Patna Paper Leak News: बिहार में पेपर लीक का ‘जिन्न’ एक बार फिर बाहर आ गया है, जिसने राज्य के युवाओं में भारी आक्रोश भर दिया है। बिहार पुलिस अवर निरीक्षक (दरोगा) मुख्य परीक्षा में पेपर लीक के गंभीर आरोपों ने हजारों अभ्यर्थियों के सपनों को प्रभावित किया है। इस मामले को लेकर सोमवार को राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में सैकड़ों की संख्या में अभ्यर्थियों ने एकजुट होकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया, जिससे वहां कुछ समय के लिए हड़कंप मच गया।
प्रदर्शनकारी छात्र अपने हाथों में तख्तियां लिए हुए थे और उन्होंने बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनकी मुख्य मांग यह थी कि सरकार इस पूरे गंभीर प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन करे। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी मांग की कि मुख्य परीक्षा को अविलंब रद्द कर नए सिरे से पूरी पारदर्शिता के साथ परीक्षा आयोजित की जाए ताकि किसी भी योग्य अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो।
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पेपर लीक के आरोपों पर आयोग का मौन, छात्रों में गुस्सा
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का सीधा आरोप है कि आयोग ने बीते 3 जून को जो आधिकारिक नोटिस जारी किया था, उसमें पूर्णिया और गया जिले में सामने आए संदिग्ध पेपर लीक मामलों को पूरी तरह से दबा दिया गया। छात्रों का कहना है कि इतनी बड़ी गड़बड़ी के मामले को बिना किसी उच्चस्तरीय फॉरेंसिक जांच के आनन-फानन में रफा-दफा करने का प्रयास किया जा रहा है, जो सरासर गलत है। उनके अनुसार, यह राज्य के लाखों ईमानदार और मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ सीधे तौर पर खिलवाड़ है, जो सालों से Bihar Police Exam News और इसकी तैयारी में लगे हुए हैं। छात्रों का कहना है कि आयोग का यह रवैया उनकी उम्मीदों को तोड़ रहा है।
छात्रों ने स्पष्ट रूप से सवाल उठाया है कि जब पूर्णिया और गया में गड़बड़ी के स्पष्ट प्रमाण थे, तो आयोग ने अपनी विज्ञप्ति में उनका उल्लेख क्यों नहीं किया। उनका कहना है कि आयोग की विश्वसनीयता पर अब सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि ऐसा लगता है कि वह कुछ तथ्यों को छिपाने का प्रयास कर रहा है। यह स्थिति उन सभी छात्रों के लिए बेहद चिंताजनक है जो ईमानदारी से अपनी मेहनत के बल पर परीक्षा पास करना चाहते हैं।
पूर्णिया में वीक्षक ने खींची प्रश्न-पत्र की फोटो, फैला सनसनी
आक्रोशित अभ्यर्थियों ने पूर्णिया जिले के एक परीक्षा केंद्र का हवाला देते हुए प्रशासनिक चूक और मिलीभगत की पोल खोली। छात्रों ने बताया कि पूर्णिया के राजकीय कन्या उच्च विद्यालय केंद्र पर तैनात एक वीक्षक, जिसका नाम मृत्युंजय कुमार बताया गया है, ने परीक्षा की अवधि के दौरान ही अपने मोबाइल से प्रश्न-पत्र की फोटो खींची थी।
इसके बाद, उसने वह फोटो पटना में बैठे अपने एक रिश्तेदार को व्हाट्सएप के जरिए भेज दिया था। यह घटना पूरे बिहार में सनसनी फैलाने वाली थी। छात्रों ने सवाल उठाया कि जब यह मामला पूरी तरह ऑन-रिकॉर्ड है और इसके प्रमाण मौजूद हैं, तो BPSSC ने अपने हालिया नोटिस में पूर्णिया की इस गंभीर घटना का जिक्र तक क्यों नहीं किया? आयोग ने बिना किसी गहन तफ्तीश के इस परीक्षा को पूरी तरह ‘अप्रभावित’ घोषित कर दिया, जिससे आयोग की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है और छात्रों का विश्वास डगमगा गया है। यह फैसला उन छात्रों के साथ अन्याय है जिन्होंने पूरी ईमानदारी से परीक्षा दी।
गया में सॉल्वर गैंग पर कार्रवाई, फिर भी आयोग चुप क्यों?
पूर्णिया के अलावा, गया जिले में भी परीक्षा के दौरान बड़ी गड़बड़ी की बात सामने आई है, जिसने परीक्षा की पवित्रता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, गया में स्थानीय जिला पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए परीक्षा को प्रभावित करने वाले एक हाई-टेक सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ किया था। इस कार्रवाई में कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया और उन पर दंडात्मक कार्रवाई भी की गई।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि BPSSC द्वारा जारी की गई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में गया की इस पुलिसिया कार्रवाई का दूर-दूर तक कोई उल्लेख नहीं किया गया है। अभ्यर्थियों ने संयुक्त रूप से कहा कि पूर्णिया और गया दोनों ही जिलों के मामलों में आयोग का यह उदासीन और जानकारी छुपाने वाला रवैया बेहद संदेहास्पद है। उनका मानना है कि यदि आयोग को किसी भी गड़बड़ी की जानकारी थी, तो उसे सार्वजनिक करना चाहिए था ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
छात्रों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया और पारदर्शी तरीके से फॉरेंसिक जांच नहीं कराई, तो यह छात्र आंदोलन पटना से निकलकर पूरे बिहार के जिला मुख्यालयों तक फैलेगा और एक विशाल जन आंदोलन का रूप ले सकता है। छात्रों ने यह भी कहा कि वे अपनी मांगों को मनवाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं, क्योंकि यह उनके भविष्य का सवाल है।
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लाखों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है और सरकार को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेना चाहिए ताकि योग्य उम्मीदवारों को न्याय मिल सके।
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