Muzaffarpur Hospital Fire Arrest: मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड को लेकर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। आईसीयू में आग लगने की घटना में छह मरीजों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस मामले में अब तक तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अस्पताल का संचालक अभी भी फरार है। यह घटना अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही को उजागर करती है।

पुलिस के अनुसार, इस मामले में आईसीयू के ऑन-ड्यूटी डॉक्टर पंकज, एडमिन मैनेजर रामकुमार और मेंटेनेंस मैनेजर अजीत कुमार को गिरफ्तार किया गया है। इन तीनों पर गंभीर आरोप लगे हैं। घटना के बाद से ही प्रसाद अस्पताल के संचालक डॉ. उपेंद्र प्रसाद भूमिगत हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।
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गिरफ्तारियों और लापरवाही का चौंकाने वाला खुलासा
सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी ने जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अग्निकांड के समय गिरफ्तार किए गए डॉक्टर पंकज अपनी ड्यूटी पर मौजूद नहीं थे। इसी तरह, एडमिन मैनेजर रामकुमार भी आग लगने के काफी देर बाद अस्पताल पहुंचे, जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो चुकी थी।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि आग लगने के बाद अस्पताल के कई कर्मचारी संवेदनहीनता की सारी हदें पार करते हुए मरीजों को तड़पता छोड़कर मौके से फरार हो गए थे। ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है, क्योंकि उन्होंने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया।
फायर ब्रिगेड और पुलिस की संयुक्त जांच टीम ने मेंटेनेंस में गंभीर खामियों का खुलासा किया है। जांच के अनुसार, आईसीयू में लगा एयर कंडीशनर (AC) लंबे समय से सर्विस नहीं किया गया था। प्रारंभिक तौर पर, इसी एसी में आई तकनीकी खराबी के कारण हुए शॉर्ट सर्किट को आग लगने की मुख्य वजह माना जा रहा है। यह बिहार अस्पताल लापरवाही के मामलों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रबंधन की भूमिका पर गहन जांच और सुरक्षा के सवाल
ब्रह्मपुरा थाना पुलिस ने फायर ऑफिसर आर.एन. पांडेय के आवेदन पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जा रहा है। पुलिस अब अस्पताल प्रबंधन और मालिक डॉ. उपेंद्र प्रसाद की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है।
जांच के प्रमुख बिंदुओं में अस्पताल में फायर सेफ्टी नियमों का अनुपालन, भवन की सुरक्षा व्यवस्था, और कर्मचारियों की जवाबदेही शामिल है। यह देखा जा रहा है कि क्या अस्पताल ने आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन किया था या नहीं। इस मामले में पुलिस ने अब तक संदेह के आधार पर 10 अन्य लोगों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की है।
यह दर्दनाक घटना 4 जून 2026 की अलसुबह करीब 3:30 बजे हुई थी, जब प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू में अचानक आग लग गई। इस दिल दहला देने वाले हादसे में आईसीयू में भर्ती छह मरीजों की दम घुटने और जलने से मौत हो गई। मृतकों के परिजनों में गहरा सदमा और आक्रोश है।
हालांकि, समय रहते 18 अन्य मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालकर दूसरे अस्पतालों में स्थानांतरित कर दिया गया, जिससे उनकी जान बचाई जा सकी। पुलिस और प्रशासन इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाए हुए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और मरीजों की जान को खतरे में डालने जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर किया है। उम्मीद है कि इस मामले में सख्त कार्रवाई से अन्य अस्पतालों के लिए एक सबक मिलेगा, ताकि भविष्य में ऐसी हृदय विदारक घटनाएं न हों।
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