बिहार में खर्च कटौती: बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने बड़ा और अहम फैसला लिया है। अब सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्रा पर अगले 6 महीने तक रोक रहेगी। यह कदम वैश्विक संकट और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसाधनों के उचित उपयोग के निर्देश के मद्देनजर उठाया गया है।
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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली बिहार सरकार ने अधिकारियों की सरकारी खर्च पर होने वाली विदेश यात्राओं पर तत्काल प्रभाव से छह महीने के लिए रोक लगा दी है। इस अवधि में कोई भी अधिकारी सरकारी खर्च पर विदेश यात्रा नहीं कर सकेगा। इसके साथ ही, राज्य और जिला स्तर पर होने वाली सभी बैठकों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से ऑनलाइन मोड में आयोजित करने का निर्देश भी दिया गया है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने इस संबंध में सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिवों के साथ-साथ सभी प्रमंडलीय आयुक्त और जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर इन निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा है।
खर्च कटौती की अहम वजहें
सरकार के इस कड़े रुख के पीछे कई अहम वजहें हैं। अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद मध्य-पूर्व में उपजा वैश्विक संकट और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संसाधनों के उचित उपयोग पर दिए गए निर्देश प्रमुख हैं। पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों ने भी सरकार को फिजूलखर्ची रोकने और ऊर्जा संरक्षण पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया है। इन परिस्थितियों को देखते हुए, बिहार में खर्च कटौती आवश्यक हो गई है ताकि वित्तीय अनुशासन बनाए रखा जा सके और राज्य के संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो सके।
सरकारी विभागों में वित्तीय अनुशासन और ऊर्जा संरक्षण
मुख्य सचिव ने अपने पत्र में सभी विभागों को ऊर्जा संरक्षण, वित्तीय अनुशासन और संसाधनों के उचित उपयोग पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया है। इसके लिए विस्तृत गाइडलाइन भी जारी की गई हैं। इन गाइडलाइन के अनुसार, सभी राज्यस्तरीय बैठकें अनिवार्य रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के जरिए ही आयोजित की जाएंगी। इसी तरह, जिलास्तरीय समीक्षात्मक और समन्वय बैठकों का आयोजन भी ऑनलाइन बैठकें के माध्यम से होगा। केवल विशेष और अपरिहार्य परिस्थितियों में ही भौतिक बैठकों (फिजिकल मीटिंग) का आयोजन किया जा सकेगा।
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कारपूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर
सरकार ने खर्च और ऊर्जा बचाने के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण उपाय भी किए हैं। सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को कारपूलिंग प्रणाली को अनिवार्य रूप से अपनाने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, राज्य सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने का भी फैसला किया है। इसके लिए सरकारी कार्यालयों में ऊर्जा की बचत सुनिश्चित करने के लिए हर विभाग में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो संसाधनों के दुरुपयोग की निगरानी करेगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद अपने कारकेड में गाड़ियों की संख्या कम करके और इलेक्ट्रिक कार का इस्तेमाल करके एक मिसाल पेश की है। पटना में बिहार विधानसभा और सचिवालय के कर्मचारियों को भी सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की सलाह दी गई है, जिसके लिए सीएनजी, इलेक्ट्रिक बस और पिंक बस का परिचालन शुरू किया गया है।
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