Ladakh Sea Buckthorn News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान द्वारा लिखे एक लेख को साझा किया है। इस लेख में लद्दाख की ‘सी बकथॉर्न’ बेरी के प्रसंस्करण से क्षेत्र में आ रहे आर्थिक बदलावों पर प्रकाश डाला गया है। यह दिखाता है कि कैसे उद्यमिता और मूल्य संवर्धन स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिला रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस लेख को साझा करते हुए कहा कि ‘सी बकथॉर्न’ की कहानी भारत के स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने के प्रयासों को दर्शाती है। उन्होंने इसे नवाचार और अवसर की एक प्रेरक गाथा बताया, जो लद्दाख में समृद्धि के नए द्वार खोल रही है।
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लद्दाख की ‘सी बकथॉर्न’: समृद्धि का नया सूत्र?
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के अनुसार, लद्दाख के दूरदराज के क्षेत्रों में खाद्य प्रसंस्करण पहल स्थानीय समुदायों को आय अर्जित करने और स्थायी उद्यम स्थापित करने में मदद कर रही है। अपने हालिया नुब्रा घाटी के तिरिथ गांव के दौरे का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि स्थानीय उद्यमी भौगोलिक और जलवायु चुनौतियों का सामना करते हुए कैसे ‘सी बकथॉर्न’ का प्रसंस्करण कर रहे हैं।
पासवान ने अपने लेख में ‘सी बकथॉर्न’ बेरी की पोषक और औषधीय गुणवत्ता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसकी कटाई का समय कम होता है और यह अत्यधिक खराब होने वाली प्रकृति की होती है, जो इसके प्रसंस्करण में चुनौतियां खड़ी करती है। स्थानीय प्रसंस्करण सुविधाओं ने किसानों और उद्यमियों को इस फल को संरक्षित करने तथा इसके मूल्य-वर्धित उत्पादों, जैसे जूस, पल्प, सूखे मेवे और जैम, को बाजार में लाने में सक्षम बनाया है।
डीचेन आंगमो की प्रेरणादायक कहानी
चिराग पासवान ने अपने लेख में उद्यमी डीचेन आंगमो की सफलता की कहानी को विशेष रूप से उजागर किया है। डीचेन आंगमो ने पहले एक दिहाड़ी मजदूर के रूप में मामूली आय अर्जित की थी, लेकिन अब वे ‘के-टॉप फूड प्रोसेसिंग’ नामक एक मल्टी-करोड़ उद्यम चला रही हैं, जो ‘सी बकथॉर्न’ उत्पादों पर केंद्रित है।
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम (पीएमएफएमई) योजना के तहत मिली सहायता से डीचेन आंगमो को वित्त तक पहुंच मिली। उन्होंने इस योजना के माध्यम से आधुनिक प्रसंस्करण उपकरण में निवेश किया, जिससे उनका व्यवसाय तेजी से बढ़ा। अब उनका उद्यम स्थानीय संग्रहकर्ताओं से बेरी खरीदता है, रोजगार के अवसर पैदा करता है और लद्दाख के बाहर के बाजारों तक अपने उत्पाद पहुंचाता है।
यह कहानी दर्शाती है कि दूरदराज के क्षेत्रों में खाद्य प्रसंस्करण कितना परिवर्तनकारी हो सकता है। यह न केवल व्यक्तिगत जीवन को बदलता है बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करता है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के अनुसार, ऐसी कहानियाँ ‘वोकल फॉर लोकल’ पहल को नई ऊर्जा देती हैं।
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पीएमएफएमई योजना का व्यापक प्रभाव
केंद्रीय मंत्री ने अपने लेख में लद्दाख में पीएमएफएमई योजना के व्यापक प्रभाव पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अब तक केंद्र शासित प्रदेश में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए 101 ऋण स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 89 पहले ही वितरित किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, स्वयं सहायता समूहों के 651 सदस्यों के लिए 1.81 करोड़ रुपये की सीड कैपिटल सहायता भी अनुमोदित की गई है।
इस क्षेत्र को और मजबूत करने के लिए, लेह में ‘सी बकथॉर्न’ प्रसंस्करण और कारगिल में खुबानी प्रसंस्करण के लिए सामान्य ऊष्मायन केंद्र (कॉमन इनक्यूबेशन सेंटर्स) भी योजना के तहत स्वीकृत किए गए हैं। इन सुविधाओं से छोटे उत्पादकों को भंडारण, परीक्षण, पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन के लिए साझा बुनियादी ढांचा मिलेगा, जिससे खाद्य प्रसंस्करण अधिक सुलभ हो जाएगा।
पासवान ने यह भी उल्लेख किया कि ‘सी बकथॉर्न’ उत्पादों के लिए “वंडर बेरी” और खुबानी उत्पादों के लिए “कारगिल गोल्ड” जैसी ब्रांडिंग पहल लद्दाख के कृषि उत्पादों की बाजार दृश्यता में सुधार कर रही हैं। ये ब्रांड पहचान स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थापित करने में मदद कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने इन पहलों के व्यापक महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानियों का जश्न मनाना नहीं है। इसका लक्ष्य देश के दूरदराज के क्षेत्रों में ऐसे ही मॉडल को दोहराना है। उन्होंने कहा कि वित्त, बुनियादी ढांचे और संस्थागत सहायता के माध्यम से स्थानीय उद्यमियों को सशक्त बनाने से रोजगार पैदा होंगे, ग्रामीण अर्थव्यवस्थाएं मजबूत होंगी और स्वदेशी उत्पादों की अप्रयुक्त क्षमता को उजागर किया जा सकेगा।






