बिहार विधान परिषद चुनाव: बिहार में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं, और इस हलचल के केंद्र में हैं पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी। नौ सीटों पर होने वाले चुनाव और एक सीट पर उपचुनाव की घोषणा के साथ ही सहयोगी दलों के बीच सीटों के बंटवारे की जुगलबंदी शुरू हो गई है। इसी बीच, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने सीएम सम्राट चौधरी से मिलकर सियासी अटकलों को और हवा दे दी है।
पटना: मंगलवार को केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के संरक्षक जीतन राम मांझी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से उनके आवास पर मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्म हो गया। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस बैठक की तस्वीर साझा की, जिसके बाद मांझी ने पत्रकारों से बातचीत में विधान परिषद की एक सीट पर अपना दावा खुलकर पेश कर दिया।
उन्होंने तर्क दिया कि हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के पास वर्तमान में पांच विधायक और एक विधान पार्षद हैं, साथ ही पार्टी केंद्र सरकार में भी प्रतिनिधित्व कर रही है। ऐसे में NDA को विधान परिषद में हम को एक और सीट देनी चाहिए। जीतन राम मांझी का मानना है कि इससे न केवल उनकी पार्टी मजबूत होगी, बल्कि NDA के प्रति कार्यकर्ताओं का आकर्षण और भरोसा भी बढ़ेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वे इस मुद्दे को लेकर NDA के केंद्रीय नेतृत्व से भी चर्चा करेंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
NDA के भीतर सीटों का गणित और बिहार विधान परिषद चुनाव
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बिहार विधान परिषद चुनाव से पहले सीटों के बंटवारे को लेकर सहयोगी दलों के बीच दबाव की राजनीति अब तेज हो गई है। सभी छोटे दल अपनी हैसियत और मोलभाव की क्षमता के हिसाब से अधिक से अधिक सीटों पर दावेदारी ठोक रहे हैं। ऐसे में NDA नेतृत्व के लिए बिहार विधान परिषद चुनाव से पहले सहयोगी दलों को साधना एक चुनौती बन गई है।
राज्यसभा चुनाव में पूरी नहीं हुई थी हसरत
यह पहला अवसर नहीं है जब जीतन राम मांझी ने अपनी पार्टी के लिए राजनीतिक हिस्सेदारी की सार्वजनिक मांग की हो। इससे पूर्व राज्यसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने अपनी पार्टी के लिए एक सीट की अपेक्षा की थी, परंतु उस समय उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी थी। अब विधान परिषद चुनाव के बहाने उन्होंने एक बार फिर अपनी दावेदारी को मजबूती से सामने रखा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
बिहार में आगामी चुनावी समीकरणों और सहयोगी दलों के संतुलन को देखते हुए जीतन राम मांझी की यह मांग राजनीतिक रूप से काफी अहम मानी जा रही है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि NDA नेतृत्व इस बार मांझी की इस दावेदारी को कितना महत्व देता है और क्या उन्हें एक और सीट मिलेगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







