Bihar Krishi News: बिहार में किसानों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। 1 जून से पूरे राज्य में “खेत बचाओ अभियान” की शुरुआत होने जा रही है। इसका शुभारंभ मीठापुर स्थित कृषि भवन में कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा करेंगे। 30 जून तक चलने वाले इस राष्ट्रीय अभियान को बिहार के प्रत्येक गांव और पंचायत स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए कृषि विभाग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
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खेत बचाओ अभियान: एक जन-आंदोलन की तैयारी
अभियान की पूर्व संध्या पर कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के संकल्प और केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी की दूरदर्शी सोच के अनुरूप, बिहार में इस अभियान को मात्र एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक बड़ा सामाजिक और आर्थिक जन-आंदोलन बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस अभियान का मुख्य फोकस ‘कम खाद, सही खाद और सही सलाह’ के सिद्धांत को हर खेत तक पहुंचाना है, जिससे रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग को रोका जा सके और खेती की लागत में कमी आए।
किसानों को मिलेगी सीधी मदद: मिट्टी जांच और आधुनिक कृषि तकनीक
अभियान के दौरान राज्यभर में मिट्टी की जांच पर विशेष बल दिया जाएगा। किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर ही संतुलित उर्वरक डालने के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही हरी खाद, जैविक खेती और बायो-प्रोडक्ट्स के उपयोग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जाएगा। जलवायु परिवर्तन को देखते हुए कृषि वैज्ञानिक सीधे खेतों पर जाकर व्यावहारिक सलाह देंगे। कम पानी वाली फसलों, फसल विविधीकरण और जोखिम प्रबंधन के आधुनिक तरीकों की लाइव जानकारी दी जाएगी। पंचायत से राज्य स्तर तक व्यापक समन्वय स्थापित किया गया है। कृषि मंत्री ने सांसदों, विधायकों, मुखिया और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से गांवों में चौपाल लगाकर इस अभियान को नेतृत्व प्रदान करने की अपील की है।
अभियान के दौरान किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम-किसान सम्मान निधि से वंचित रह गए पात्र किसानों को जोड़ने, राष्ट्रीय दलहन-तिलहन मिशन और कृषि यंत्रीकरण (मशीनरी) योजनाओं का लाभ सीधे गांव के स्तर पर सुलभ कराया जाएगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
Bihar Krishi News: विशेष टीमें और समन्वय
कृषि मंत्री श्री सिन्हा ने जानकारी दी कि बिहार के सभी जिलों के लिए विशेष टीमों का गठन पूरा हो चुका है। इनमें कृषि विज्ञान केंद्रों, आईसीएआर संस्थानों के वैज्ञानिक और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। जिन जिलों या ब्लॉकों में रासायनिक खादों का उपयोग औसत से अधिक है, वहां के लिए विशेष ‘बहुविषयक टीमें’ 1 जून से ही मैदान में मोर्चा संभाल लेंगी।
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