Bettiah Fire Audit: पश्चिम चंपारण जिले में अब अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की गहन जांच की तैयारी शुरू हो गई है। जिला पदाधिकारी तरनजोत सिंह ने सोमवार को बेतिया समाहरणालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान सभी संबंधित विभागों को फायर सेफ्टी मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य संभावित आगजनी की घटनाओं पर अंकुश लगाना और आम जनता की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। यह कदम जिले में हाल ही में सामने आई कुछ आग लगने की घटनाओं और देश भर में सामने आ रही ऐसी घटनाओं के मद्देनजर उठाया गया है, जहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण बड़े नुकसान हुए हैं।
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जिला पदाधिकारी तरनजोत सिंह ने इस दौरान अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि अग्नि सुरक्षा केवल कागजी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन और बहुमूल्य संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर विषय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में मौजूद सभी विभागाध्यक्षों को अपने-अपने अधीन आने वाले संस्थानों में सुरक्षा सुनिश्चित करने की व्यक्तिगत जिम्मेदारी दी गई है।
अग्नि सुरक्षा ऑडिट के लिए गठित होगा विशेष दल
बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया कि जिले के विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की जांच के लिए एक विशेष जिला स्तरीय जांच दल का गठन किया जाएगा। यह दल प्राथमिकता के आधार पर विभिन्न भवनों का व्यापक निरीक्षण करेगा और फायर ऑडिट रिपोर्ट तैयार करेगा। इस दल में अग्निशमन विभाग, भवन निर्माण विभाग और अन्य संबंधित विभागों के विशेषज्ञ शामिल होंगे। दल का मुख्य कार्य यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी संस्थानों में निर्धारित अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि फायर ऑडिट की प्रक्रिया केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका वास्तविक उद्देश्य सुरक्षा कमियों को पहचानना और उन्हें तत्काल दूर करवाना है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों को गंभीरता से लिया जाए और उनकी रिपोर्टिंग के साथ-साथ उनके समाधान के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय की जाए।
कमियों को दूर करने के लिए डीएम ने दिए सख्त निर्देश
निरीक्षण के दौरान उजागर होने वाली किसी भी कमी को निर्धारित समय सीमा के भीतर ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को विशेष रूप से उन संस्थानों पर ध्यान देने को कहा है जहाँ अग्निशमन उपकरण या तो उपलब्ध नहीं हैं या वर्तमान में खराब स्थिति में हैं। ऐसे सभी स्थानों पर तत्काल आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के सख्त आदेश दिए गए हैं। इसमें फायर एक्सटिंग्विशर, ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम, फायर अलार्म सिस्टम, आपातकालीन निकास द्वार और अन्य महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और कार्यशीलता सुनिश्चित करना शामिल है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इन उपकरणों की केवल स्थापना ही काफी नहीं है, बल्कि उनकी नियमित जांच और रखरखाव भी उतना ही आवश्यक है ताकि आपात स्थिति में वे प्रभावी रूप से काम कर सकें। प्रशासन ने यह भी बताया कि पश्चिम चंपारण फायर सेफ्टी सुनिश्चित करने के लिए सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा। यह व्यापक अभियान जिले के अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों, शॉपिंग मॉल और अन्य सार्वजनिक सभा स्थलों को कवर करेगा।
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आपातकालीन स्थितियों के लिए कर्मचारियों का प्रशिक्षण
जिले के सरकारी कार्यालयों, विद्यालयों, स्वास्थ्य संस्थानों और अन्य सार्वजनिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के दौरान, डीएम ने कर्मचारियों को आपदा और आग लगने जैसी आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित करने पर भी विशेष बल दिया। उनका मानना था कि केवल उपकरण होने से ही सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि उन उपकरणों का सही उपयोग कैसे किया जाए, इसकी जानकारी होना भी बेहद महत्वपूर्ण है। इसके लिए समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके और कर्मचारियों को ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए तैयार किया जा सके।
प्रशासन का मानना है कि आगजनी की घटनाएं केवल संपत्ति को ही नहीं, बल्कि मानवीय जीवन को भी गंभीर खतरा पहुंचा सकती हैं। हाल के दिनों में कई राज्यों में अस्पतालों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में आग लगने की घटनाओं से हुए जान-माल के भारी नुकसान को देखते हुए, बेतिया जिला प्रशासन ने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही की कोई गुंजाइश न रहे, जिससे किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।
बैठक में उप विकास आयुक्त काजले वैभव नितिन, नगर आयुक्त शिवाक्षी दीक्षित, अपर समाहर्ता राजीव रंजन सिन्हा, अपर समाहर्ता-सह-जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी अनिल कुमार सिन्हा, निदेशक डीआरडीए अरुण प्रकाश सहित कई विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी और कार्यपालक अभियंता मौजूद थे। प्रशासन को उम्मीद है कि इस व्यापक फायर ऑडिट अभियान और उसके उपरांत की जाने वाली कार्रवाइयों से जिले के सभी महत्वपूर्ण संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी, जिससे आम जनता सुरक्षित महसूस कर सके।
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