Lalu Family Security News: बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी सहित परिवार के कुछ प्रमुख सदस्यों की सुरक्षा में एक बड़ा बदलाव किया है। इस फैसले से बिहार की राजनीति में गरमाहट आ गई है और इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में विभिन्न चर्चाएं चल रही हैं। लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा को अब वापस ले लिया गया है, जिससे उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन आया है। यह एक महत्वपूर्ण बिहार गवर्नमेंट डिसीजन है।
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किसकी सुरक्षा घटी, किसे मिली विशेष व्यवस्था?
बिहार सरकार के गृह विभाग ने गुरुवार को इस संबंध में एक विस्तृत अधिसूचना जारी की। संयुक्त सचिव नवीन चंद्र ने पुलिस महानिदेशक को लिखे पत्र में बताया कि हाल ही में राज्य सुरक्षा समिति की बैठक हुई थी, जिसमें इन विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा श्रेणी तय करने का निर्णय लिया गया था। नए सरकारी आदेश के तहत, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को अब जेड प्लस सुरक्षा के बजाय बिहार पुलिस की विशेष सुरक्षा व्यवस्था प्रदान की जाएगी। इस संशोधित व्यवस्था में एक एस्कॉर्ट टीम, बुलेट प्रूफ कार और 8 से 16 सुरक्षा गार्ड शामिल होंगे, जो उनके दैनिक आवागमन और आवास पर तैनात रहेंगे।
लालू प्रसाद यादव को अब तक जेड प्लस सुरक्षा मिलती आ रही थी, जो देश की दूसरी सबसे उच्चतम सुरक्षा श्रेणी मानी जाती है। इसमें आमतौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) स्तर के कमांडो सहित तीन स्तरीय सुरक्षा घेरा होता है। अब उन्हें बिहार सैन्य पुलिस (बीसैप) के 2 से 8 हाउस गार्ड, पटना जिला बल से 2 बॉडीगार्ड, मुख्यालय त्वरित प्रतिक्रिया टीम (HQRT) से पायलट और बुलेट प्रूफ कार के साथ-साथ पटना जिला बल से एक एस्कॉर्ट टीम मुहैया कराई जाएगी। यह उनकी पूर्व की सुरक्षा की तुलना में एक महत्वपूर्ण बदलाव है।
राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और लालू के बड़े बेटे, तेज प्रताप यादव की वाई श्रेणी की सुरक्षा भी हटा ली गई है। उन्हें अब केवल एक बॉडीगार्ड प्रदान किया जाएगा, जो उनके लिए सुरक्षा कटौती का स्पष्ट संकेत है। वहीं, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, उनकी पत्नी राजश्री और बहन मीसा भारती की सुरक्षा में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे उन्हें यथावत सुरक्षा मिलती रहेगी।
तेजस्वी यादव को पहले की तरह वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिलती रहेगी, जिसमें बीसैप के 1-4 हाउस गार्ड, पटना जिला बल के 6 बॉडीगार्ड और एक पूरी एस्कॉर्ट पार्टी के सदस्य शामिल होंगे। लालू की बड़ी बेटी और आरजेडी सांसद मीसा भारती को भी पूर्ववत 3 बॉडीगार्ड मिलते रहेंगे। इसके अतिरिक्त, तेजस्वी यादव की पत्नी राजश्री को भी पटना जिला बल से एक महिला बॉडीगार्ड पहले की तरह उपलब्ध कराया जाएगा। यह सभी बदलाव गृह विभाग की अनुशंसा पर आधारित हैं।
राबड़ी देवी को लालू प्रसाद यादव से थोड़ी अधिक सुरक्षा प्रदान की गई है, जिसका कारण उनका पूर्व मुख्यमंत्री होना और वर्तमान में बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष का पद धारण करना है। उन्हें बीसैप से 2-8 हाउस गार्ड, 3 महिला बॉडीगार्ड, 3 वर्दीधारी बॉडीगार्ड, मुख्यालय त्वरित प्रतिक्रिया टीम (HQRT) से पायलट, बुलेट प्रूफ कार और पटना जिला बल से एक एस्कॉर्ट टीम मिलेगी। यह सुरक्षा व्यवस्था उनके राजनीतिक कद और सुरक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
लालू परिवार की सुरक्षा और सरकारी आवास का मामला
सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार का यह बड़ा फैसला एक ऐसे संवेदनशील समय पर आया है, जब लालू परिवार को राबड़ी देवी के सरकारी आवास को खाली करने का नोटिस मिला हुआ है। पिछले लगभग छह महीने से यह मामला चर्चा में है। भवन निर्माण विभाग ने विधान परिषद की नेता प्रतिपक्ष के लिए 39 हार्डिंग रोड का बंगला निर्धारित किया था।
इसके बाद राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित अपना वर्तमान बंगला खाली कर नए आवंटित आवास में स्थानांतरित होने के निर्देश दिए गए थे। वर्तमान में 10 सर्कुलर रोड का यह बंगला मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित किया गया है। हालांकि, राबड़ी देवी ने हाल ही में यह बंगला खाली करने से स्पष्ट इनकार कर दिया था, जिसके बाद उन्हें 15 दिनों का नोटिस जारी किया गया है।
राष्ट्रीय जनता दल इस पूरे प्रकरण को लेकर लगातार सरकार पर हमलावर है। पार्टी आरोप लगा रही है कि यह लालू परिवार को जानबूझकर परेशान करने की कोशिश है। लालू परिवार पिछले 20 सालों से इस 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास में रह रहा है, जिससे उनका इस जगह से गहरा भावनात्मक जुड़ाव है।
इस विवाद के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि सरकारी आवास किसी की निजी संपत्ति नहीं होते और किसी भी कीमत पर राबड़ी देवी को यह बंगला खाली करना ही होगा। सुरक्षा में कटौती का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब सरकारी आवास विवाद अपने चरम पर है।
इससे राज्य की राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ने की संभावना है। यह घटनाक्रम बिहार की मौजूदा राजनीति पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
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इस पूरी स्थिति को बिहार में राजनीतिक खींचतान के तौर पर देखा जा रहा है। एक तरफ सरकार अपने नियमों और आदेशों पर अडिग है, वहीं दूसरी तरफ राजद इसे राजनीतिक प्रतिशोध मान रहा है। आने वाले दिनों में यह सुरक्षा कटौती और सरकारी आवास का मुद्दा राज्य की सियासत में एक महत्वपूर्ण बिंदु बने रह सकते हैं। सुरक्षा व्यवस्था में किए गए इन बदलावों से विशिष्ट व्यक्तियों के प्रोटोकॉल और नियमों पर भी बहस छिड़ सकती है, जो भविष्य में अन्य नेताओं की सुरक्षा पर भी असर डाल सकती है।







