Bihar Road Construction News: बिहार के पथ निर्माण विभाग ने हाल ही में राज्य की सड़क परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण के प्रस्ताव पर विभिन्न हितधारकों के साथ एक महत्वपूर्ण परिचर्चा का आयोजन किया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य बिहार के सड़क बुनियादी ढांचे को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना और निजी निवेश को आकर्षित करना था। विभाग का मानना है कि इस तरह की पहल से राज्य की आर्थिक प्रगति को और अधिक गति मिलेगी।
इस परामर्श सत्र के दौरान, निजी क्षेत्र के निवेशकों और अन्य हितधारकों को बिहार के सड़क बुनियादी ढांचे के विकास में सक्रिय रूप से भाग लेने के अवसरों पर विचार-विमर्श करने के लिए आमंत्रित किया गया। बैठक में राज्य के प्रमुख राजमार्गों, अन्य महत्वपूर्ण सड़कों और बड़े पुलों की परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण पर गहन चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त, निजी निवेशकों की सहभागिता, पथ उपयोग शुल्क नियमावली, संविदा मसौदा और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
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सड़क नेटवर्क का विस्तार और रखरखाव में प्रगति
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने बैठक को संबोधित करते हुए बताया कि बिहार देश के सबसे तेजी से बढ़ते राज्यों में से एक है। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में राज्य ने अपने सड़क नेटवर्क के विस्तार, उन्नयन और रखरखाव में अभूतपूर्व प्रगति की है। वर्तमान में, बिहार सरकार के पास 3,617 किलोमीटर राजकीय राजमार्ग, 16,784 किलोमीटर मुख्य जिला सड़कें और लगभग 1.29 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कें हैं। सड़क नेटवर्क के व्यापक विकास और प्रभावी रखरखाव के कारण राज्य में यात्रा के समय में काफी कमी आई है।

सचिव ने इस बात पर भी जोर दिया कि बिहार प्रदर्शन-आधारित सड़क संपत्ति रखरखाव प्रणाली (Performance-based Maintenance System) को लागू करने में देश का एक अग्रणी राज्य है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में, पथ निर्माण विभाग अपने प्रदर्शन-आधारित अनुबंध OPRMC के तहत 19,305 किलोमीटर सड़क नेटवर्क के दीर्घकालिक रखरखाव के लिए प्रतिबद्ध है। इस प्रणाली में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) जैसी उन्नत तकनीकों को भी एकीकृत किया जा रहा है, जिससे रखरखाव कार्य और अधिक कुशल बन सके।
आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े और मुद्रीकरण की रणनीति
श्री पाल ने बिहार आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2024-25 का हवाला देते हुए बताया कि राज्य में बढ़ती आय और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी के कारण वाहनों के स्वामित्व में भारी वृद्धि हुई है। पिछले सात वर्षों में बिहार में वाहन पंजीकरण की वार्षिक विकास दर लगभग 6% रही है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2011 से 2024 के बीच परिवहन और संचार क्षेत्र में बिहार ने 7.6% की विकास दर दर्ज की है, जो उत्तर प्रदेश (10.1%) और कर्नाटक (7.7%) के बाद देश में तीसरे स्थान पर है। यह आंकड़ा राज्य की मजबूत आर्थिक प्रगति को दर्शाता है, जिससे निजी निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनता है।
सड़क संपत्ति मुद्रीकरण के प्रथम चरण में लगभग 3,000 किलोमीटर राजकीय राजमार्गों और 40 से अधिक पुलों की पहचान की गई है। ‘टोल ऑपरेट एंड ट्रांसफर’ (TOT) मॉडल के तहत आधार राजस्व का सटीक आकलन तैयार करने की प्रक्रिया वर्तमान में तेजी से चल रही है। संबंधित अधिकारियों को इस कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, अगले चरण में हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) और इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) मॉडल के तहत निर्माणाधीन लगभग 600 किलोमीटर प्रमुख राजमार्गों को भी एसेट मोनेटाइजेशन के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। यह कदम देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें बिहार Infrastructure Development को नई दिशा देगा।
निवेशकों के सुझाव और भविष्य की दिशा
इस महत्वपूर्ण परामर्श बैठक में कई प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें आईआरबी इन्फ्रास्ट्रक्चर से अमिताभ मुरारका, अडाणी रोड्स से शिखर रंजन और शिबी करुणाकरण, प्रकाश एस्फाल्टिंग एंड टोल (इंडिया) लिमिटेड से अजय सिंह, एसपीएस कंस्ट्रक्शन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से अरविंद कुमार पांडेय, मेपल इन्फ्रास्ट्रक्चर से जयदीप मणिक, केएमसी कंस्ट्रक्शन लिमिटेड से शशांक शेखर, वर्टिस इन्फ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट से सावेद राउत और शिवनारायणा अमिपाली, ए.आर. इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से एन साई और नवयुगा इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड से एस. टी. रत्नगम प्रमुख थे।
कंसल्टेशन मीट के दौरान उपस्थित प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि बिहार में ‘टोल ऑपरेट एंड ट्रांसफर’ मॉडल, बेस रेट, रेवेन्यू शॉटफॉल, ट्रैफिक सर्वे, लोगों में टोल की राशि देने पर जागरूकता तथा परिसंपत्ति मुद्रीकरण की नई पद्धतियों को लागू करने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। सचिव ने कंपनियों से प्राप्त बहुमूल्य सुझावों का स्वागत किया और आश्वस्त किया कि शेष स्वीकार्य सुझावों को भी नीति निर्धारण में शामिल किया जाएगा। उन्होंने आगे बताया कि एनएचएआई द्वारा अपनाई जा रही प्रक्रियाओं का गहन अध्ययन किया गया है और रियायतग्राहियों के सभी सुझावों को ध्यान में रखकर ही प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। इन सुझावों को राज्य की आगामी नीति निर्धारण में समाविष्ट करने हेतु संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
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यह पहल बिहार के सड़क नेटवर्क को आधुनिक बनाने और राज्य के विकास में निजी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल सड़कों की गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।








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