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‘ … और बिहार में हो गया 350 करोड़ का बालू घोटाला ’, सरकारी सिस्टम कैसे हो गया बाईपास? जानिए बड़ा साइबर फ्रॉड के पीछे की पूरी रिपोर्ट

बिहार के खनन विभाग में हुआ 350 करोड़ का बालू घोटाला, जिसमें जालसाजों ने डिजिटल सिस्टम से छेड़छाड़ कर सरकारी खजाने को भारी चूना लगाया। अब 17 जिलों के 100 से ज्यादा लाइसेंसी और एनआईसी कर्मचारी आर्थिक अपराध इकाई के रडार पर हैं, जिससे पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है।

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Bihar Sand Scam: बिहार के खनन एवं भूतत्व विभाग के डिजिटल सिस्टम में एक चौंकाने वाली सेंधमारी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस बड़े घोटाले में जालसाजों ने विभाग के ‘खनन सॉफ्ट’ पोर्टल के साथ छेड़छाड़ कर राज्य के सरकारी खजाने को करीब 350 करोड़ रुपये का भारी नुकसान पहुंचाया है। अवैध तरीके से बालू की बिक्री का यह मामला उजागर होने के बाद पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है। इस महाघोटाले में एनआईसी (National Informatics Centre) के कई कर्मचारियों के साथ-साथ बिहार के 17 जिलों से संबंधित 100 से भी अधिक वैध लाइसेंसधारी अब सीधे तौर पर बिहार पुलिस और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के निशाने पर आ गए हैं।

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सरकारी राजस्व को चूना लगाने के इस हाई-प्रोफाइल मामले की पहली एफआईआर अक्टूबर 2023 में राजधानी पटना के साइबर थाने में दर्ज की गई थी। इस शिकायत के बाद मामले की कड़ियां धीरे-धीरे खुलती चली गईं, जिससे एक बड़े संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने इस पूरे फर्जीवाड़े की गहनता से जांच शुरू कर दी है, जिसके बाद कई बड़े खुलासे होने की संभावना है।

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डिजिटल पोर्टल में सेंध लगाकर हुआ बड़ा घोटाला

विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे अवैध खेल को अंजाम देने के लिए जालसाजों ने सुरक्षा के सभी नियमों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया था। दर्ज एफआईआर के मुताबिक, बालू कारोबारियों ने जिला खनन कार्यालय की आवश्यक मंजूरी के बिना ही फर्जी कागजात तैयार किए और उन्हें सीधे ‘खनन सॉफ्ट’ पोर्टल पर अपलोड कर दिया। इसके बाद, उन्होंने अवैध रूप से सॉफ्टवेयर में बालू उठाने की निर्धारित मात्रा को बढ़ा लिया, जिससे वे तय सीमा से कहीं अधिक बालू बेच सके।

इस धोखाधड़ी से बड़े पैमाने पर सरकारी राजस्व का नुकसान हुआ, क्योंकि अवैध रूप से बेचे गए बालू पर कोई रॉयल्टी या टैक्स सरकार तक नहीं पहुंचा। यह पूरी प्रक्रिया संगठित तरीके से की गई थी, जिसमें कई स्तरों पर मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।

ओटीपी वेरिफिकेशन सिस्टम को ऐसे किया गया बाईपास

आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की अब तक की सघन जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इस घोटाले को अंजाम देने में विभाग में तैनात एनआईसी कर्मियों की सीधी मिलीभगत थी। इन कर्मियों ने मोबाइल पर आने वाले ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) ऑथेंटिकेशन के सुरक्षा नियम को पूरी तरह से बाईपास कर दिया था। इसका मतलब यह है कि बालू कारोबारियों को पोर्टल में कोई भी बदलाव करने या मात्रा बढ़ाने के लिए ओटीपी की आवश्यकता नहीं पड़ी, जिससे सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण कवच टूट गया।

ओटीपी सिस्टम को बंद करने के बाद, डेटाबेस सर्वर और मुख्य ‘खनन सॉफ्ट’ सॉफ्टवेयर के साथ सुनियोजित तरीके से छेड़छाड़ की गई। इसी तकनीकी खामी और मिलीभगत का फायदा उठाकर बिहार के 17 जिलों के बालू माफियाओं और धंधेबाजों ने मिलकर सरकार को 350 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व नुकसान पहुंचाया। यह दिखाता है कि कैसे सरकारी प्रक्रियाओं में डिजिटल सेंधमारी से बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया जा सकता है।

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आर्थिक अपराध इकाई की तेज हुई कार्रवाई

इस पूरे डिजिटल सिंडिकेट का भंडाफोड़ होने के बाद खनन एवं भूतत्व विभाग के निर्देश पर कार्रवाई शुरू की गई। पटना के तत्कालीन खनन निरीक्षक मृत्युंजय कुमार झा ने इस मामले में पहली औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। दरअसल, बालू पट्टा क्षेत्र से अलग बालू के भंडारण और उसकी बिक्री को विनियमित करने के लिए ही लाइसेंसधारियों को लॉगिन आईडी और पासवर्ड दिए जाते हैं, ताकि वे ई-चालान काटकर हर लेनदेन का रिकॉर्ड रख सकें और पारदर्शिता बनी रहे।

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लेकिन, इस घोटाले में शामिल कारोबारियों ने एनआईसी कर्मियों से साठगांठ कर इस व्यवस्था का दुरुपयोग किया और निर्धारित कानूनी सीमा से कई गुना अधिक बालू बेच डाला। यह पूरी तरह से जालसाजी और धोखाधड़ी का मामला है, जो सरकारी नियंत्रण और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब तक, इस बड़ी जालसाजी से संबंधित बिहार के 17 अलग-अलग जिलों में कुल 62 आपराधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

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इन सभी मामलों की पूरी जांच आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की एक विशेष टीम द्वारा की जा रही है, जो इस घोटाले की जड़ तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की गंभीर धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई तेज कर दी गई है। यह Patna Police Investigation और EOU की जांच अब इस बड़े बालू घोटाले में शामिल सभी लोगों को बेनकाब करने में लगी है, ताकि सरकारी राजस्व की हुई क्षति की भरपाई की जा सके और दोषी व्यक्तियों को उनके किए की सजा मिल सके।

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