ लगाने का फैसला किया है। ये शिविर महीने में दो बार लगेंगे, जिससे आम लोगों को अपनी शिकायतें दर्ज कराने और उनका निपटारा कराने में आसानी होगी।
पटना: बिहार सरकार ने शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) के तहत आने वाले क्षेत्रों में जनता की शिकायतों के समयबद्ध निवारण के लिए ‘सहयोग शिविर’ आयोजित करने का निर्णय लिया है। अधिकारियों ने 26 मई को यह जानकारी दी। यह कदम 19 मई को राज्य भर की पंचायतों में सहयोग शिविर शुरू होने के कुछ दिनों बाद उठाया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिविर फिलहाल हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को आयोजित किए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, शहरी शिविर भी महीने में दो बार पहले और तीसरे मंगलवार को लगेंगे।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम के तहत राज्य सरकार के ‘ईज ऑफ लिविंग’ एजेंडे के हिस्से के रूप में यह पहल पहली बार शुरू की गई है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने संभागीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों को जारी एक पत्र में अधिकारियों को शिविरों के आयोजन और शिकायतों के समय पर निपटारे के लिए आवश्यक व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। सरकार ने शिविरों के लिए 30 दिन पहले तक आवेदन स्वीकार करने का भी निर्णय लिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
शहरी क्षेत्रों में Sahyog Shivir का विस्तार
निर्देशानुसार, सहयोग शिविर संबंधित शहरी स्थानीय निकायों द्वारा उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले वार्डों में आयोजित किए जाएंगे। इस पहल में शहरी स्थानीय निकायों की सभी तीन श्रेणियां शामिल होंगी – नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत। जिलाधिकारियों और नगर आयुक्तों या कार्यकारी अधिकारियों को प्रशासनिक आवश्यकताओं के आधार पर तीन दिनों के भीतर शिविरों की तारीखें और स्थान तय करने को कहा गया है। अधिकारियों को सार्वजनिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए इस पहल का व्यापक प्रचार सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है।
सुविधाएं और प्रशासनिक व्यवस्था
शिविर वार्डों के भीतर स्थित सरकारी भवनों में आयोजित किए जाएंगे। यदि ऐसा कोई भवन उपलब्ध नहीं है, तो गर्मियों के मौसम को ध्यान में रखते हुए अस्थायी व्यवस्था की जाएगी। दिशानिर्देशों के अनुसार, शिविरों में पंखे, पीने का पानी और उचित बैठने की व्यवस्था जैसी सुविधाएं होनी चाहिए। नामित अधिकारियों के अलावा, शिविरों की अध्यक्षता नगर आयुक्त, कार्यकारी अधिकारी, प्रखंडों के वरिष्ठ पर्यवेक्षी अधिकारी और सहायक जन स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन अधिकारी भी कर सकते हैं।
सभी शिकायतें एक पोर्टल पर दर्ज होंगी
सरकार ने कहा कि शिविरों के दौरान प्राप्त सभी शिकायतें सहियोग पोर्टल पर अपलोड की जाएंगी और निर्धारित समय-सीमा के भीतर डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उन पर कार्रवाई की जाएगी। यह पोर्टल आवेदन प्राप्त करने, शिकायतों को आगे भेजने, निपटारे और कारण बताओ नोटिस जारी करने सहित पूरी प्रक्रिया का प्रबंधन करेगा। शहरी क्षेत्रों में सहयोग शिविर के सुचारू संचालन के लिए राज्य सूचना अधिकारी को पोर्टल में आवश्यक तकनीकी प्रावधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
जनप्रतिनिधियों को मिलेगा आमंत्रण
सरकार ने अधिकारियों को सांसदों, विधायकों, महापौरों, उप महापौरों, अध्यक्षों, उपाध्यक्षों, वार्ड पार्षदों और कार्यक्रम कार्यान्वयन समितियों के सदस्यों को शिविरों में आमंत्रित करने का भी निर्देश दिया है। अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सहयोग शिविर के लिए जारी सभी मौजूदा दिशानिर्देश और मानक संचालन प्रक्रियाएं शहरी स्थानीय निकाय क्षेत्रों में आयोजित होने वाले शिविरों पर भी लागू होंगी, जिससे प्रभावी शिकायत निवारण सुनिश्चित होगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।







