Manuscript Survey: बिहार ने देशभर में परचम लहरा दिया है! केंद्र सरकार के ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत चल रहे Manuscript Survey में बिहार को पूरे देश में पहला स्थान मिला है। यह उपलब्धि राज्य के कला एवं संस्कृति विभाग के प्रयासों का नतीजा है, जिसने हजारों दुर्लभ पांडुलिपियों को खोज निकाला है।
कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने मंगलवार को बताया कि केंद्र सरकार के ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत चल रहे Manuscript Survey में बिहार ने देशभर में शानदार प्रदर्शन किया है। देश भर में हुए 5,500 सर्वेक्षण कार्यों में से बिहार ने अकेले 1,000 कार्य पूरे किए, जिससे राज्य को सर्वेक्षण निष्पादन में पहला स्थान मिला। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को मजबूत करेगी, साथ ही बिहार की ऐतिहासिक और साहित्यिक विरासत को संरक्षित करने में मदद करेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
Manuscript Survey में बिहार का अभियान और सफलता
यह सर्वेक्षण 16 मार्च से शुरू हुआ था और 15 जून तक जारी रहेगा। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्य सभी 38 जिलों में, ब्लॉक और पंचायत स्तर तक फैला हुआ है। इस पहल को मजबूत करने के लिए, बिहार सरकार ने कैबिनेट की मंजूरी के बाद दो ऐतिहासिक संस्थानों – काशी प्रसाद जायसवाल शोध संस्थान और प्राकृत जैन शोध संस्थान (दोनों 1950 के दशक में स्थापित) को कला एवं संस्कृति विभाग के अधीन लाया है। इसके अतिरिक्त, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक राज्य-स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जबकि सभी जिलों में जिलाधिकारियों के नेतृत्व में जिला-स्तरीय समितियों का गठन किया गया है।
बिहार में मिलीं दुर्लभ ऐतिहासिक पांडुलिपियां
विभाग के अनुसार, अब तक देश भर में 8.5 मिलियन से अधिक पांडुलिपियों की पहचान की गई है, जिनमें से बिहार में 8 लाख से अधिक हैं। पांडुलिपियों की पहचान के मामले में बिहार वर्तमान में राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बाद पांचवें स्थान पर है। अधिकारियों ने बताया कि इस सर्वेक्षण प्रक्रिया के दौरान कई दुर्लभ और ऐतिहासिक पांडुलिपियां खोजी गईं। इनमें 1956 में दलाई लामा द्वारा महाबोधि मंदिर लाई गई 101 पांडुलिपियां, नवादा, कटिहार और सारण जिलों में मिलीं गुरु ग्रंथ साहिब की हस्तलिखित प्रतियां, और नवादा के राधा रमण मंदिर में संरक्षित एक दुर्लभ पांडुलिपि शामिल हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
खोजी गई कुछ प्रमुख ऐतिहासिक पांडुलिपियां इस प्रकार हैं:
- बेतिया में राजकुमार शुक्ल की डायरी, जिसमें महात्मा गांधी के चंपारण आंदोलन के विवरण दर्ज हैं।
- स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस से संबंधित एक फांसी का आदेश और बिहार शरीफ में अमीर खुसरो से संबंधित एक पांडुलिपि।
- राजगीर के मायोजी मंदिर में जापानी में लिखी बौद्ध पांडुलिपियां।
- औरंगाबाद में कुरान की 1,200 साल पुरानी अरबी प्रति।
- मुगल सम्राट जहांगीर के शासनकाल की 450 साल पुरानी पांडुलिपि ‘तुर्फतुल फुकाहा’।
- भागलपुर के चंपा नगर दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य जिनसेना द्वारा लिखित नौवीं शताब्दी का ग्रंथ ‘भगवान आदिनाथ पुराण’।
देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







