Darbhanga Sanskrit University Exam News: बिहार के दरभंगा स्थित कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय ने छात्रों के सत्र को नियमित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और निर्णायक कदम उठाया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आचार्य द्वितीय सेमेस्टर (सत्र 2024-26) और शिक्षाशास्त्री प्रथम वर्ष (सत्र 2025-27) तथा द्वितीय वर्ष (सत्र 2024-26) की परीक्षाओं का विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है। इन बहुप्रतीक्षित परीक्षाओं का आयोजन 23 जून से 03 जुलाई तक किया जाएगा, जिससे हजारों छात्रों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है और उनके शैक्षिक भविष्य को नई दिशा मिलेगी।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
नियमित सत्र से छात्रों को मिलेगी बड़ी राहत
संस्कृत विश्वविद्यालय में पिछले कुछ समय से सत्र को नियमित करने की मांग जोर पकड़ रही थी। छात्रों को अक्सर परीक्षाओं में देरी के कारण अपने करियर की योजनाओं को आगे बढ़ाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। इस नई घोषणा से अब छात्रों को समय पर डिग्री मिलने की उम्मीद जगी है, जिससे वे उच्च शिक्षा या रोजगार के अवसरों के लिए समय पर आवेदन कर पाएंगे। यह Darbhanga Education News क्षेत्र के छात्रों के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने बताया कि सत्र को पटरी पर लाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी कड़ी में लगातार परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। यह पहल न केवल छात्रों के लिए फायदेमंद है, बल्कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और विश्वसनीयता को भी बढ़ाएगी।
परीक्षा केंद्र और विस्तृत समय सारिणी
सभी महत्वपूर्ण परीक्षाएं विश्वविद्यालय मुख्यालय स्थित शिक्षा शास्त्र विभाग में आयोजित की जाएंगी। यह विभाग ही सभी संबंधित पाठ्यक्रमों के छात्रों के लिए एकमात्र परीक्षा स्थल के रूप में कार्य करेगा। परीक्षा का आयोजन दो पालियों में किया जाएगा, ताकि बड़ी संख्या में छात्रों को समायोजित किया जा सके और पूरी प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न किया जा सके।
पहली पाली सुबह 10 बजे से दोपहर 01 बजे तक निर्धारित की गई है, जबकि दूसरी पाली दोपहर 02 बजे से शाम 05 बजे तक चलेगी। विश्वविद्यालय के पीआरओ डॉ. निशिकांत ने मीडिया को संबोधित करते हुए इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि परीक्षा कार्यक्रम को बेहद सावधानी से तैयार किया गया है, ताकि किसी भी छात्र को असुविधा न हो और सत्र को जल्द से जल्द नियमित किया जा सके।
आचार्य और शिक्षाशास्त्री परीक्षाओं का पूरा शेड्यूल
आचार्य द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षाएं 23 जून से शुरू होंगी। 23 जून को पहली पाली में सीसी05 और दूसरी पाली में सीसी06 पत्र की परीक्षा ली जाएगी। इसके बाद, 24 जून को सीसी07 और सीसी08 पत्रों की परीक्षाएं होंगी, जबकि 25 जून को पहली पाली में सीसी09 और दूसरी पाली में एईसीसी 02 पत्र की परीक्षा आयोजित की जाएगी। यह शेड्यूल छात्रों को अपनी तैयारी को अंतिम रूप देने में मदद करेगा।
वहीं, शिक्षाशास्त्री की परीक्षाएं 28 जून से 03 जुलाई तक चलेंगी। 28 जून को पहली पाली में प्रथम वर्ष के पहले पत्र और दूसरी पाली में द्वितीय वर्ष के पहले पत्र की परीक्षा होगी। 29 जून से 02 जुलाई तक प्रतिदिन पहली पाली में प्रथम वर्ष के शेष पत्रों और दूसरी पाली में द्वितीय वर्ष के शेष पत्रों की क्रमबद्ध परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। अंतिम दिन, यानी 03 जुलाई को, पहली पाली में प्रथम वर्ष के षष्ठ पत्र और दूसरी पाली में सप्तम पत्र की परीक्षा के साथ यह महत्वपूर्ण दौर समाप्त होगा।
देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
कदाचार मुक्त परीक्षा के लिए सख्त निर्देश जारी
परीक्षा नियंत्रक डॉ. निहार रंजन सिन्हा ने परीक्षा कार्यक्रम जारी करते हुए सभी संबंधित छात्रों और परीक्षा निरीक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी परिस्थिति में दोबारा परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी, इसलिए सभी छात्रों को निर्धारित समय पर परीक्षा केंद्रों पर उपस्थित होना अनिवार्य होगा। यह नियम परीक्षा प्रक्रिया में गंभीरता और अनुशासन बनाए रखने के लिए लागू किया गया है।
डॉ. सिन्हा ने सभी से कदाचार मुक्त और निष्पक्ष परीक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन का यह संकल्प छात्रों के बीच विश्वास पैदा करेगा और शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाएगा।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
संस्कृत विश्वविद्यालय का यह प्रयास न केवल छात्रों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह बिहार में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने और उसकी गरिमा को बनाए रखने में भी सहायक होगा। उम्मीद है कि इन परीक्षाओं का सफल आयोजन होगा और छात्र बिना किसी बाधा के अपनी शिक्षा पूरी कर पाएंगे, जिससे राज्य में संस्कृत विद्वानों की एक नई पीढ़ी तैयार होगी।







