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Madhubani Sanskritik Dharohar News: फुलहर से मिली बौद्ध देवी तारा की प्रतिमा, संग्रहालय को सुपुर्द, मिथिला के इतिहास में बड़ा खुलासा

मधुबनी के फुलहर में बागतड़ाग पोखर से मिथिलाक्षर अभिलेखयुक्त बौद्ध देवी तारा की एक खंडित प्रतिमा मिली है। इसे शोध और संरक्षण के लिए मिथिला ललित संग्रहालय को सौंपा गया, जिससे मिथिला के गौरवशाली इतिहास और प्राचीन बौद्ध संस्कृति पर नया प्रकाश पड़ा है। यह खोज स्थानीय लोगों के लिए गर्व का विषय बनी है।

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Madhubani Sanskritik Dharohar News: मधुबनी जिले के फुलहर गांव में एक अद्भुत ऐतिहासिक खोज हुई है। यहां बागतड़ाग पोखर की उड़ाही के दौरान मिथिलाक्षर अभिलेखयुक्त बौद्ध देवी तारा की एक खंडित प्रतिमा मिली है। इस महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोज को अब सौराठ स्थित मिथिला ललित संग्रहालय को सौंपा गया है, जिससे मिथिला के गौरवशाली इतिहास पर नया प्रकाश पड़ा है।आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।Madhubani Sanskritik Dharohar News: फुलहर से मिली बौद्ध देवी तारा की प्रतिमा, संग्रहालय को सुपुर्द, मिथिला के इतिहास में बड़ा खुलासा

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फुलहर में प्राचीन सभ्यता के संकेत: शोधकर्ताओं को क्या मिला?

प्रतिमा एवं पुरावशेष के प्राप्त होने की सूचना पर जिला प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के प्राचीन भारतीय इतिहास, पुरातत्त्व एवं संस्कृति विभाग के शोधार्थी मुरारी कुमार झा ने स्थल निरीक्षण के उपरांत बताया कि बागतड़ाग पोखर के पश्चिमी हिस्से से प्राप्त यह खंडित अभिलेखयुक्त बौद्ध देवी तारा की प्रतिमा अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने संकेत दिया कि इस क्षेत्र से भविष्य में और भी प्रतिमाएं तथा पुरावशेष प्राप्त होने की संभावना है, क्योंकि पोखर के दक्षिण-पश्चिमी भिंडे पर विभिन्न प्रकार के मृद्भाण्डावशेष बिखरे हुए पाए गए हैं, जो प्राचीन मानव बसावट के स्पष्ट संकेत हैं।Madhubani Sanskritik Dharohar News: फुलहर से मिली बौद्ध देवी तारा की प्रतिमा, संग्रहालय को सुपुर्द, मिथिला के इतिहास में बड़ा खुलासाशोधार्थी मुरारी कुमार झा ने अनुमान लगाया है कि उपलब्ध पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर 11वीं-12वीं शताब्दी के दौरान यहां एक विकसित ग्राम अथवा धार्मिक केंद्र अस्तित्व में रहा होगा। निरीक्षण के दौरान दो स्थानों पर जली हुई मिट्टी भी मिली, जो प्राचीन चूल्हों अथवा यज्ञ वेदियों के अवशेष हो सकते हैं। उन्होंने क्षेत्र में सावधानीपूर्वक उत्खनन एवं मिट्टी कटाई की आवश्यकता पर भी बल दिया।

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मिथिलाक्षर लिपि में उत्कीर्ण बौद्ध मंत्र: प्रतिमा का महत्व

जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी, मधुबनी सह संग्रहालयाध्यक्ष ने बताया कि संग्रहालय को प्राप्त प्रतिमा बौद्ध धर्म की प्रमुख देवी तारा से संबंधित है और इस पर मिथिलाक्षर लिपि में बौद्ध मंत्र उत्कीर्ण है। यह विशेषता इसके ऐतिहासिक, धार्मिक एवं शैक्षणिक महत्व को कई गुना बढ़ा देती है। उन्होंने आश्वस्त किया कि प्रतिमा को संग्रहालय में सुरक्षित रखते हुए इसके अभिलेख, कला-शैली, काल-निर्धारण तथा सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का विस्तृत अध्ययन कराया जाएगा। इस अध्ययन से मिथिला क्षेत्र में बौद्ध धर्म, तांत्रिक परंपराओं तथा मध्यकालीन सांस्कृतिक इतिहास से संबंधित अनेक नए तथ्य सामने आ सकते हैं।देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करेंआप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

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Madhubani Sanskritik Dharohar News: स्थानीय लोगों की जागरूकता बनी मिसाल

इंटैक, बिहार के सह-संयोजक डॉ. शिव कुमार मिश्र ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि प्रतिमा का संग्रहालय में पहुंचना मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि प्रतिमा पर मिथिलाक्षर लिपि में प्रसिद्ध बौद्ध मंत्र— “ये धर्मा हेतुप्रभवा हेतुं तेषाम्तथाग(तो) ह्यवदत। तेषाञ्च यो निरोध एवम्वादी महाश्रमणः॥” उत्कीर्ण है, जो इसे अत्यंत दुर्लभ एवं शोध की दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाता है।श्री सीताराम जी भगवान समिति के अध्यक्ष झगड़ू यादव, सचिव जितेंद्र कुमार साह सहित अन्य स्थानीय लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि फुलहर की ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित संरक्षण मिलना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। स्थानीय नागरिकों ने आशा व्यक्त की कि इस महत्वपूर्ण खोज से फुलहर एवं आसपास के क्षेत्रों में पुरातात्विक अनुसंधान को नई दिशा मिलेगी तथा मिथिला की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्राप्त होगी। स्थानीय ग्रामीणों एवं समिति सदस्यों की सराहना करते हुए शोधार्थी मुरारी कुमार झा ने कहा कि प्रतिमा को संग्रहालय को सौंपना क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के प्रति उनकी जागरूकता और प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

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