Vaishali Court News: वैशाली में एक सिविल कोर्ट ने 34 साल पुराने आपराधिक मामले में सजा सुनाई है। यह मामला जानलेवा हमला से जुड़ा था, जिसमें 85 साल के एक बुजुर्ग समेत पांच दोषियों को कारावास की सजा मिली है। यह मामला 1992 में जुरवनपुर पुलिस स्टेशन, राघोपुर थाना क्षेत्र के तहत दर्ज किया गया था। कोर्ट ने 26 मई को सभी को दोषी करार दिया था और अब अंतिम फैसला सुनाया गया है।
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क्या था 34 साल पुराना मामला?
अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, यह घटना 1992 की है जब अदालत राय और उनकी पत्नी पर कथित तौर पर गोलीबारी सहित हिंसक हमला किया गया था। इस घटना के बाद नौ आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी। दशकों तक, मामला अदालती कार्यवाही में चलता रहा। इस लंबी अवधि के दौरान, नौ में से चार आरोपियों की मृत्यु हो गई, जिसके बाद पांच व्यक्तियों को मुकदमे का सामना करना पड़ा।
कोर्ट का बड़ा फैसला और सजा का ऐलान
कोर्ट ने 26 मई को शेष पांचों आरोपियों को दोषी पाया था। शुक्रवार को सुनाए गए सजा के आदेश में, कोर्ट ने 85 वर्षीय दीपा राय को तीन साल की कैद की सजा सुनाई है। उनकी उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति को देखते हुए, कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दी है, जिससे उन्हें उच्च न्यायालय में अपील करने का अवसर मिल सके। बाकी चार दोषियों को 10-10 साल की कैद और प्रति व्यक्ति 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
फैसले के बाद, पुलिस ने चार दोषियों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। दीपा राय को कोर्ट के अंतरिम जमानत आदेश के कारण तुरंत जेल नहीं भेजा गया।
वैशाली कोर्ट न्यूज: न्याय में देरी, फिर भी मिला न्याय
कार्यवाही के दौरान अदालत कक्ष में तनावपूर्ण माहौल रहा, क्योंकि फैसला सुनाया गया। अदालत में मौजूद अधिकारियों ने मामले की लंबी प्रकृति पर गौर किया, जो तीन दशकों से अधिक समय से लंबित था। अतिरिक्त लोक अभियोजक ने कहा कि यह मामला लंबे समय से लंबित मुकदमों की धीमी गति को दर्शाता है, जबकि यह भी बताया कि यह फैसला इस सिद्धांत को पुष्ट करता है कि न्याय में देरी हो सकती है लेकिन अंततः न्याय मिलता है।
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