Delhi Politics News: राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में विपक्षी दलों के इंडी गठबंधन की हालिया बैठक को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाजपा का कहना है कि यह बैठक गठबंधन की कमजोर होती राजनीतिक जमीन का प्रतीक है। पार्टी ने इसे केवल एक “ड्रामा” बताया है, जिसका उद्देश्य सिर्फ जनता को भ्रमित करना है।
भाजपा ने विपक्ष पर बोला करारा हमला और बताया ‘ड्रामा’
संसद भवन परिसर में हुई इस बैठक के बाद भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने सोमवार को पार्टी मुख्यालय में एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने विपक्षी गठबंधन की कार्यप्रणाली पर करारा कटाक्ष करते हुए कहा कि ये लोग हर तीसरे महीने चुनाव हारेंगे और हर दूसरे महीने अपनी समन्वय बैठकें करते रहेंगे। पात्रा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने चुनावों में हार का “शतक” लगाया है, लेकिन फिर भी वे ऐसे मुस्कुरा रहे थे जैसे उन्होंने कोई बहुत बड़ा दुर्ग या अभेद्य किला फतह कर लिया हो। यह उनके गंभीर राजनीतिक समझ की कमी को दर्शाता है।
सिमटती बैठकें: बड़े स्टेडियम से एक कमरे तक का सफर
संबित पात्रा ने गठबंधन की बदलती बैठकों की प्रकृति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि इंडी गठबंधन ने अब हर दो महीने में अपनी बैठकें आयोजित करने की योजना बनाई है। पात्रा ने याद दिलाया कि पहले इन बैठकों का आयोजन बेंगलुरु जैसे विशाल शहरों के स्टेडियम में बड़े धूमधाम से होता था, जहां सभी घटक दलों के नेता एकजुटता दिखाने के लिए एक साथ हाथ पकड़कर खड़े होते थे। हालांकि, अब ये महत्वपूर्ण बैठकें सिकुड़कर कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया जैसे छोटे स्थानों के केवल एक कमरे तक सीमित हो गई हैं। भाजपा प्रवक्ता ने इस बात पर जोर दिया कि इन नवीनतम बैठकों में अब पहले जैसा उत्साह, जनसमर्थन और लोगों की भीड़ बिल्कुल भी दिखाई नहीं देती है, जो गठबंधन की घटती लोकप्रियता का प्रमाण है। पात्रा ने व्यंग्यात्मक लहजे में भविष्यवाणी करते हुए यह भी कहा कि गठबंधन की तीसरी या चौथी बैठक तक तो ये नेता शायद किसी कार के अंदर ही बैठकर अपनी रणनीतियां बनाएंगे, क्योंकि उनके पास बड़े आयोजन करने के लिए न तो संसाधन बचे हैं और न ही जनसमर्थन।
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राहुल गांधी की मौजूदगी और राजनीतिक भविष्य पर सवाल
पात्रा ने समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव पर भी तीखा कटाक्ष किया, जो इस बैठक में शामिल थे। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव शायद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को देखकर यह विचार कर रहे होंगे कि उनका भी राजनीतिक हश्र जल्द ही ममता बनर्जी जैसा ही होने वाला है। भाजपा प्रवक्ता ने गंभीर आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि जहां भी Rahul Gandhi News की सक्रिय मौजूदगी होती है, वहां किसी भी सहयोगी या दल का राजनीतिक भविष्य सुरक्षित नहीं रह पाता है। उन्होंने तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के हालिया चुनावों का उदाहरण देते हुए विपक्ष की दोहरी रणनीति और पाखंड पर सवाल उठाए।
पात्रा ने कहा कि तमिलनाडु में कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों के तुरंत बाद एक अन्य क्षेत्रीय दल के साथ सफलतापूर्वक गठबंधन करके अपनी सरकार बना ली। लेकिन, जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा, तो वही विपक्षी दल अब एसआईआर (चुनावी अनियमितताओं) का रोना रो रहे हैं और व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने यह सवाल उठाया कि एसआईआर की शिकायतें तमिलनाडु और केरल में भी सामने आई थीं, लेकिन वहां तो सरकार का गठन कर लिया गया था। अब बंगाल में हारने के बाद चुनावी अनियमितताओं को दोष देना और उसका बार-बार रोना रोना ‘राजनीतिक पाखंड’ नहीं तो और क्या है? उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदुस्तान की जनता यह सब बारीकी से देख रही है और सब कुछ समझ रही है।
भाजपा प्रवक्ता ने आगे कहा कि यदि सही मायने में कुछ चोरी हुआ है, तो वह इंडी गठबंधन के नेताओं का राजनीतिक वजूद और उनकी साख है। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दलों की जमीन पर पकड़ लगातार कमजोर हो रही है और जनता ने उन्हें इसलिए समर्थन नहीं दिया है क्योंकि उनकी विश्वसनीयता अब पूरी तरह खत्म हो चुकी है। पात्रा ने विपक्षी गठबंधन की इस बैठक को “पूरी तरह से राजनीतिक पाखंड” करार दिया, जो केवल अपनी कमजोरियों को छिपाने का एक प्रयास है।
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भाजपा प्रवक्ता ने यह भी बताया कि विपक्षी दल अक्सर सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग करते रहते हैं। लेकिन, पिछली बार जब नारी सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दे पर एक सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी, तब इनमें से कोई भी राजनीतिक दल उपस्थित नहीं हुआ था; सभी प्रमुख नेता नदारद थे। इसके बावजूद, अब यही नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस करके फिर से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग कर रहे हैं, जो उनकी प्राथमिकता में दोहरापन दर्शाता है। उन्होंने अंत में कहा कि जनता ने इन विपक्षी दलों को पूरी तरह से निष्क्रिय (इन-एक्टिव) कर दिया है और उनकी बातों का अब कोई खास असर नहीं पड़ता।






