Darbhanga Crime News: दरभंगा सिविल कोर्ट ने चार जघन्य आपराधिक मामलों में शामिल 12 अभियुक्तों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया है। न्यायाधीशों द्वारा सुनाए गए इस फैसले से अपराधियों को सख्त संदेश गया है और जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने के प्रति न्यायपालिका की दृढ़ता स्पष्ट हुई है। इन मामलों में अपहरण और जानलेवा हमला जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं, जिनमें अदालत ने कोई ढिलाई नहीं बरती है।
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अदालत ने अपहरण के आरोपियों को नहीं दी राहत
मनीगाछी थाना क्षेत्र के कनोखर गांव से एक नाबालिग लड़की के अपहरण के मामले में छह अभियुक्तों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) प्रथम नीरज कुमार की अदालत ने गीता देवी, दुलारी देवी, पंकज सहनी, राजदेव सहनी, नीलम देवी और मुकेश सहनी की याचिकाएं निरस्त कर दीं। लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने अदालत को बताया कि अपहरण जैसे गंभीर अपराध में आरोपी अग्रिम जमानत के हकदार नहीं होते हैं, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। यह फैसला अपहरण जैसे मामलों में अपराधियों को कड़ी चेतावनी देता है।
नीरज कुमार की अदालत ने एक अन्य मामले में भी कड़ा रुख अपनाया। हायाघाट थाना कांड संख्या 14/26 में जानलेवा हमला के आरोप में रतनपुरा गांव के सम्मी पासवान की अग्रिम जमानत याचिका को भी न्यायाधीश ने खारिज कर दिया। इस फैसले से हिंसक अपराधों में शामिल व्यक्तियों को कोई राहत न मिलने का संकेत मिला है। न्यायपालिका लगातार ऐसे मामलों में सख्त रवैया अपना रही है, जो समाज में सुरक्षा का माहौल स्थापित करने में सहायक है।
जानलेवा हमले और हत्या के मामलों में भी जमानत खारिज
हायाघाट थाना में दर्ज प्राथमिकी संख्या 57/26 के आरोपी धर्मेंद्र झा और रूपम को भी अदालत से कोई राहत नहीं मिली। इन पर तलवार से हमला कर बुरी तरह घायल करने का आरोप है। एडीजे भूपेंद्र सिंह की अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका को नामंजूर कर दिया। यह मामला हिंसा की गंभीरता को दर्शाता है, जिसमें हथियार का प्रयोग किया गया था। इस तरह के अपराधों में जमानत न मिलना न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास को बढ़ाता है।
लहेरियासराय थाना प्राथमिकी संख्या 196/26 में जानलेवा हमले के तीन आरोपियों, मो. इस्लाम, मो. रियाज और मो. आदिल की अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज कर दी गई। एडीजे संतोष कुमार पांडे की अदालत ने यह फैसला सुनाया। लोक अभियोजक झा ने बताया कि इन अभियुक्तों द्वारा किए गए जानलेवा हमले के कारण पीड़ित मो. अशरफ के पिता मो. अख्तर की दुखद मृत्यु हो गई थी। यह फैसला Bihar Court News के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है, जो दिखाती है कि न्यायपालिका गंभीर अपराधों को कितनी गंभीरता से लेती है।
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इन सभी फैसलों से स्पष्ट है कि दरभंगा सिविल कोर्ट गंभीर आपराधिक मामलों में अभियुक्तों को कोई रियायत देने के मूड में नहीं है। न्यायपालिका का यह कठोर रुख आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने और समाज में शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहायक सिद्ध होगा। पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे आम जनता में भी कानून के प्रति विश्वास मजबूत होगा।
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