किशनगंज महिला क्रिकेट टीम: किशनगंज जिले के खेल इतिहास में एक नया और अभूतपूर्व अध्याय जुड़ गया है। अब तक कला और संस्कृति के लिए पहचान बनाने वाले इस सीमांचल क्षेत्र ने खेल के मैदान पर भी अपना परचम लहरा दिया है। यह एक ऐतिहासिक पल है जब किशनगंज की छह होनहार बेटियों का चयन बिहार महिला क्रिकेट टीम में हुआ है। ये बेटियां आगामी राष्ट्रीय टी-20 टूर्नामेंट में बिहार का प्रतिनिधित्व करेंगी, जो जिले के लिए गर्व का विषय है।
क्रिकेट की पिच पर अपनी घूमती गेंदों और दमदार शॉट्स से विरोधी टीमों को पस्त करने वाली इन छह युवा प्रतिभाओं का चयन न केवल उनकी कड़ी मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि यदि सही अवसर और मार्गदर्शन मिले तो दूरदराज के क्षेत्रों की बेटियां भी आसमान छू सकती हैं। खेल समीक्षक इस उपलब्धि को महिला क्रिकेट के एक नए युग की शुरुआत मान रहे हैं, जो समाज में लैंगिक रूढ़ियों को तोड़ रहा है।
बिहार टीम में किशनगंज की बेटियों का दबदबा
इस महत्वपूर्ण चयन में किशनगंज जिले की बड़ी भागीदारी ने सभी को चौंका दिया है। अंडर-19 (U-19) आयु वर्ग में किशनगंज की चार बेहतरीन महिला क्रिकेटरों ने अपनी जगह पक्की की है। इनमें प्रतिभाशाली तानिया, फुर्तीली श्रुति, जुझारू मुस्कान और होनहार लक्खी कुमारी शामिल हैं। इन खिलाड़ियों ने अपनी शानदार खेल तकनीक और मैदान पर हरफनमौला प्रदर्शन से चयनकर्ताओं को प्रभावित किया।
भविष्य की तैयारियों और युवा प्रतिभाओं को निखारने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले अंडर-15 (U-15) वर्ग में भी जिले की दो बालिकाओं ने टीम में अपनी जगह बनाई है। इनमें ऊर्जावान सिया चौहान और कुशल साक्षी साहा शामिल हैं। इनकी शानदार खेल कला ने यह साबित कर दिया है कि किशनगंज में क्रिकेट प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें सही दिशा देने की आवश्यकता है।
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संघ के प्रयासों से बदली महिला क्रिकेट की तस्वीर
किशनगंज में महिला क्रिकेट के क्षेत्र में आई इस क्रांति के पीछे किशनगंज जिला क्रिकेट संघ (KDCA) की अध्यक्ष संगीता जैन और उपाध्यक्ष मोताहेरा जबी का अथक परिश्रम और दूरदर्शिता रही है। पिछले कई वर्षों से इन दोनों पदाधिकारियों ने लड़कियों को क्रिकेट से जोड़ने के लिए लगातार व्यावहारिक प्रयास किए हैं। उन्होंने जिला स्तर पर विशेष क्रिकेट कैंप आयोजित करवाए, खिलाड़ियों को आधुनिक खेल किट उपलब्ध कराई और राज्य स्तरीय सीनियर पदाधिकारियों की देखरेख में निष्पक्ष ट्रायल्स सुनिश्चित किए।
उनके इन ज़मीनी प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं। खेल प्रेमियों का कहना है कि जहां एक समय समाज लड़कियों को खेल के मैदान में भेजने से कतराता था, वहीं आज इन छह बेटियों की अभूतपूर्व सफलता ने हर अभिभावक को अपनी बेटी को बैट और बॉल थमाने के लिए प्रेरित किया है। यह बदलाव केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सोच में एक बड़ा परिवर्तन भी है।
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राष्ट्रीय स्तर पर बिहार और किशनगंज का नाम रोशन करने का संकल्प
इस ऐतिहासिक चयन की खबर मिलते ही पूरे जिले में खुशी और उत्साह की लहर दौड़ गई। किशनगंज जिला क्रिकेट संघ के सचिव तबरेज आलम सहित संघ के तमाम वरिष्ठ पदाधिकारियों, अंपायरों और खेल प्रेमियों ने चयनित खिलाड़ियों के आवास पर पहुंचकर उन्हें और उनके माता-पिता को बधाई दी। मिठाई खिलाकर इस खास पल का जश्न मनाया गया, जो खिलाड़ियों के साथ-साथ उनके परिवारों के लिए भी गर्व का विषय है।
सचिव तबरेज आलम ने सभी चयनित खिलाड़ियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह चयन तो महज एक शुरुआत है। उन्हें पूरा विश्वास है कि आने वाले वर्षों में किशनगंज पूरे बिहार के भीतर महिला क्रिकेट का सबसे मजबूत गढ़ और एक अग्रणी प्रशिक्षण केंद्र बनकर उभरेगा। इस घोषणा ने जिले के अन्य युवा खिलाड़ियों में भी नई उम्मीद जगाई है।
पूरे जिले में फैले इस जश्न के माहौल के बीच, सभी छह महिला क्रिकेटरों ने अपनी फिटनेस पर और कड़ी मेहनत शुरू कर दी है। वे नेट्स पर घंटों पसीना बहा रही हैं और आगामी टी-20 टूर्नामेंट के लिए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे रही हैं। खिलाड़ियों को पूरा भरोसा है कि वे अपने बेहतरीन हरफनमौला प्रदर्शन के दम पर न केवल बिहार टीम को राष्ट्रीय चैंपियन बनाएंगी, बल्कि राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नजरों में आकर भारतीय महिला टीम (Team India) की नीली जर्सी पहनने के अपने परम सपने को भी साकार करेंगी। यह सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि अनगिनत लड़कियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।
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