Jale Kisan News: कृषि विज्ञान केंद्र में शुक्रवार को ‘खेत बचाओ अभियान’ और ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ के अवसर पर किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को मिट्टी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना तथा वैज्ञानिक तरीकों से कृषि उत्पादन बढ़ाने की जानकारी देना था।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्र के वरीय वैज्ञानिक सह अध्यक्ष डॉ. दिव्यांशु शेखर ने की। उन्होंने किसानों को मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के सही उपयोग और फसल अवशेष प्रबंधन के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। मुख्य अतिथि के तौर पर जाले विधायक डॉ. जीवेश कुमार उपस्थित रहे। उन्होंने किसानों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि धरती हमारी मां है और इसकी रक्षा करना हमारा पहला धर्म है, इसलिए कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाएं।

इस अवसर पर विधायक डॉ. जीवेश कुमार और डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत किसानों के बीच डिब्लर, नैपसैक स्प्रेयर, धान बीज और मशरूम बैग का वितरण भी किया गया। आत्मा प्रायोजित परियोजना के तहत वर्मी बेड भी बांटे गए। डॉ. अनिल कुमार सिंह ने किसानों को संतुलित एवं अनुशंसित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करने पर जोर दिया।
उद्यानिकी विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप कुमार विश्वकर्मा ने फल, सब्जी एवं बागवानी फसलों में कीट एवं रोग प्रबंधन तथा संतुलित उर्वरक उपयोग की महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
मिट्टी और जल संरक्षण की आधुनिक तकनीकें
मृदा एवं जल अभियांत्रिकी विशेषज्ञ ई. निधि कुमारी ने मिट्टी एवं जल संरक्षण की उन्नत तकनीकों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मिट्टी का कटाव, असंतुलित सिंचाई और जल निकास की समस्याएं सीधे तौर पर फसल उत्पादन को प्रभावित करती हैं, जिनके समाधान के लिए आधुनिक विधियां अपनाना आवश्यक है।
गृह वैज्ञानिक डॉ. पूजा कुमारी ने मशरूम उत्पादन का व्यावहारिक प्रदर्शन किया और पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण के महत्व पर बल दिया। फार्म मैनेजर डॉ. चंदन कुमार ने धान की खेती में एजोला के उपयोग से नाइट्रोजन की बचत के बारे में किसानों को समझाया।
जलवायु परिवर्तन के बीच कृषि का भविष्य
इस कार्यक्रम के दौरान किसानों को जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच कृषि उत्पादन बढ़ाने के वैज्ञानिक उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई। यह पहल दरभंगा पर्यावरण समाचारों के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई, जो क्षेत्र में पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा देती है।
विभिन्न प्रखंडों से आए कुल 191 किसानों ने इस जागरूकता कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने विशेषज्ञों से अपनी कृषि संबंधी समस्याओं के समाधान प्राप्त किए, जिससे उन्हें भविष्य की खेती के लिए नई दिशा मिली।
देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
यह कार्यक्रम न केवल किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों से अवगत कराने में सफल रहा, बल्कि इसने पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी एक मजबूत संदेश दिया। ऐसे आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि विकास और पर्यावरणीय संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।








You must be logged in to post a comment.