Patna Tender Scam News: बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार हाई-प्रोफाइल ठेकेदार रिशु रंजन सिन्हा उर्फ रिशु श्री को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) और विशेष निगरानी इकाई (SVU) की जांच में लगातार सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि रिशु श्री ने सरकारी टेंडरों से करोड़ों रुपये की अवैध कमाई के लिए एक संगठित सिंडिकेट खड़ा कर रखा था, जिसकी जड़ें कई विभागों और अधिकारियों तक फैली हुई थीं।
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अफसरों की निजी जिंदगी तक रखता था जानकारी, ऐसे बनाता था नेटवर्क
ED की जांच में सामने आया है कि रिशु श्री सिर्फ सरकारी कामकाज तक सीमित नहीं था। वह कई वरिष्ठ अधिकारियों, उनकी पत्नियों की शादी की सालगिरह और बच्चों के जन्मदिन तक की जानकारी अपने पास दर्ज रखता था। जांच एजेंसियां इसे प्रभाव और संपर्क मजबूत करने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।
ईडी के मुताबिक, टेंडर हासिल करने के बाद रिशु श्री सीधे सामने नहीं आता था। वह अपने करीबी लोगों को सब-कॉन्ट्रेक्टर बनाकर काम करवाता था ताकि पूरी प्रक्रिया कागजों पर वैध दिखाई दे। इसके बाद वास्तविक लागत से कहीं अधिक राशि के बिल तैयार किए जाते थे।
Patna Tender Scam News: ऐसे फिक्स होता था 10% कमीशन, IAS अफसरों पर लटकी FIR की तलवार
जांच एजेंसियों का दावा है कि फर्जी और बढ़े हुए बिलों का इस्तेमाल अधिकारियों को दिए जाने वाले कमीशन और कथित रिश्वत की रकम को छिपाने के लिए किया जाता था। इन भुगतानों को सामान्य कारोबारी लेन-देन के रूप में दिखाकर संदेह से बचने की कोशिश की जाती थी। ईडी के अनुसार, विभिन्न सरकारी विभागों में टेंडर जारी होने के बाद कई कंपनियां रिशु श्री से संपर्क करती थीं। वह उन्हें योग्य ठेकेदार के रूप में स्थापित कर टेंडर दिलाने की पूरी व्यवस्था करता था। इसके बदले कुल परियोजना लागत का 8 से 10 प्रतिशत तक कमीशन वसूला जाता था। आरोप है कि वसूले गए कमीशन का बड़ा हिस्सा संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और प्रभावशाली कर्मचारियों के बीच बांटा जाता था। इसी वजह से पूरे नेटवर्क को लंबे समय तक संरक्षण मिलता रहा।
रिशु श्री के कथित खर्च पर देश-विदेश यात्राएं करने और अनुचित लाभ लेने के आरोपों में निलंबित IAS अधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा और योगेश कुमार सागर की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, दोनों अधिकारियों के खिलाफ नियमित प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति मांगी गई है। जानकारी के मुताबिक, वरिष्ठ अधिकारियों से मंजूरी मिलने के बाद दोनों IAS अधिकारियों के खिलाफ जल्द FIR दर्ज की जा सकती है। यदि अनुमति नहीं मिलती है तो उन्हें गंभीर विभागीय जांच का सामना करना पड़ सकता है।
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रिमांड पर रिशु श्री, खुलेंगे और बड़े राज?
सुनवाई के दौरान रिशु श्री की ओर से 14 वकीलों की टीम ने अदालत में जोरदार पैरवी की। दूसरी ओर, ईडी और विजिलेंस की संयुक्त टीम के 11 वकील अदालत में मौजूद रहे। दोनों पक्षों ने कई पुराने मामलों और कानूनी मिसालों का हवाला दिया। रिशु श्री की ओर से अदालत में यह दलील भी दी गई कि वह कोई लोकसेवक नहीं है, इसलिए उस पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम लागू नहीं किया जा सकता। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि केवल लोकसेवक न होने के आधार पर किसी व्यक्ति को भ्रष्टाचार के मामलों से बाहर नहीं रखा जा सकता। SVU सूत्रों के मुताबिक, रिशु श्री से गहन पूछताछ के लिए उसे पुलिस रिमांड पर लेने की तैयारी की जा रही है। सोमवार को एसवीयू कोर्ट में इस संबंध में आवेदन दायर किया जा सकता है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि रिमांड के दौरान कई और बड़े नाम तथा नए खुलासे सामने आ सकते हैं।
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